अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप से भिड़ने से पहले भी इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी कई आलोचकों को करारा जवाब दे चुकी हैं। उन्होंने अपने अंदाज में फ्रांस के राष्ट्रपति मेक्रों को सुना दिया था। यहाँ तक कि अपने देश में कोर्ट के फैसले की आलोचना करने से लेकर पॉर्न साइट को अपना बोरिया बिस्तर समेटने को मजबूर कर दिया था। वह यूरोप के इस्लामीकरण से काफी परेशान दिखीं। उनका पुराना वीडिया 2018 में आया था, जिसमें उन्होंने ब्रिटेन-अलबेनिया के साथ मिलकर काम करने की बात कही है।
राष्ट्रपति ट्रंप और मेलोनी विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और मेलोनी के बीच विवाद के बाद मेलोनी के बेबाक अंदाज की दुनियाभर में चर्चे हो रहे हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि लोकप्रियता गिरने के कारण मेलोनी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए ‘मिन्नतें’ की थीं। ट्रंप ने यह भी कहा था कि उन्होंने मेलोनी के साथ फोटो सिर्फ इसलिए खिंचवाई क्योंकि उन्हें उन पर तरस आ गया था। दरअसल ट्रंप की असली नाराजगी ईरान युद्ध के समय इटली ने अमेरिकी फाइटर्स प्लेन को लैंडिंग की इजाजत नही दी थी।
ट्रंप के बयान पर मेलोनी ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि ट्रंप की दोस्ती से उनकी लोकप्रियता में इजाफा नहीं हुआ है। उनके दावे मनगढ़ंत है, जिसे सुनकर उन्हें हैरानी हुई। मेलोनी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि इटली एक संप्रभु देश है और अमेरिकी एयरबेस का इस्तेमाल उनकी शर्तों पर ही होगा। मेलोनी ने यहाँ तक कह दिया कि मेरी चिंता ना करें, अपना देखें।
मेलोनी ने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप की बातें पूरी तरह झूठी हैं। मैं सचमुच हैरान हूँ। मुझे समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं।”
यह पहली बार नहीं है जब मेलोनी के जवाब पूरी दुनिया में सुर्खियाँ पाई हो। उन्होंने पहले भी कई बार अपनी बेबाकी का परिचय दिया है।
फ्रांस के राष्ट्रपति को दिया जवाब
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के आप्रवासन की नीतियों और यूरोप के फैसलों को लेकर मेलोनी की फ्रांस के नेतृत्व के साथ कई बार तीखी नोक-झोंक हो चुकी है। फ्रांस के ल्योन शहर में दक्षिणपंथी कार्यकर्ता क्विंटिन डेरांक की वामपंथी चरमपंथियों ने हत्या कर दी थी। इसको लेकर जॉर्जिया मेलोनी ने फ्रांस को सुनाया था और यूरोप के लिए एक गहरा घाव बताया था। इस पर भड़के फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने मेलोनी पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रवादियों को अपने देश तक सीमित रहना चाहिए और दूसरों के मामलों में टांग नहीं अड़ाना चाहिए। मेलोनी ने भी तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि वह यूरोप में वैचारिक हिंसा के खिलाफ बोलने से पीछे नहीं हटेंगी, चाहे सामने फ्रांस जैसी बड़ी ताकत ही क्यों न हो।
यूरोप के इस्लामीकरण से चिंतित मेलोनी
जॉर्जिया मेलोनी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने यूरोप में हो रहे इस्लामीकरण और सऊदी अरब की मदद से चल रहे कई सांस्कृतिक केंद्रों पर खुलकर चिंता जताई थी। साथ ही साफ किया था कि इस्लामी संस्कृति की कुछ व्याख्या और यूरोपीय सभ्यता के मूल्यों और अधिकारों के बीच सामंजस्य बैठना काफी मुश्किल है। इस पर मेलोनी को पाकिस्तान में काफी ट्रोल किया गया था। हालाँकि ये बयान 2018 है, जब वह इटली की प्रधानमंत्री नहीं थीं। उस वक्त उन्होंने साफ कहा था कि अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के लिए वह ब्रिटेन और अल्बानिया जैसे देशों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
फिलिस्तीन को नहीं दिया अलग देश का दर्जा
मेलोनी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ब्रिटेन और फ्रांस के रुख का समर्थन करते हुए फिलिस्तीन को तुरंत मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया। इटली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस अल्टीमेटम का भी समर्थन किया, जिसमें हमास को पूरी तरह हथियार छोड़ने और इजरायली बंधकों को तुरंत रिहा करने को कहा गया था। हालाँकि उनके इस रुख का इटली में ही विरोध हुआ। इजरायल पर प्रतिबंध लगाने की माँग को लेकर 20 लाख से अधिक लोगों और ट्रेड यूनियनों ने देशव्यापी हड़ताल किया, लेकिन वह टस से मस नहीं हुई।
पोर्न वेबसाइट पर कसी लगाम
फिका नाम की एक पोर्न वेबसाइट ने मेलोनी, उनकी बहन आरियाना और विपक्षी महिला नेता एली श्लेन की तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उसे आपत्तिजनक बनाते हुए अपने साइट पर अपलोड कर दिया। इस पर एक्शन लेते हुए मेलोनी ने कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसको देखते हुए वेबसाइट ही बंद कर दी गई।
अदालत से भी भिड़ चुकी हैं मेलोनी
हमास के इजरायल पर हमले और निर्दोष लोगों को बंधक बनाने को मिस्र के निवासी इमाम मोहम्मद शाहिन को इटली की अदालत ने रिहा कर दिया तो मेलोनी कोर्ट पर बरस गईं। दरअसल इटली सरकार ने उसे देश से निकालने का आदेश दिया था, जिसे कोर्ट ने पलट दिया। इस पर मेलोनी ने सीधे कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर कोर्ट आतंकवाद का समर्थन करने वालों को ऐसे ही छोड़ देगी तो वह इटली के नागरिकों की सुरक्षा कैसे करेंगी?

