हाल ही में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट ने एच-1बी वीजा पर अमेरिका गए भारतीयों की बदलती स्थिति को सामने रखा। रिपोर्ट में एक ऐसा मामला भी सामने आया, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए। एक भारतीय मूल के हिंदू व्यक्ति को अपना घर बेचने के लिए उसमें स्थापित भगवान गणेश की मूर्ति तक हटानी पड़ी, क्योंकि खरीदार मूर्ति देखते ही घर खरीदने से पीछे हट रहे थे। यह कोई साधारण कहानी नहीं है, बल्कि उस सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करती है जिसकी चर्चा आज टेक्सास में लगातार हो रही है।
अमेरिका का ईसाई बहुल राज्य टेक्सास लंबे समय तक काउबॉय संस्कृति, तेल उद्योग और पारंपरिक अमेरिकी पहचान का प्रतीक माना जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राज्य की डेमोग्राफी तेजी से बदली है। बड़ी संख्या में नए प्रवासी यहाँ आकर बस रहे हैं, जिनमें मुस्लिम की संख्या लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि टेक्सास में नई मस्जिदों, इस्लामी स्कूलों, इस्लामी कम्युनिटी सेंटरों और बड़े मजहबी प्रोजेक्ट्स का विस्तार भी देखने को मिला है।
टेक्सास की आबादी में 67 प्रतिशत हिस्सा साझा करने वाले ईसाइयों का कहना है कि यह बदलाव टेक्सास की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को छीन रहा है। यही वजह है कि टेक्सास में बढ़ता इस्लामीकरण और उससे जुड़े सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव अब चिंता का विषय बन चुके हैं। स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और मीडिया संस्थान भी मान रहे हैं कि यह डेमोग्राफी परिवर्तन तो है ही साथ ही टेक्सास की संस्कृति के लिए भी एक बड़ा ‘खतरा’ है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर टेक्सास में क्या सही में इस्लाम पैर पसार रहा है और किस तरह बदलती डेमोग्राफी का असर टेक्सास की सामाजिक और सांस्कृतिक तस्वीर पर पड़ रहा है।
भारतीय ने भगवान गणेश की मूर्ति घर से निकाली: ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में क्या खुलासा?
ब्लूमबर्ग की एच-1बी वीजा को लेकर अमेरिका में सख्त नीतियों पर एक रिपोर्ट की गई। इस रिपोर्ट में सामने आया कि भारतीय मूल के निवासी रवि वाविलाल उन हजारों भारतीयों में शामिल हैं जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में टेक्सास के तेजी से बढ़ते शहरों में घर खरीदे थे। रवि बताते हैं कि उनका परिवार 2023 में नॉर्थ कैरोलिना के शार्लेट आकर बसा था। लेकिन कुछ महीनों पहले ही उन्हें स्टेज-4 कैंसर हो गया, जिसकी वजह से उनकी नौकरी चली गई और उन्होंने अपना घर बेचने का फैसला किया। लेकिन घर बेचने में भी इतनी परेशानियाँ झेलनी पड़ेंगी, ये शायद उन्हें नहीं मालूम था।
रिपोर्ट के मुताबिक, खरीदारों को आकर्षित करने के लिए उन्हें अपने घर से भगवान गणेश की प्रतिमा और हिंदू धर्म के अन्य प्रतीकों को हटाना पड़ा। रवि याद करते हुए बताते हैं कि कैसे खरीदार उनके घर आए और पाँच मिनट के भीतर ही चले गए। जब उन्होंने वजह जानने के लिए ब्रोकर से संपर्क किया तो उन्हें पता चला कि खरीदार उनके घर में रखी भगवान गणेश की मूर्ति को देखकर ऐसा कर रहे थे।
