पहले ‘वंदे मातरम्’ फिर ‘जन-गण-मन’… राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत पर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन जारी, जानिए नए नियम

केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को तय नियमों के अनुसार ही गाया और बजाया जाए।

साथ ही सही शब्दों, सही उच्चारण और निर्धारित क्रम का पालन करना अनिवार्य होगा। गृह मंत्रालय ने दोनों के आधिकारिक शब्द और उच्चारण गाइड भी अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए हैं।

सरकारी कार्यक्रमों में क्या होंगे नए नियम

9 जुलाई को जारी आदेश में गृह मंत्रालय ने बताया कि जिन कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों गाए या बजाए जाएँगे, वहाँ सबसे पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद ‘जन-गण-मन’ होगा। जिन राज्यों में राज्य गीत भी गाया जाता है, वहाँ भी इसी क्रम का पालन करना होगा।

नागरिक सम्मान समारोह, राष्ट्रपति और राज्यपालों के औपचारिक सरकारी कार्यक्रम, राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े समारोह और राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में भी इन नियमों का पालन किया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हमेशा उनके मूल शब्दों और सही उच्चारण के साथ ही प्रस्तुत किए जाएँ।

28 जनवरी के आदेश में क्या कहा गया था

इससे पहले 28 जनवरी को गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत गाने के लिए पहली विस्तृत गाइडलाइन जारी की थी। इसमें कहा गया था कि सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाए जाएँगे, जिनकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी।

राष्ट्रगीत गाए जाने के दौरान सभी लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा रहना होगा। हालाँकि सिनेमाघरों को इन नियमों से बाहर रखा गया है। यानी फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम् बजाना या उस दौरान खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। यदि किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है तो दर्शकों के लिए खड़ा होना जरूरी नहीं होगा।

गलती होने पर क्या हो सकती है कानूनी कार्रवाई

गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल उच्चारण में गलती हो जाना, कोई शब्द भूल जाना या अनजाने में हुई गलती अपने आप में अपराध नहीं मानी जाएगी। लेकिन यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत का अपमान करता है, उसका मजाक उड़ाता है या उसके गायन में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की धारा 3 के तहत राष्ट्रगान का जानबूझकर अपमान करने, उसके गायन में बाधा डालने या सम्मान को ठेस पहुँचाने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

सरकार के हालिया निर्देशों के अनुसार राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को भी समान सम्मान देने पर जोर दिया गया है और उसके जानबूझकर अपमान की स्थिति में भी इसी तरह की कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।

वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व

वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1875 में की थी और बाद में यह उनके उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह देशभक्ति का प्रमुख नारा बना।

संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को जन-गण-मन को राष्ट्रगान और वंदे मातरम् को समान सम्मान देने का निर्णय लिया था। केंद्र सरकार इस वर्ष वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ भी मना रही है और इसी के तहत राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और एकरूपता को सुनिश्चित करने के लिए नए निर्देश जारी किए गए हैं।