कुली की बेटी, सुरक्षा गार्ड-कंडक्टर का बेटा… EWS कोटा से UPSC क्रैक, पर कई की ‘पात्रता’ पर सवाल: रिपोर्ट में दावा- ‘एलीट क्लास’ ने भी उठाया फायदा

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे के तहत चयनित उम्मीदवारों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। 10 प्रतिशत आरक्षण के तहत चुने गए 104 उम्मीदवारों की पड़ताल में सामने आया कि इस सूची में जहाँ सुरक्षा गार्ड, बस कंडक्टर और रेलवे कुली जैसे परिवारों के बच्चे शामिल हैं।

वहीं कई ऐसे उम्मीदवार भी हैं जो निजी स्कूलों, महँगे कोचिंग संस्थानों, कारोबारी परिवारों और कॉर्पोरेट नौकरियों से जुड़े रहे हैं। इससे EWS व्यवस्था की पात्रता और जाँच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

बड़े कोचिंग संस्थानों से तैयारी, लाखों तक फीस

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जाँच में सामने आया है कि EWS कोटे से चयनित 104 उम्मीदवारों में से कम से कम 67 उम्मीदवारों ने देश के नामी सिविल सेवा कोचिंग संस्थानों से तैयारी की। इनमें Vajiram & Ravi, Vajirao & Reddy, Drishti IAS, ForumIAS, NextIAS, KingMakers IAS और UPSC Wallah जैसे संस्थान शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ संस्थानों की सालाना फीस 2.65 लाख रुपए तक पहुँचती है। कुल मिलाकर 84 उम्मीदवार किसी न किसी UPSC कोचिंग कार्यक्रम से जुड़े पाए गए। हालाँकि, कुछ संस्थान सीमित स्कॉलरशिप भी उपलब्ध कराते हैं।

निजी स्कूल, कारोबारी परिवार और कॉर्पोरेट प्रोफाइल

कम से कम 46 उम्मीदवार ऐसे पाए गए जिन्होंने दिल्ली-NCR, लखनऊ, जयपुर और रायपुर जैसे शहरों के निजी स्कूलों में पढ़ाई की, जहाँ फीस 45 हजार रुपए से लेकर 1.5 लाख रुपए सालाना तक बताई गई। इसके अलावा 28 उम्मीदवारों के परिवार व्यापार से जुड़े पाए गए।

जबकि कम से कम 10 उम्मीदवार UPSC की तैयारी से पहले निजी कंपनियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी कर चुके थे। शैक्षणिक प्रोफाइल में कम से कम 14 उम्मीदवार IIT और तीन NIT से पढ़े हुए मिले। वहीं, बड़ी संख्या में उम्मीदवार दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से भी जुड़े रहे।

दूसरी तरफ EWS के वास्तविक लाभार्थी भी

इसी सूची में ऐसे उम्मीदवार भी हैं जो EWS योजना के मूल उद्देश्य को दर्शाते हैं। इनमें सुरक्षा गार्ड के बेटे, स्कूल बस कंडक्टर के बेटे, पूर्व रेलवे कुली की बेटी, किसान और दिहाड़ी मजदूर परिवारों के बच्चे शामिल बताए गए। कम से कम 7 उम्मीदवार जवाहर नवोदय विद्यालयों से पढ़े हुए पाए गए और कई ग्रामीण व हिंदी माध्यम की पृष्ठभूमि से थे।

पूर्व अधिकारियों का कहना है कि EWS प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को केवल आय प्रमाण तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए बल्कि वास्तविक आर्थिक स्थिति और संपत्ति की भी गहन जाँच होनी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि अपेक्षाकृत संपन्न परिवार इस कोटे का लाभ लेने लगें तो EWS आरक्षण का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।