An Indian man in Texas was forced to remove a Ganesha idol from his home after a realtor told him that Hindu religious imagery made his home harder to sell amid rising anti-Indian sentiment pic.twitter.com/zNNtnSvox3
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) June 22, 2026
रवि कहते हैं, “वहाँ अभी भी बहुत सारी धार्मिक और निजी चीजें रखी थीं। हमें एहसास हुआ कि हर तरह के लोगों को आकर्षित करने के लिए हमें अपने घर को बहुत ही सामान्य बनाना होगा। हमने सब कुछ पैक कर लिया। हमने पास ही एक पब्लिक स्टोरेज एरिया किराए पर लिया और सारा सामान उस स्टोरेज रूम में रख दिया। हमें उन सभी यादों से खुद को अलग करना पड़ा जो हमने वहाँ बनाई थीं। अब तक, तीन महीनों में, सचमुच कोई ऑफ़र नहीं आया है। हम नुकसान उठाकर भी यह घर बेचने को पूरी तरह तैयार हैं।”
ब्लूमबर्ग की वीडियो में रवि भगवान गणेश की मूर्ति को स्टोर रूम से बाहर निकालते दिख रहे हैं और फिर मूर्ति के सामने दीया जलाते हैं। उनके हाव-भाव से साफ जाहिर था कि कैसे उन्हें जबरदस्ती अपनी धार्मिक पहचान से अलग किया गया।
टेक्सास की बदलती डेमोग्राफी: आखिर कितनी तेजी से बढ़ रही है मुस्लिम आबादी?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में सामने आए अनुभवों को समझने के लिए टेक्सास की बदली डेमोग्राफी को देखना जरूरी है। पिछले दो दशकों में राज्य की मुस्लिम आबादी लगातार बढ़ रही है और अब यह केवल एक छोटे प्रवासी समुदाय तक सीमित नहीं रह गई है। नई मस्जिदों, इस्लामी स्कूलों, इस्लामी कम्युनिटी सेंटरों, इस्लामी सड़कों के नाम और मजहबी परिसरों के विस्तार के साथ ‘इस्लाम’ की मौजूदगी टेक्सास के कई हिस्सों में पहले की तुलना में कहीं अधिक दिखाई देने लगी है।
विश्व जनसंख्या समीक्षा के अनुसार, साल 2020 में टेक्सास में मुस्लिम आबादी 3.13 लाख से अधिक थी, जिससे यह अमेरिका में मुस्लिम आबादी वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हो गया। वहीं बाकी डेमोग्राफी अध्ययनों और सामुदायिक संगठनों के अनुमान इससे भी बड़ी संख्या बताते हैं। कई हालिया अध्ययनों में टेक्सास की मुस्लिम आबादी 4 से 5 लाख के बीच आँकी गई है। खास तौर से नॉर्थ टेक्सास क्षेत्र में इस्लामी संगठनों का दावा है कि केवल डलास-फोर्ट वर्थ क्षेत्र में ही मुस्लिम आबादी कई लाख तक पहुँच चुकी है।
अगर पिछले दो दशकों के आँकड़ों को देखें तो वृद्धि के रुझान और साफ हो जाते हैं। टेक्सास स्टेट हिस्टोरिकल एसोसिएशन के अनुसार, 1990 में टेक्सास में लगभग 1.4 लाख मुस्लिम थे। साल 2000 से 2010 के बीच मुस्लिम आबादी में तेज वृद्धि दर्ज की गई और 2010 तक यह संख्या लगभग 4.2 लाख के आसपास पहुँचने का अनुमान लगाया गया था। उसी दौरान मुस्लिम आबादी का प्रतिशत भी लगभग तीन गुना बढ़ा।
इस वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण प्रवासन को माना जाता रहा है। टेक्सास लंबे समय से इंजीनियरों, डॉक्टरों, आईटी पेशेवरों, छात्रों और उद्यमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका से आने वाले प्रवासियों ने यहाँ बड़े पैमाने पर बसावट की है। प्यू रिसर्च सेंटर बताता है कि अमेरिका में मुस्लिमों की वृद्धि का प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय प्रवासन, युवा आबादी और प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि है।
मस्जिदों से लेकर EPIC सिटी तक: कैसे पाँव पसार रहा ‘इस्लामीकरण’?
