पश्चिम बंगाल में अपराधियों और दंगाइयों पर लगाम कसने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी एक बेहद सख्त नया कानून ला रहे हैं। सोमवार (22 जून) को विधानसभा में पेश होने जा रहा यह बिल यूपी के ‘बुलडोजर मॉडल’ से भी ज्यादा घातक माना जा रहा है।
इस नए कानून के तहत सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले दंगाइयों से भारी वसूली की जाएगी। इसके कड़े प्रावधानों को देखकर अभी से विपक्ष और अपराधियों के बीच खलबली मच गई है।
54 साल पुराना ढर्रा होगा खत्म
बंगाल सरकार साल 1972 के पुराने कानून ‘द वेस्ट बंगाल मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर एक्ट’ में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसकी जगह अब विधानसभा में ‘पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026’ पेश किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि पुराना कानून आज के आधुनिक और संगठित अपराधों से निपटने के लिए काफी नहीं था। शुभेंदु अधिकारी सरकार ने साफ कर दिया है कि अब बंगाल में सिंडिकेट का नहीं बल्कि सिर्फ कानून का राज चलेगा।
दंगाइयों का होगा आर्थिक खात्मा
इस नए कानून का सबसे बड़ा डर इसका रिकवरी मैकेनिज्म यानी नुकसान की वसूली का नियम है। अगर किसी दंगे या बवाल में सरकारी या किसी की निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचता है, तो उसकी पूरी भरपाई अपराधी की संपत्ति बेचकर की जाएगी।
कानूनी जानकारों के मुताबिक यह कानून इतना कड़ा है कि नुकसान की भरपाई करते-करते दंगाइयों की आने वाली 7 पीढ़ियाँ तक कंगाल हो जाएँगी। यह अपराधियों को पूरी तरह आर्थिक रूप से खत्म करने वाला कदम है।
UP के मॉडल से भी दो कदम आगे
यह नया बिल उत्तर प्रदेश के योगी मॉडल से भी ज्यादा सख्त बताया जा रहा है। इसमें पुलिस को बिना मुकदमे के हिरासत में लेने और अपराधियों को जिले से बाहर निकालने की असीमित शक्तियाँ दी गई हैं। इतना ही नहीं, दंगाइयों और गुंडों को शरण देने वालों के खिलाफ भी इसमें सख्त नियम हैं। अब किसी भी अपराधी को छिपाने या पनाह देने पर सीधे दो साल की जेल की सजा काटनी होगी।

