UP में आयुष्मान कार्ड से जुड़ी सभी समस्याओं का हल अब आपके ही जिले में, योगी सरकार ने सेवाएँ पहुँचाई जनता के द्वार: मंजूरी-समाधान के लिए नहीं काटना पड़ेगा लखनऊ का चक्कर

उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत सेवाओं को अधिक सुलभ, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। अब आयुष्मान कार्ड से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए लाभार्थियों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SACHIS) के लखनऊ मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

उनकी समस्याओं का निपटारा जिला स्तर पर ही किया जाएगा। इससे लाभार्थियों को समय और पैसे दोनों की बचत होगी और योजनाओं का लाभ तेजी से मिलेगा। पहले इन मामलों के लिए लखनऊ स्थित मुख्यालय के हस्तक्षेप की जरूरत पड़ती थी।

जिला अधिकारियों को मिले विशेष तकनीकी अधिकार

SACHIS की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि आयुष्मान भारत योजना की सफलता तभी मानी जाएगी, जब पात्र लाभार्थियों को बिना किसी देरी और परेशानी के सेवाएँ मिलें। इसी दिशा में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल और सरल बनाया गया है।

इसके तहत प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO), आयुष्मान नोडल अधिकारियों और जिला कार्यान्वयन इकाइयों को विशेष तकनीकी आईडी उपलब्ध कराई गई हैं। इन ID के जरिए अब जिला स्तर के अधिकारी आयुष्मान कार्ड को मंजूरी देने, गलत आवेदनों को निरस्त करने और जरूरत पड़ने पर कार्ड निष्क्रिय करने जैसे फैसले स्वयं ले सकेंगे।

क्लेम निपटान में यूपी राष्ट्रीय औसत से आगे

राज्य सरकार योजना के तहत क्लेम निपटान और भुगतान प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी और तेज बनाने पर काम कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, कोशिश की जा रही है कि मरीजों को बेहतर इलाज मिले और लाभार्थियों को सेवा देने वाले अस्पतालों को समय पर भुगतान किया जाए।

वर्तमान में योजना के तहत लंबित देनदारियाँ काफी कम हो चुकी हैं और करीब 500 करोड़ रुपए का भुगतान अभी भी लंबित है। SACHIS के अनुसार, उत्तर प्रदेश में क्लेम निपटान और भुगतान का औसत समय करीब 57 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 73 दिन का है। अधिकारियों का मानना है कि यह सुधार प्रशासनिक बदलाव और तकनीकी सुधारों का परिणाम है।

अस्पतालों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण शुरू

एजेंसी ने पाया कि कई क्लेम केवल इसलिए खारिज हो जाते हैं क्योंकि अस्पताल जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं जमा करते या तय प्रक्रिया का सही पालन नहीं करते। इस समस्या को दूर करने के लिए SACHIS ने अस्पतालों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं।

इन प्रशिक्षण सत्रों में क्लेम दाखिल करने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और मानक उपचार दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे अस्पताल पहली बार में ही सही क्लेम दाखिल कर सकेंगे, जिससे रिजेक्शन कम होगा और भुगतान प्रक्रिया तेज होगी।

गड़बड़ी पर कार्रवाई तेज, 200 अस्पताल हटे और 300 की जाँच जारी

सेवा गुणवत्ता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने पैनल में शामिल अस्पतालों की निगरानी भी सख्त कर दी है। अर्चना वर्मा ने बताया कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में गुणवत्ता संबंधी शिकायतों और अनियमितताओं के कारण करीब 200 अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना से बाहर कर दिया गया है।

इसके अलावा लगभग 300 अस्पताल ऐसे चिन्हित किए गए हैं जहाँ अपकोडिंग और संदिग्ध क्लेम के जरिए अनुचित भुगतान लेने की आशंका जताई गई है। इन अस्पतालों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और विस्तृत फील्ड ऑडिट किया जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जहाँ भी गड़बड़ी साबित होगी वहाँ सख्त कार्रवाई की जाएगी।