टेक्सास में मुस्लिम आबादी की बढ़ती संख्या के साथ ‘इस्लामीकरण’ पर भी चिंता जताई जा रही है। इस पर टेक्सास में बहस तेजी से उभरी है कि क्या राज्य में केवल मुस्लिम समुदाय का विस्तार हो रहा है या फिर एक अलग सामाजिक और मजहबी ढाँचा भी आकार ले रहा है? यही सवाल हाल के महीनों में टेक्सास में कई नेताओं, एक्टिविस्ट और मीडिया रिपोर्ट्स में उठे।
इस बहस का सबसे चर्चा में रहने वाला उदाहरण EPIC सिटी परियोजना है। यह परियोजना डलास (Dallas) शहर के पास ईस्ट प्लानो इस्लामी सेंटर (EPIC) से जुड़े लोगों द्वारा एक बड़े आवासीय और सामुदायिक विकास प्रोजेक्ट के रूप में सामने आई। प्रोजेक्ट को टेक्सास में बढ़ती मुस्लिम आबादी के लिए आवास, शिक्षा और सामुदायिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।
GB News ने भी टेक्सास में ‘इस्लामीकरण’ पर डॉक्यूमेंट्री की है। डॉक्युमेंट्री में एंकर टेक्सास की बदलती पर चिंता व्यक्त करते हुए कहता है कि जिस राज्य को कभी काउबॉय संस्कृति और अमेरिकी पहचान के लिए जाना जाता था, वहाँ अब मस्जिदों और मुस्लिमों की बढ़ती मौजूदगी एक नया दृश्य पेश कर रही है। डॉक्युमेंट्री में इस्लाम के ‘हिंसक’ इतिहास पर भी बात होती है।
जब एंकर टेक्सास की ही एक एक्टिविस्ट से पूछता है कि क्या टेक्सास सचमुच बदल रहा है? इस पर एक्टिविस्ट जवाब देती हैं कि अगर कोई धर्म को सही तरीके से फॉलो कर रहा है तो इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन इस्लाम का इतिहास खंगालें या कुरान पढ़ें तो पता लगता है कि वह सिर्फ ‘कब्जा’ और ‘हत्या’ की दीन देता है। एक्टिविस्ट बताती हैं कि यहाँ रहने वाले मुस्लिम टेक्सास में शरिया लॉ लागू करने की चेतावनी देते हैं।
एक्टिविस्ट मुस्लिम बहुल देश ईरान और नाइजीरिया का उदाहरण भी देती हैं। बातचीत में टेक्सास को अलगा UK बनने देने पर भी चिंता जताई जाती, जहाँ मुस्लिमों के ग्रूमिंग गैंग ने ब्रिटिश लड़कियों को निशाना बनाया। इस मुस्लिम गैंग की हैवानियत बताते हुए हाल ही में ब्रिटिश सांसद रुपर्ट लोव ने इस पर विस्तार से ‘रेप गैंग इन्क्वायरी रिपोर्ट‘ पेश की है, इस रिपोर्ट में 2.5 लाख से ज्यादा ब्रिटिश लड़कियों के रेप की सच्चाई है।
डॉक्युमेंट्री में आगे उन इलाकों को दिखाया गया है जहाँ मुस्लिम आबादी और संस्थानों का विस्तार हुआ है। कैमरा ऐसी सड़कों पर जाता है जहाँ एक्टिविस्ट के मुताबिक पहले अमेरिकी ऐताहिसिक व्यक्तित्वों और फाउंडिंग फादर्स के नाम दिखाई देते थे, लेकिन अब कुछ सड़कों के नाम अरबी या इस्लाम से जुड़े नामों पर रखे गए हैं। डॉक्युमेंट्री में बदले नाम ‘अल-फाजी’ (Al-Fazi) और ‘गजाली’ (Ghazali) सड़कों को दिखाया गया है।
डॉक्युमेंट्री में मुस्लिमों के ‘कब्जे’ का जीता-जागता उदाहरण भी देखा गया, जब शूट करते हुए एंकटर को एक मुस्लिम ने ‘इस्लामोफोबिक’ कहकर भगा दिया। इसके अलावा डॉक्युमेंट्री में टेक्सास में बनी बड़ी-बड़ी मस्जिदों और हलाल रेस्टोरेंट को भी दिखाया गया।
टेक्सास की राजनीति में ‘इस्लामीकरण’ का गूँज रहा मुद्दा
मुस्लिम आबादी की बढ़ती संख्या, नई मस्जिदों और EPIC सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स को लेकर उठ रहे ‘इस्लामीकरण’ के सवाल अब टेक्सास की राजनीति में भी गरमा रहे हैं। जहाँ रिपब्लिकन नेता, एक्टिविस्ट और चुनावी उम्मीदवार लगातार इस पर खुलकर बोल भी चुके हैं।
हाल ही में रिपब्लिकन सांसद चिप रॉय ने दावा किया कि टेक्सास में मुस्लिम आबादी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान 172 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। रॉय ने EPIC सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी समुदाय के नाम पर ऐसी व्यवस्था विकसित न हो जो अमेरिकी कानून और संवैधानिक मूल्यों से अलग दिशा में जाए। इसी दौरान उन्होंने शरिया लॉ को भी खारिज किया और कहा कि टेक्सास में इसकी कोई जगह नहीं है।
इसी तरह टेक्सास में मेयर पद का चुनाव लड़ चुकीं वैलेंटीना गोमेज भी इस मुद्दे को अपनी राजनीतिक पहचान का प्रमुख हिस्सा बना चुकी हैं। गोमेज लगातार यह दावा करती रही हैं कि टेक्सास केवल जनसंख्या परिवर्तन नहीं बल्कि सांस्कृतिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से EPIC सिटी और ‘इस्लामीकरण’ के खिलाफ अभियान चलाया।
Valentina Gomez sets a quran on fire with a flamethrower.
