बिहार की राजधानी पटना में बुधवार (22 जुलाई) को दिल्ली की तर्ज पर जबरदस्त उपद्रव और भारी हंगामा देखने को मिला। वामदल के छात्र संगठन आईसा (AISA) की आड़ में सड़कों पर उतरे उपद्रवियों ने भारी पथराव किया और पुलिस व पत्रकारों को निशाना बनाया। प्रदर्शन के बाद देर रात एक्शन में आई पटना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कोतवाली, गाँधी मैदान और सचिवालय थाने में 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब तक 40 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। देर रात तक पुलिस सभी से पूछताछ कर रही थी। SSP कार्तिकेय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि CCTV फुटेज, वीडियो ग्राफी और सोशल मीडिया वीडियो के जरिए उपद्रवियों की पहचान की जा रही है, जिसके बाद सभी की गिरफ्तारी होगी।
पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी और साजिश की गहरी जाँच
कार्रवाई के दौरान पटना पुलिस की टीमों ने गाँधी मैदान, कदमकुआँ, बहादुरपुर, बोरिंग रोड और बुद्धा कालोनी जैसे इलाकों में सघन छापेमारी की। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने इन इलाकों से प्रदर्शन में शामिल कई संदिग्धों को उठा लिया है।
पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि इस बड़े प्रदर्शन के पीछे किन लोगों का हाथ था और इसकी प्लानिंग कैसे बनाई गई थी। मामले में किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा। इसके अलावा, साइबर सेल के जरिए कुछ यू-ट्यूबरों और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका की भी जाँच की जा रही है।
बैरिकेड उठाकर भागे प्रदर्शनकारी
छात्रों की अनोखी रणनीति के आगे पुलिस-प्रशासन पूरी तरह बेबस नजर आया। पुलिस जब भी प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाती, भीड़ उसे उठाकर अपने साथ ले जाती। बैरिकेड्स हटते ही भीड़ तेजी से आगे बढ़ती गई और लगभग छह घंटे तक पुलिस को छकाती रही।
उपद्रवियों ने डाकबंगला चौराहे से लेकर बेली रोड तक जमकर रोड़ेबाजी की। उन्होंने पटना आईजी की एस्कॉर्ट गाड़ी, सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार की गाड़ी और कई पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की। हमले के दौरान भागलपुर के भाजपा विधायक रोहित पांडे की गाड़ी को पलटने की कोशिश हुई और उनके साथ मारपीट भी की गई। इसके अलावा, भाजपा विधायक विनय बिहारी और पार्टी नेता अजय सिंह की गाड़ियों के शीशे भी फोड़ दिए गए।
जेपी गोलंबर से CM आवास तक हंगामा
प्रदर्शन की शुरुआत गाँधी मैदान के पास जेपी गोलंबर से हुई, जो डाकबंगला चौराहा और बेली रोड होते हुए सीधे मुख्यमंत्री आवास तक पहुँचा गया। भीड़ इतनी उग्र थी कि आंसू गैस और वाटर कैनन के सारे इंतजामात फेल साबित हुए। स्थिति अनियंत्रित होती देख आखिरकार केंद्रीय बलों को सड़क पर उतारना पड़ा।
उपद्रवियों ने गाँधी मैदान थानाध्यक्ष का सिर फोड़ दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा कई अन्य पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए। अंत में डिप्टी सीएम आवास से CM सम्राट चौधरी के आवास की ओर बढ़ते हुए पुलिस ने भारी लाठीचार्ज किया और उपद्रवियों को हिरासत में लेना शुरू किया।
छात्रों की प्रमुख माँगें
प्रदर्शनकारी छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। उनकी अन्य प्रमुख माँगों में पेपर लीक पर रोक, शिक्षा के निजीकरण का विरोध, 7.5 CGPA की अनिवार्यता खत्म करना, फीस वृद्धि वापस लेना, नॉन-नेट फेलोशिप लागू करना और पटना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनाए रखना शामिल था। हालांकि, उपद्रव के कारण ये माँगें दबकर रह गईं।
उधर, राजनीतिक गलियारों में भी इसे लेकर भारी तनाव देखने को मिला। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जब वे दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर कॉन्ग्रेस के प्रदर्शन के विरोध में पैदल मार्च निकाल रहे थे, तब कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने साजिश के तहत लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर पटना का माहौल खराब करने का प्रयास किया।

