अमेरिका 90 मिनट तक ईरान पर बरसाता रहा बम, कई बंदरगाहों पर किए धमाके: तेहरान ने कहा- अब ये हमारे अस्तित्व की लड़ाई, समझौता करना मुश्किल

अमेरिका ने बुधवार (15 जुलाई 2026) को ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी और ड्रोन-मिसाइल केन्द्रों पर दो चरणों में हमले किए। उसने हॉर्मुज के पास ग्रेटर तुनब द्वीप पर भी हमला किया। इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान समझौता करना चाहता है और जल्दी ही युद्ध हार जाएगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा है कि ईरान ने हिरासत में लिए अमेरिकी नागरिकों को छोड़ दिया है। वहीं ईरान ने पड़ोसी देशों के अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करना जारी रखा है। उसने इस युद्ध को ‘अस्तित्व की लड़ाई’ करार दिया है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के मुताबिक, दक्षिण पूर्व में मौजूद बमपुर के एक बैरक पर हमला हुआ है जिसमें 388वीं ब्रिगेड के 7 जवान मारे गए और कई घायल हुए हैं। ईरान इसका बदला लेगा।

ईरानी मीडिया ने ये भी दावा किया कि अमेरिका ने खुर्जेस्तान के एक गेहूँ भंडार केन्द्र को भी निशाना बनाया, हालाँकि अमेरिका ने इससे इनकार किया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, सेना ने देर रात ईरान के ग्रेटर तुनब द्वीप पर एयर डिफेंस सिस्टम और क्रूज मिसाइल के स्टॉक और संचालन केन्द्र पर 90 मिनट तक जबरदस्त हमले किए। फिर कई शहरों पर एयरस्ट्राइक किया। अमेरिका सेना के मुताबिक, उसने बंदर अब्बास में कई केन्द्रों को टारगेट किया। यह ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह है और यहाँ नौसेना के कई अड्डे हैं।

इसके अलावा हॉर्मुज में ईरान को निशाना बनाया। सेना के मुताबिक उसने दो ईरानी जहाजों को रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया, वहीं खार्ग द्वीप जा रहे ईरानी तेल टेंकर को हेलफायर मिसाइल से निष्क्रिय कर दिया।

ईरानी समाचार एजेंसी ने बंदर अब्बास के अलावा चाबहार, अहवाज, सीरिक, कोनारक, रस्क और केशम द्वीप पर भी हमले का भी दावा किया है।

इसके जवाब में ईरानी सेना ने बहरीन, कुवैत, जॉर्डन समेत कई देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया। ईरानी सेना के मुताबिक, उसने कुवैत के अली अल सलेम हवाई अड्डे को निशाना बनाया, क्योंकि वहाँ अमेरिकी रडार सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन मौजूद थे।

अमेरिका का कहना है कि हॉर्मुज को खोलने के मकसद से ईरान के ठिकानों को निशाना बनाया गया है ताकि उसकी सैन्य क्षमता कम हो।

ईरान का कहना है कि अमेरिका के शनिवार (11 जुलाई 2026) से जिस तरह से अमेरिका ने ईरान को टारगेट किया है इसके बाद शांति समझौता रद्द हो गया है और वह अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। ईरान का कहना है कि बातचती फिर से शुरू करना आज के हालात में काफी मुश्किल है। अमेरिकी हमलों ने समझौते को निरर्थक बना दिया है।

ईरान के नेता गालिबफ ने कहा कि ईरान अमेरिका के साथ अपने जरूरी और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। इसलिए समझौते के शर्तों का पालन करने की कोई वजह नहीं रह गई है।