69000 शिक्षक जो भर्ती हुए, उनमें से नहीं जाएगी किसी की नौकरी: योगी सरकार ने SC में दाखिल किया हलफनामा, 8270 अभ्यर्थियों की लिस्ट भी सौंपी

उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69 हजार सहायक शिक्षा भर्ती मामले में योगी आदित्यनाथ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अहम हलफनामा दाखिल किया है। सरकार ने अदालत को साफ तौर पर बताया है कि साल 2020 में नियुक्त किए गए 67,867 शिक्षकों की नौकरी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। किसी भी शिक्षक को सेवा से नहीं हटाया जाएगा।

सरकार ने यह भी कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार संशोधित मेरिट सूची तैयार की जाएगी और अगर इस नई सूची में कोई नया अभ्यर्थी नियुक्ति का पात्र पाया जाता है, तो उसे उपलब्ध खाली पदों पर नियुक्त किया जाएगा। यानी सरकार ने ऐसा रास्ता सुझाया है, जिससे पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों की सेवा भी सुरक्षित रहे औऱ नए योग्य अभ्यर्थियों को भी मौका मिल सके।

योगी सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि इस भर्ती में पहले से काम कर रहे शिक्षकों को हटाने की जरूरत नहीं है। सरकार का कहना है कि इन शिक्षकों ने पिछले कई वर्षों से स्कूलों में पढ़ाई कराई है और उनकी सेवाएँ जारी रहेंगी। इसलिए अदालत से भी यही अनुरोध किया गया है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर कोई असर न पड़े। सरकार ने स्पष्ट किया कि 67,867 शिक्षकों की नियुक्ति बरकरार रहेगी और उनकी सेवा में किसी तरह का व्यवधान नहीं आने दिया जाएगा।

सरकार ने यह भी बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार नई मेरिट सूची तैयार की जाएगी। इसके अलावा सरकार ने हलफनामे के साथ 8270 अभ्यर्थियों की संशोधित सूची भी कोर्ट को दी है, ये वो अभ्यर्थी हैं जो अभी नौकरी में नहीं हैं। इसमें 3324 अभ्यर्थी अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। यह भी स्पष्ट किया गया है कि पिछली सूची में 4926 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने कार्यभार नहीं ग्रहण किया था। ऐसे में इन्हें भी संशोधित मेरिट सूची में शामिल किया जाए।

हलफनामे में सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह व्यवस्था केवल 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती तक ही सीमित रहेगी। भविष्य में होने वाली किसी दूसरी शिक्षक भर्ती या अन्य भर्ती प्रक्रिया में इसे आधार या उदाहरण नहीं माना जाएगा। यानी सरकार ने अदालत को बताया है कि यह फैसला केवल इस विशेष मामले के समाधान के लिए है और इसका असर आगे आने वाली भर्तियों पर नहीं पड़ेगा।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का मामला पिछले कई वर्षों से अदालत में चल रहा है। भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण और मेरिट सूची को लेकर विवाद हुआ था। बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मेरिट सूची को संशोधित करने का आदेश दिया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जहाँ सुनवाई जारी है।

इससे पहले 4 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि क्या 6,800 अभ्यर्थियों को समायोजित किया जा सकता है। उस समय सरकार की ओर से कहा गया था कि इस पर सरकार से सलाह लेकर अदालत को जानकारी दी जाएगी और सरकार को इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रक्रिया और नियम तय करना जरूरी है।

अब दाखिल किए गए हलफनामे के बाद यह साफ हो गया है कि राज्य सरकार का रुख पहले से नौकरी कर रहे 67,867 शिक्षकों की सेवा सुरक्षित रखने का है। साथ ही सरकार चाहती है कि अगर संशोधित मेरिट सूची में नए अभ्यर्थी पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जाए। अब इस पूरे मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके आदेश के बाद ही सामने आएगा।