उमर-शरजील की जमानत याचिकाओं पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को दिया नोटिस, 2 हफ्तों में माँगा जवाब: 2020 में हिंदू विरोधी दंगे का है मामला

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों का आरोपित उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बार फिर दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा है। शुक्रवार (31 जुलाई) को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच ने उमर खालिद की नियमित जमानत और अंतरिम जमानत, दोनों याचिकाओं को सह-आरोपित शरजील इमाम की याचिका के साथ टैग कर दिया है। अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई 27 अगस्त 2026 को होगी।

यह पूरा मामला फरवरी 2020 के दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद और शरजील इमाम समेत कई पर सख्त आतंकवाद विरोधी कानून UAPA और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

उमर खालिद सितंबर 2020 से और शरजील इमाम भी साल 2020 की शुरुआत से ही जेल में बंद हैं। इस दौरान दोनों आरोपितों ने निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कई बार जमानत की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिल पाई है। हालिया अपील कड़कड़डूमा ट्रायल कोर्ट के 4 जुलाई 2026 के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें उनकी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया गया था।

कई बार काटे अदालतों के चक्कर

उमर खालिद पिछले लगभग छह साल से सलाखों के पीछे हैं। इस दौरान उसने जमानत पाने के लिए कई कोशिशें की। कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उमर खालिद ने अब तक निचली अदालत (कड़कड़डूमा कोर्ट), दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चक्कर काटे हैं।

उसने अलग-अलग मौकों पर कई बार नियमित और करीब 5 बार अंतरिम जमानत (विभिन्न पारिवारिक और व्यक्तिगत कारणों से) के लिए आवेदन किया है, जिसकी कानूनी यात्रा बेहद उतार-चढ़ाव भरी रही है।

इस कानूनी सिलसिले के पहले दौर में कड़कड़डूमा कोर्ट ने उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज की थी, जिसके बाद वह दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचा। अक्टूबर 2022 में हाई कोर्ट ने भी उसकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप सही प्रतीत होते हैं।

हाई कोर्ट के इस झटके के बाद उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबे समय तक टलता रहा और करीब 14 बार सुनवाई स्थगित हुई। आखिरकार साल 2024 की शुरुआत में उसने परिस्थितियों में बदलाव का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली और दोबारा निचली अदालत जाने का फैसला किया।

निचली अदालत के इस दूसरे दौर में भी उसे राहत नहीं मिली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी 2026 के एक पुराने निर्देश का हवाला देकर 4 जुलाई 2026 को दोबारा उमर की जमानत खारिज कर दी।

ट्रायल कोर्ट का तर्क था कि उस आदेश के मुताबिक नई जमानत तभी माँगी जा सकती है जब सुरक्षित गवाहों के बयान दर्ज हो जाएँ या फिर उस आदेश को आए हुए एक साल का समय बीत चुका हो।

इसी फैसले को चुनौती देते हुए अब उमर खालिद के वकीलों ने तीसरी बार दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की है, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हुई और अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 27 अगस्त की तारीख तय की है।

बिना ट्रायल 6 साल जेल: बचाव पक्ष की दलीलें और UAPA पर सुप्रीम कोर्ट का रुख

शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान उमर खालिद के वकीलों ने अदालत के सामने कई पहलू रखे। बचाव पक्ष की सबसे मुख्य दलील यह है कि आरोपित पिछले लगभग छह साल से जेल में बंद हैं, लेकिन उसके खिलाफ चल रहे मुकदमे में कोई खास प्रगति नहीं हुई है।

वकीलों ने कहा कि स्थिति यह है कि इतने सालों बाद भी अदालत में अभी तक आरोपितों पर चार्ज  तय करने को लेकर चल रही बहस भी पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में बिना किसी सजा या ट्रायल के किसी नागरिक को इतने लंबे समय तक जेल में रखना बुनियादी अधिकारों का हनन है।

इसके साथ ही वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के बदले हुए रुख का भी हवाला दिया। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने खुद अपने 5 जनवरी के सख्त आदेश पर कुछ गंभीर आपत्तियाँ जताई हैं।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने अब इस बड़े कानूनी सवाल को एक ‘बड़ी बेंच’ के पास भेज दिया है कि UAPA जैसे बेहद कड़े कानून के तहत किसी आरोपित को लंबे समय तक जेल में रखने और नागरिक के जमानत के मौलिक अधिकारों के बीच कैसे संतुलन बनाया जाए।

उमर खालिद के वकीलों का तर्क है कि चूँकि सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच इस नीतिगत और संवैधानिक सवाल पर विचार कर रही है और अंतिम फैसला आने में वक्त लग सकता है, इसलिए जब तक वहाँ से कोई आखिरी फैसला नहीं आ जाता, तब तक आरोपितों को जेल में रखने के बजाय अंतरिम राहत जमानत दे दी जानी चाहिए।

फिलहाल अब सभी की निगाहें 27 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ दिल्ली पुलिस इन दलीलों पर अपना लिखित जवाब सौंपेगी।