भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
Rhino Party से शुरू हुआ और 'कॉकरोच' तक पहुँचा... राजनीति अब मीम्स के भरोसे है? मई 2026 में अचानक उभरी 'कॉकरोच जनता पार्टी' के पीछे छिपे उन 3 सीक्रेट फॉर्मूलों को समझिए जो किसी भी सरकार को घुटनों पर लाने का दावा करते हैं। क्या स्र्द्जा पोपोविच की 'रेजिम चेंज' हैंडबुक भारत में अपनाई जा रही है?
इवान तुर्गनेव का 'फादर्स एंड सन्स' उपन्यास केवल एक रूसी उपन्यास ना होकर पीढ़ियों के बीच चलने वाले शाश्वत संघर्ष का दस्तावेज़ है। बाज़ारोव का विद्रोह, निकोलई का प्रेम और पावेल का प्रतिरोध आज भी भारतीय परिवारों, विचारधाराओं और बदलते समाज में जीवित दिखाई देता है।