सिर्फ धर्मांतरित ईसाइयों को मिल रहा लाभ, हिंदू परिवारों को रखा जा रहा वंचित: गुजरात में ST महिलाओं ने कलेक्टर से की शिकायत, PM आवास योजना में भेदभाव के आरोप

गुजरात के तापी जिले के सोंगढ़ तालुका में प्रधानमंत्री आवास योजना के लागू होने में पक्षपात और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बीच स्थानीय महिलाएँ न्याय की माँग कर रही हैं। तालुका के चीमेर, मेढ़ा, धनमोली और खांजर गाँव के जरूरतमंद परिवार लंबे समय से सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होने के कारण ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

अपनी इस समस्या का स्थायी समाधान माँगने के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्र की महिलाएँ एकजुट होकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुँचीं और शिकायत की कि इलाके में केवल धर्मांतरण कर चुके ईसाइयों को ही पीएम आवास जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, जबकि मूल हिंदू जनजातीयों को इससे वंचित रखा जा रहा है।

महिलाओं ने लगाए मनमानी के आरोप

इन महिलाओं ने 22 जून 2026 को आयोजित ‘जिला स्वागत कार्यक्रम’ के दौरान कलेक्टर के सामने सीधे अपनी बात रखी और अपनी परेशानी बताई। विरोध कर रही महिलाओं और ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि स्थानीय तलाटी और सरपंच सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में मनमानी कर रहे हैं।

कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थानीय प्रशासन उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है, जिसके कारण वास्तव में गरीब परिवारों तक आवास योजना का लाभ नहीं पहुँच पा रहा है। विरोध कर रहे जनजातीय परिवारों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर केवल धर्मांतरित ईसाई परिवारों को योजनाओं का लाभ दिया जाता है, जबकि हिंदू धर्म का पालन करने वाले मूल जनजातीय परिवारों की लगातार अनदेखी की जा रही है।

छिपा कर किया जाता है सर्वे

स्थानीय लोगों के अनुसार, गाँवों में जब भी आवास योजना के लिए सर्वे किया जाता है तो आम लोगों को इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती और जानकारी छिपाकर रखी जाती है। गाँव के प्रभावशाली लोग या नेताओं के करीब रहने वालों को ही बार-बार सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

कुछ परिवारों को दो-दो बार आवास योजना का लाभ मिल चुका है, जबकि जरूरतमंद लोग आज भी बिना घर के जीवन जीने को मजबूर हैं। आरोप यह भी है कि कलेक्टर कार्यालय पहुँचीं पीड़ित महिलाओं को प्रशासन ने आवास योजना को लेकर सिर्फ सामान्य जानकारी देकर ‘स्वागत’ कार्यक्रम पूरा कर दिया, जिससे महिलाओं में असंतोष देखा गया।

महिलाओं ने साफ कहा है कि उन्हें सिर्फ कागजों पर मिलने वाली जानकारी से संतोष नहीं है, बल्कि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान हो और सभी पात्र लाभार्थियों को समान रूप से घर मिले, यही उनकी माँग है।