— 𝐍𝐢𝐨𝐡 𝐁𝐞𝐫𝐠 🇮🇷 ✡︎ (@NiohBerg) August 26, 2025
Unlike a certain doomed island, America actually has freedom of expression. And somehow I doubt the islamist mob will dare to confront her in person over this. pic.twitter.com/O5K2FQYVpA
इसी दौरान वह उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में भी आईं जब उन्होंने कैमरे के सामने कुरान जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। वे मानती हैं कि मुस्लिम ‘रेपिस्ट’ होते हैं, जो हमेशा ईसाई देशों में हिंसा फैलाते हैं। गोमेज कहती रही हैं कि उनका उद्देश्य ‘टेक्सास से इस्लाम को खत्म करना है।’ गोमेज बताती हैं कि उनके काम के लिए मुस्लिमों द्वारा उन्हें लगातार धमकियाँ भी दी जाती हैं।
कट्टरपंथे के खिलाफ बोलते हुए और इसी को अपना चुनावी मुद्दा बनाते हुए वैलेंटीना गोमेज को 2024 में मेयर चुनाव और 2026 में 31वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (US House) के प्राइमरी चुनाव हार गईं।
अगर टेक्सास में सचमुच इस्लामीकरण बढ़ रहा है, तो आगे क्या होगा?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में सामने आया वह भारतीय परिवार केवल एक घर बेचने की कहानी नहीं है। जिस व्यक्ति को अपना घर बेचने के लिए भगवान गणेश की मूर्ति हटानी पड़ी, वह घटना चिंता पैदा कर देती है कि टेक्सास में ‘इस्लामीकरण’ हो रहा है। चिंता इसीलिए भी है क्योंकि ब्रिटेन में भी यही हुआ। वहाँ भी डेमोग्राफिक बदलावों पर वर्षों तक खुलकर चर्चा नहीं हुई। बाद में रोदरहैम, रोचडेल और दूसरे शहरों में ग्रूमिंग गैंग कांड सामने आए, जिन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया।
ईरान का उदाहरण भी देना जरूरी है। 20वीं सदी के मध्य का ईरान और आज का ईरान दो बिल्कुल अलग तस्वीरें पेश करते हैं। वहाँ राजनीतिक सत्ता और मजहबी पहचान का गठजोड़ आखिर में पूरे शासन ढाँचे को बदलने तक पहुँच गया। टेक्सास को लेकर चिंता जताने वाले लोग इसी वजह से कहते हैं कि किसी भी बड़े सामाजिक परिवर्तन को केवल जनसंख्या के आँकड़ों तक सीमित करने नहीं देखा जा सकता।
आज टेक्सास में नई मस्जिदें बन रही हैं, मुस्लिम समुदाय का विस्तार हो रहा है, बड़े सामुदायिक प्रोजेक्ट्स सामने आ रहे हैं और इस विषय पर राजनीतिक ध्रुवीकरण भी बढ़ रहा है। यह बदलाव आखिर किस दिशा में जाएगा, इसका जवाब आने वाला समय देगा। लेकिन इतना तय है कि टेक्सास में जो बहस आज शुरू हुई है, वह केवल एक राज्य की बहस नहीं रह गई है। यह दुनिया के कई देशों की तस्वीर सामने लाकर रख देती है।


