मुंबई में मॉनसून दस्तक दे चुका था। हल्की-हल्की फुहारें शहर की रफ्तार को थाम नहीं पा रही थीं। मैं छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के सामने एक चाय की टपरी पर अपनी चाय का इंतज़ार कर रहा था। चचा ने पतीली में दूध चढ़ा रखा था और बड़े इत्मीनान से अदरक व इलायची कूट रहे थे। तभी सामने स्थित मैकडॉनल्ड्स से निकटवर्ती कॉलेज के कुछ छात्र बाहर निकले। उनके बीच चर्चा का विषय था, फीफा विश्व कप। किसी को मेस्सी पसंद थे, कोई पिछली रात क्रिस्टियानो रोनाल्डो के दो गोलों की तारीफ करते नहीं थक रहा था, तो कुछ लोग ब्राजील के अगले मुकाबले को लेकर बेहद उत्साहित दिखाई दे रहे थे। यही तो विश्व कप की खूबसूरती है। यह सिर्फ मैदान पर नहीं खेला जाता, बल्कि दुनिया की गलियों, कैफे और चाय की दुकानों पर भी उतनी ही शिद्दत से जिया जाता है।
आज फीफा विश्व कप में क्रमशः ग्रुप ए, बी और सी के ग्रुप चरण के कुल छह मुकाबले खेले जाने थे। ग्रुप चरण अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में हर दिन कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिल रहे हैं। आज का दिन भी इससे अलग नहीं रहा। मैदान पर उतरी लगभग हर टीम ने अगले दौर की दौड़ में अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
सर्वप्रथम वैंकूवर में स्विट्जरलैंड का सामना कनाडा से था। कनाडाई टीम के पास घरेलू दर्शकों का भरपूर समर्थन था। मुकाबला शुरू होते ही कनाडा ने स्विट्जरलैंड के गोलपोस्ट पर लगातार हमले बोलने शुरू कर दिए। हालांकि, छियालीसवें मिनट में जोहान मनजाम्बी ने रुबेन वर्गास को एक सटीक पास दिया और वर्गास ने शानदार फिनिश के साथ स्विट्जरलैंड को बढ़त दिला दी। यह इस विश्व कप में उनका दूसरा गोल था।
एक बार फिर स्विस समर्थकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, जब ब्रील एम्बोलो के असिस्ट पर जोहान मनजाम्बी ने शानदार गोल दाग दिया। स्कोर 2-0 हो चुका था। टूर्नामेंट में यह मनजाम्बी का तीसरा गोल था और वह लगातार शानदार फॉर्म में दिखाई दे रहे थे।
कनाडा के मुख्य कोच जेसी मार्श ने इसके बाद कुछ अहम बदलाव किए और लियाम मिलर सहित तीन खिलाड़ियों को मैदान में उतारा। इन बदलावों का असर भी तुरंत देखने को मिला। मैच के 76वें मिनट में प्रोमिस डेविड ने गोल दागते हुए स्कोर 2-1 कर दिया। हालांकि, स्विट्जरलैंड ने अंत तक संयम बनाए रखा और कनाडा की वापसी की उम्मीदों पर विराम लगाते हुए मुकाबला 2-1 से अपने नाम कर लिया।
उधर सिएटल में खेले गए इसी ग्रुप के दूसरे मुकाबले में बोस्निया एवं हर्ज़ेगोविना ने सभी को चौंकाते हुए कतर को 3-1 से शिकस्त दी। शानदार टीम गेम और बेहतरीन फिनिशिंग के दम पर बोस्नियाई टीम ने यह जीत दर्ज की। इन दोनों मुकाबलों के बाद ग्रुप बी की तस्वीर लगभग साफ हो गई। स्विट्जरलैंड शीर्ष स्थान पर पहुंच गया, जबकि कनाडा दूसरे स्थान पर रही। बोस्निया और कतर का विश्व कप अभियान यहीं समाप्त हो गया।
इसके बाद अटलांटा में मोरक्को का सामना अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही हैती से था। ग्रुप सी में शीर्ष स्थान की दौड़ में बने रहने के लिए मोरक्को को प्रभावशाली जीत की जरूरत थी। मैच शुरू होते ही मोरक्को ने आक्रामक फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया। साफ दिख रहा था कि उनकी नजरें सिर्फ जीत पर नहीं, बल्कि बेहतर गोल अंतर पर भी थीं।
लेकिन खेल ने शुरुआती दस मिनट में ही अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। एक आत्मघाती गोल की बदौलत हैती ने बढ़त बना ली। हालांकि, अशरफ हाकिमी ने शानदार गोल कर मोरक्को को बराबरी दिला दी। इसके कुछ ही देर बाद हैती ने पलटवार करते हुए दूसरा गोल दाग दिया और स्कोर 2-1 कर दिया।
मोरक्को के लिए इस विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने वाले साईबारी एक बार फिर संकटमोचक बनकर सामने आए। हाकिमी के शानदार पास पर उन्होंने बेहतरीन लेफ्ट-फुटेड शॉट लगाते हुए गेंद को जाल में पहुंचा दिया। पहले हाफ की समाप्ति से ठीक पहले स्कोर 2-2 हो चुका था। हैती ने अब तक बेहद साहसी और रोमांचक फुटबॉल खेली थी।
