‘सपा को वोट नहीं दिया तो फूँके 35 दलितों के घर, 2 बच्चों को जिंदा जलाया’: OP राजभर ने अखिलेश यादव को रगड़ा, सीतापुर में दलितों पर हुए अत्याचार की दिलाई याद

उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राज में हुए दलितों पर अत्याचार को लेकर अखिलेश यादव के खिलाफ नया राजनीतिक अभियान छेड़ दिया है। ‘सपा का आतंक राज’ सीरीज के पहले भाग में उन्होंने 2012, 2015 और 2016 में हुईं घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया है कि कैसे दलितों पर जुल्म ढाए गए।

राजभर ने सोशल मीडिया पर ‘सपा का आतंकराज – पार्ट 1’ शीर्षक से एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार में दलितों और पिछड़ों पर बड़े पैमाने पर अत्याचार हुए थे। उन्होंने कहा कि अब वह रोज एक जिले की ऐसी घटनाओं को सामने लाकर अखिलेश यादव से जवाब माँगेंगे।

राजभर के मुताबिक, वह हर दिन एक जिले से जुड़ी ऐसी घटनाओं को याद दिलाएँगे, जिन्हें वह सपा सरकार के आतंकराज की मिसाल मानते हैं। बुलंदशहर की घटना के बाद उन्होंने सीतापुर में 2012, 2015 और 2016 में हुई घटनाओं का जिक्र किया है।

‘2012 में जनादेश आते ही सीतापुर में हुआ अत्याचार’

अपने पोस्ट में राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा है कि 6 मार्च 2012 को विधानसभा चुनाव का जनादेश मिलने के साथ ही सपा कार्यकर्ताओं का आतंक शुरू हो गया था। सरकार बनी भी नहीं थी, सिर्फ जीते थे। फिर भी दलितों-पिछड़ों के खिलाफ नंगा नाच शुरू कर दिया।

2016 में 13 दलितों का घर जला दिया, क्योंकि वोट नहीं दिया सपा को-राजभर

राजभर ने आगे लिखा है कि सरकार के औपचारिक गठन से पहले ही 8 मार्च 2016 को सीतापुर जिले के रेवसा क्षेत्र के बिंबिया गाँव में दलितों के 13 घरों में आग लगा दी गई। राजभर के मुताबिक, ऐसा सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि दलितों ने समाजवादी पार्टी को वोट नहीं दिया था।

2015 में लहरपुर की दलित बस्ती के 35 घरों में आग लगाई-राजभर

राजभर ने अपने पोस्ट में 21 दिसंबर 2015 की सीतापुर के लहरपुर थाना क्षेत्र के पट्टी देहलिया गाँव की घटना का जिक्र करते हुए कहते हैं कि उस वक्त दलित बस्ती के 35 घरों को आग के हवाले कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान के चुनाव में सपा समर्थित प्रत्याशी को वोट न देने पर ये आगजनी की गई।

राजभर ने दावा किया कि इस आगजनी में दो मासूम बच्चे जिंदा जल गए, जिससे उनकी मौत हो गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय सपा का प्रधान खुद आग लगाने में शामिल था और पीड़ित परिवारों की गुहार के बावजूद किसी ने उनकी मदद नहीं की। उन्होंने लिखा, “वे गिड़गिड़ाते रहे, बच्चे जिंदा जल गए और बस्ती खाक हो गई।”

ऐसी थी आपकी मुगलिया बर्बरता – राजभर

राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में वोट न देने की कीमत दलितों और अति पिछड़े वर्ग को चुकानी पड़ती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के बाद सपा कार्यकर्ताओं का मनोबल इतना बढ़ जाता था कि वे खुलेआम अत्याचार करते थे, जबकि सरकार और पूरा प्रशासन मूकदर्शक बना रहता था। दरअसल आपका राज मुगलिया बर्बरता की याद दिलाती है। उन्होंने लिखा है कि दलितों को आत्मा काँप उठती थी..जब वोट नहीं देने पर ‘सजा’ के तौर पर सपाई बर्बरता सामने आती थी।

पोस्ट के आखिर में राजभर ने सीधे अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा कि सपा सरकार के उस आतंकराज को याद कर आज भी प्रदेश की जनता सिहर उठती है। उन्होंने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में वह एक-एक जिले की ऐसी घटनाओं को सामने लाकर अखिलेश यादव से उनका हिसाब माँगेंगे।