अमरनाथ यात्रा के महज 5 दिनों में 90% पिघला प्राकृतिक हिमलिंग, फिर भी श्रद्धालुओं की यात्रा जारी: जानिए बाबा बर्फानी के अंतर्ध्यान होने की वजह

जम्मू-कश्मीर में चल रही पवित्र अमरनाथ यात्रा के दौरान बाबा बर्फानी के प्राकृतिक हिमलिंग के तेजी से पिघलने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। यात्रा शुरू होने के महज पाँच दिनों के भीतर हिमलिंग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पिघल चुका है।

57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं, लेकिन हिमलिंग के असामान्य रूप से जल्दी छोटे हो जाने ने पर्यावरणीय बदलाव, बढ़ती मानवीय गतिविधियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच यात्रा पूरी तरह सामान्य रूप से जारी है और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील की है।

पाँच दिन में 90% पिघला प्राकृतिक हिमलिंग, फिर शुरू हुई पर्यावरण पर बहस

अनंतनाग जिले में समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊँचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाला बाबा बर्फानी का हिमलिंग पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया से तैयार होता है। गुफा की छत से टपकने वाली पानी की बूंदें सर्दियों और वसंत ऋतु में जमकर बर्फ की स्टैलेग्माइट का रूप लेती हैं, जिसे श्रद्धालु भगवान शिव का स्वरूप मानकर पूजते हैं।

इस वर्ष 3 जुलाई को यात्रा शुरू होने के समय हिमलिंग का आकार पाँच फीट से अधिक था, जबकि मई के अंतिम सप्ताह में जारी तस्वीरों में इसकी ऊँचाई करीब सात फीट बताई गई थी। हालाँकि यात्रा शुरू होने के केवल पाँच दिनों के भीतर इसका लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पिघल गया और कुछ रिपोर्टों में इसे लगभग पूरी तरह समाप्त होने की बात भी कही गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हिमलिंग का आकार हर साल मौसम, तापमान और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। यदि आने वाले दिनों में भारी बर्फबारी हो या तापमान फिर से शून्य से नीचे चला जाए तो इसके दोबारा बनने की सीमित संभावना हो सकती है, लेकिन फिलहाल इसकी संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

रिकॉर्ड श्रद्धालु पहुँचे, यात्रा जारी

पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस वर्ष अमरनाथ यात्रा कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच आयोजित की जा रही है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। शुरुआती चार दिनों में ही 86 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए, जबकि पाँचवें दिन यह संख्या एक लाख के पार पहुँचने की उम्मीद जताई गई।

दूसरे दिन ही 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुँचने का रिकॉर्ड बना, जिसे पिछले कई वर्षों में दूसरे दिन का सबसे बड़ा आँकड़ा माना जा रहा है। इस साल यात्रा के लिए करीब चार लाख लोगों ने पंजीकरण कराया है, यानी अभी तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं का दर्शन करना बाकी है। 57 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बताया कि पिछले चार वर्षों की तुलना में इस बार यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। फिलहाल हिमलिंग के पिघलने के बावजूद अमरनाथ यात्रा पहले की तरह जारी है। श्रद्धालु पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और 14 किलोमीटर लंबे और कठिन बालटाल मार्ग से लगातार पवित्र गुफा तक पहुँच रहे हैं।