दूसरे हाफ में मोरक्को ने अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल किया। लगातार हमले करते हुए उन्होंने दो और गोल दागे और मुकाबला 4-2 से अपने नाम कर लिया। हालांकि, हैती द्वारा किए गए दो गोल निश्चित रूप से मोरक्को के लिए चिंता का विषय बने रहे।
अब बारी थी उस मुकाबले की जिसका दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों को बेसब्री से इंतजार था। मियामी में ब्राजील की टीम स्कॉटलैंड के खिलाफ मैदान में उतरी। पिछले मैच में चोटिल हुए राफिन्हा की जगह रायन फ्रांसा को शुरुआती एकादश में मौका दिया गया, जबकि बाकी टीम में कोई बदलाव नहीं किया गया।
ब्राजील ने शुरुआत से ही गेंद पर अपना नियंत्रण कायम रखा और लगातार स्कॉटलैंड के गोलपोस्ट पर हमले बोलती रही। राफिन्हा की जगह खेल रहे रायन फ्रांसा ने भी शानदार तालमेल दिखाया और ब्राजील का आक्रमण पहले से अधिक संतुलित नजर आया।
मुकाबले का सबसे भावुक पल तब आया जब 75वें मिनट में ब्राजील के मुख्य कोच कार्लो एंचेलोटी ने नेमार को मैदान में उतारा। पूरा स्टेडियम कई मिनट तक खड़े होकर अपने चहेते स्टार का स्वागत करता रहा। मेस्सी के बाद यदि किसी खिलाड़ी को दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों ने इतना स्नेह दिया है, तो वह नेमार ही हैं। जब-जब गेंद उनके पैरों तक पहुंचती, पूरा स्टेडियम उनके नाम के नारों से गूंज उठता।
खैर, आक्रामक फुटबॉल खेलते हुए एक बार फिर विनीसियस जूनियर ने दो गोल दागे, जबकि माथियुस कुन्हा ने एक गोल जोड़ते हुए ब्राजील को 3-0 की शानदार जीत दिला दी। इन दोनों मुकाबलों के बाद ग्रुप सी से अगले दौर में पहुंचने वाली टीमें ब्राजील और मोरक्को बन गईं। हैती का सफर यहीं समाप्त हो गया, जबकि स्कॉटलैंड की उम्मीदें अब सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों की सूची पर टिकी रहेंगी।
अब बारी थी ग्रुप ए के दोनों मुकाबलों की। एक ओर भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े छह बजे दक्षिण अफ्रीका की टीम दक्षिण कोरिया से भिड़ने वाली थी, तो दूसरी ओर मैक्सिको सिटी में घरेलू समर्थकों के जबरदस्त उत्साह के बीच मेक्सिको का सामना चेकिया से होना था।
पहले बात करते हैं दक्षिण अफ्रीका बनाम दक्षिण कोरिया के मुकाबले की। इस मैच में एक बार फिर विश्व कप ने एक और बड़ा उलटफेर देखा। शानदार अनुशासन और प्रभावी रणनीति के दम पर दक्षिण अफ्रीका ने एशियाई दिग्गज दक्षिण कोरिया को 1-0 से हरा दिया।
दिलचस्प बात यह रही कि लगभग सत्तर प्रतिशत समय गेंद दक्षिण कोरिया के कब्जे में रही, लेकिन वह अपने कब्जे को प्रभावी आक्रमण में नहीं बदल सकी। इसके विपरीत, अपेक्षाकृत कम पज़ेशन के बावजूद दक्षिण अफ्रीका ने विपक्षी गोलपोस्ट पर चौदह बार निशाना साधा और आखिरकार एक गोल के दम पर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
दक्षिण कोरिया के लिए यह हार निश्चित ही बड़ा झटका थी। सोन ह्युंग-मिन, ली कांग-इन और ओह जैसे आक्रामक खिलाड़ियों तथा किम मिन-जाए जैसे अनुभवी डिफेंडरों से सजी इस टीम से काफी उम्मीदें थीं। पहले कप्तान सोन ह्युंग-मिन को लेकर मीडिया में हुई अनावश्यक विवादों की चर्चा और फिर मैदान पर उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन न कर पाना, इन दोनों ने दक्षिण कोरिया के अभियान को कठिन बना दिया। हालांकि, इस हार के बाद भी सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों की दौड़ में उसकी उम्मीदें पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थीं।
खैर, अब नजरें थीं मैक्सिको और चेकिया के मुकाबले पर। घरेलू दर्शकों के अभूतपूर्व समर्थन के बीच मेक्सिको ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर अपनाए। लगातार हमलों के दम पर उसने चेकिया को 3-0 से हराते हुए ग्रुप ए में शीर्ष स्थान हासिल कर अगले दौर का टिकट पक्का कर लिया।
