गुजरात के उत्तर और मध्य जिलों में चाँदीपुरा वायरस की दस्तक से राज्य का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गया है। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने बताया है कि इस वायरस की वजह से अब तक 3 बच्चों की जान जा चुकी है। जिन बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, उनमें से 2 वडोदरा और गोधरा के रहने वाले थे, जबकि एक बच्चा राजस्थान का था।
राजस्थान के इस बच्चे को इलाज के लिए हिम्मतनगर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राहत की बात यह है कि सरकार और डॉक्टरों की टीमें जमीन पर उतरकर स्थिति को संभालने में जुटी हैं। प्रभावित इलाकों में संदिग्ध मरीजों की लगातार जाँच की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएँ नहीं बल्कि थोड़ी सावधानी बरतें।
क्या है यह चाँदीपुरा वायरस
चाँदीपुरा एक बहुत ही तेजी से फैलने वाला संक्रामक वायरस है। यह वायरस मुख्य रूप से ‘रैब्डोवायरस’ परिवार से ताल्लुक रखता है। जब यह वायरस किसी के शरीर में जाता है, तो यह खून के रास्ते सीधे दिमाग पर हमला करता है। दिमाग पर असर होने के कारण यह वहाँ सूजन पैदा कर देता है।
डॉक्टरों की भाषा में इस गंभीर स्थिति को ‘एन्सेफलाइटिस’ या ‘एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम’ कहा जाता है। यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि इसमें लक्षण बहुत तेजी से उभरते हैं। कई बार तो मरीज की हालत महज 24 से 48 घंटे के भीतर ही बहुत ज्यादा गंभीर हो जाती है।
आखिर कैसे फैलता है यह संक्रमण
चाँदीपुरा वायरस मुख्य रूप से ‘सैंड फ्लाई’ यानी रेतीली मक्खी के काटने से इंसानों में फैलता है। यह बहुत ही छोटी और खून चूसने वाली मक्खी होती है। कुछ जाँचों में यह भी सामने आया है कि टिक्स और मच्छरों के जरिए भी यह आगे बढ़ सकता है। राहत की बात यह है कि यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता है।
यानी अगर कोई मरीज खाँसता या छींकता है, तो पास बैठे दूसरे व्यक्ति को इससे कोई खतरा नहीं होता है। चूंकि यह मक्खियों और मच्छरों के काटने से होता है, इसलिए मानसून के मौसम में जब नमी बढ़ती है, तब इसका खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।
सबसे पहले कहाँ मिला था और कैसे पड़ा चाँदीपुरा नाम
यह कोई बिल्कुल नया वायरस नहीं है। भारत में सबसे पहले साल 1965 में इस वायरस की पहचान की गई थी। महाराष्ट्र में एक जगह है जिसका नाम चाँदीपुरा है। सबसे पहली बार इसके मरीज इसी चाँदीपुरा गाँव में मिले थे। इसी वजह से डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने इस जगह के नाम पर ही इस वायरस का नाम ‘चाँदीपुरा वायरस’ रख दिया था। तब से लेकर अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहे हैं। इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर देखने को मिलता है।
इस बीमारी के मुख्य लक्षण क्या हैं
चाँदीपुरा वायरस के लक्षण अचानक और बहुत तेजी से दिखाई देते हैं। इसमें बच्चे को बहुत तेज बुखार आता है, जो 102 डिग्री से भी ऊपर जा सकता है। इसके साथ ही तेज सिर दर्द, लगातार उल्टी होना, बहुत ज्यादा कमजोरी और सुस्ती आना इसके शुरुआती लक्षण हैं।
जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, बच्चे को दौरे पड़ने लगते हैं, शरीर में अकड़न आ जाती है और वह बेहोश भी हो सकता है। कुछ मामलों में बच्चों को सांस लेने में भी दिक्कत होने लगती है। अगर बच्चे में ऐसा कोई भी लक्षण दिखे, तो बिना देर किए उसे डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
क्या है इसका इलाज और बचाव के तरीके
आपको बता दें कि चाँदीपुरा वायरस के लिए अभी तक दुनिया में कोई विशेष टीका या पक्की दवा नहीं बनी है। अस्पताल में डॉक्टर मरीज के लक्षणों को देखकर ही उसका इलाज करते हैं। बुखार कम करने की दवा दी जाती है और दौरे को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाते हैं।
शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए ग्लूकोज चढ़ाया जाता है और जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन भी दी जाती है। इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम अपने आसपास सफाई रखें। बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएँ, सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और घर के आसपास पानी या कचरा जमा न होने दें।