उधर, दक्षिण अफ्रीका ने सभी पूर्वानुमानों को गलत साबित करते हुए ग्रुप ए में दूसरा स्थान हासिल कर अगले चरण में प्रवेश कर लिया। विश्व कप का यही तो आकर्षण है, कागज़ पर बड़ी दिखने वाली टीमें हमेशा मैदान पर बड़ी साबित नहीं होतीं।
अब नजरें अगले मैच दिवस पर थीं।
भारतीय समयानुसार आज रात डेढ़ बजे ग्रुप ई के दोनों मुकाबले खेले जाएंगे। फिलाडेल्फिया में छोटे से कैरेबियाई देश कुराकाओ की टीम का सामना आइवरी कोस्ट से होगा। वहीं न्यू जर्सी के स्टेडियम में जर्मनी की मजबूत टीम इक्वाडोर के खिलाफ मैदान में उतरेगी। यदि कुराकाओ अपना मुकाबला जीत ले और जर्मनी, इक्वाडोर को हरा दे, तो कुराकाओ के लिए अगले दौर का रास्ता खुल सकता है।
इसके बाद भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े चार बजे ग्रुप एफ के दो मुकाबले होंगे। कंसास सिटी में नीदरलैंड्स का सामना ट्यूनीशिया से होगा। इस मैच में दुनिया की नजरें एक बार फिर नीदरलैंड्स के तेज और धारदार आक्रमण पर होंगी।
उधर डलास में जापान और स्वीडन आमने-सामने होंगे। स्वीडन ने इस विश्व कप में कई मुकाबलों में शानदार फुटबॉल खेली है, लेकिन किस्मत कई मौकों पर उसके साथ नहीं रही। इसके बावजूद उसके पास अब भी अगले दौर में पहुंचने का अवसर मौजूद है। जापान और स्वीडन के बीच यह मुकाबला किसी नॉकआउट मैच से कम नहीं होगा। जो टीम जीतेगी, उसके अभियान की उम्मीदें जीवित रहेंगी।
इसके बाद भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े सात बजे ग्रुप डी के अंतिम दो मुकाबले खेले जाएंगे। अपने शुरुआती दोनों मैच हारकर पहले ही विश्व कप से बाहर हो चुकी तुर्की की टीम लॉस एंजिलिस में अमेरिका के खिलाफ औपचारिक मुकाबला खेलने उतरेगी।
उधर, ठीक उसी समय पेराग्वे का सामना शानदार लय में चल रही ऑस्ट्रेलिया से होगा। यदि पेराग्वे यह मुकाबला जीत लेती है तो वह ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ते हुए अगले दौर में जगह बना सकती है। यही वजह है कि यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए करो या मरो जैसा होगा।
तुर्की का प्रदर्शन इस विश्व कप की सबसे बड़ी निराशाओं में से एक रहा। युवा प्रतिभाओं से सजी इस टीम से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अच्छा फुटबॉल खेलने के बावजूद वह पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं कर सकी। ऐसे में उनका अभियान बिना किसी जीत और बिना किसी गोल के समाप्त होता दिखाई दे रहा है।
विश्व कप के 2026 संस्करण से पहले मुख्य टूर्नामेंट में 32 टीमें हिस्सा लिया करती थीं। इस बार पहली बार 48 टीमें मैदान में उतरी हैं। यही कारण है कि हमें कई नए फुटबॉल राष्ट्रों को इस मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। काबो वर्दे, कुराकाओ और कई अफ्रीकी टीमों ने बड़े देशों के सामने भी निडर होकर फुटबॉल खेली है। स्वीडन और नॉर्वे जैसी टीमों ने भी आक्रामक अंदाज़ से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
हार और जीत खेल का हिस्सा हैं, लेकिन अंतिम सीटी तक संघर्ष करते रहना विश्व कप की असली पहचान है। दुनिया भर में लाखों बच्चे इन मुकाबलों को देख रहे होंगे। शायद आने वाले वर्षों में इन्हीं में से कोई अगला मेस्सी, अगला नेमार या अगला विनीसियस बने।
ग्रुप चरण अब अपने अंतिम मोड़ पर है। कुछ टीमें नॉकआउट में जगह बना चुकी हैं, कुछ की किस्मत अब भी अगले 90 मिनट पर टिकी है और कुछ सपने आखिरी सीटी के साथ टूटने वाले हैं। लेकिन यही तो फीफा विश्व कप की सबसे बड़ी खूबसूरती है, यहां हर मैच एक नई कहानी लिखता है और हर कहानी में किसी नए नायक के जन्म की संभावना होती है।
अब आगे से हर मुकाबले का दबाव कई गुना बढ़ जाएगा। एक छोटी-सी गलती पूरे अभियान का अंत बन सकती है, तो एक शानदार क्षण किसी खिलाड़ी को हमेशा के लिए अमर कर सकता है। विश्व कप अब उस मुकाम पर पहुंच चुका है, जहां केवल फुटबॉल नहीं खेली जाती, बल्कि इतिहास लिखा जाता है। और इतिहास अभी बाकी है।


