भारत ने अपनी स्ट्रैटेजिक और रक्षा क्षमताओं को एक बार फिर मजबूत करते हुए 4000 किमी तक की मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परीक्षण स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) की निगरानी में हुआ।
जिसमें मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया। यह सफलता भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस है अग्नि-4
अग्नि-4 दो चरणों वाली सॉलिड फ्यूल से चलने वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता करीब 4000 किलोमीटर है और यह परमाणु तथा पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है। मिसाइल की लंबाई लगभग 20 मीटर, वजन करीब 17 टन और पेलोड क्षमता लगभग 1000 किलोग्राम है।
इस मिसाइल में आधुनिक एवियोनिक्स, डिजिटल कंट्रोल सिस्टम, कंपोजिट रॉकेट मोटर और हाई-परफॉर्मेंस ऑनबोर्ड कंप्यूटर का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा इसमें रिंग लेजर गायरो आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (RINS) और माइक्रो नेविगेशन तकनीक लगी है, जिसकी मदद से यह लंबी दूरी पर भी बेहद सटीक निशाना साध सकती है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार 4000 किलोमीटर की दूरी पर भी इसकी सटीकता 100 मीटर से कम मानी जाती है।
2007 में शुरू हुई परियोजना, कई सफल परीक्षणों के बाद बनी मजबूत मिसाइल
DRDO ने वर्ष 2007 में लंबी दूरी की अग्नि मिसाइल परियोजना पर काम शुरू किया था। बाद में 2011 में इसके उन्नत संस्करण को आधिकारिक रूप से अग्नि-4 नाम दिया गया। इसका विकास हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी ने किया।
India successfully test-fired the Medium Range Ballistic Missile (MRBM) Agni-4 from the Integrated Test Range, Chandipur, Odisha on August 06, 2026. The launch, conducted under the aegis of the Strategic Forces Command, successfully validated all operational and technical…
— Ministry of Defence, Government of India (@SpokespersonMoD) August 6, 2026
अग्नि-4 का पहला परीक्षण वर्ष 2010 में किया गया था। इसके बाद इसमें लगातार तकनीकी सुधार किए गए और 2014 में इसका सफल परीक्षण हुआ, जिसमें मिसाइल लगभग 850 किलोमीटर की ऊँचाई तक पहुँची और करीब 4000 किलोमीटर दूर हिंद महासागर में अपने निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदा।
इसके बाद 2014 में पहला यूजर ट्रायल हुआ, जबकि 2015, 2017, 2018 और उसके बाद भी इसके कई सफल परीक्षण किए जा चुके हैं। ताजा परीक्षण ने एक बार फिर इसकी विश्वसनीयता साबित कर दी है।
री-एंट्री तकनीक और हाई स्पीड बनाती है इसे खास
अग्नि-4 की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी उन्नत री-एंट्री तकनीक शामिल है। वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान मिसाइल को लगभग 3000 से 4000 डिग्री सेल्सियस तक तापमान का सामना करना पड़ता है।
इसके बावजूद इसकी विशेष कार्बन-कंपोजिट हीट शील्ड मिसाइल के अंदर मौजूद संवेदनशील उपकरणों को सुरक्षित रखती है और आंतरिक तापमान लगभग 50 डिग्री सेल्सियस से नीचे बनाए रखती है।
विशेषज्ञों के अनुसार री-एंट्री के दौरान इसकी गति मैक 12 से मैक 20 तक पहुँच सकती है, जिससे इसे रोकना किसी भी आधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए बेहद कठिन माना जाता है। सॉलिड फ्यूल तकनीक के कारण इसे लंबे समय तक तैयार स्थिति में रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर रोड या रेल मोबाइल लॉन्चर से कम समय में दागा जा सकता है।
भारत की सामरिक ताकत को मिलेगी नई मजबूती
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अग्नि-4 का सफल परीक्षण भारत की विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करता है। भारत की परमाणु नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ पर आधारित है, ऐसे में किसी भी संभावित परमाणु हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
करीब 4000 किलोमीटर की मारक क्षमता के कारण यह मिसाइल भारत की सामरिक पहुँच को काफी बढ़ाती है। साथ ही इसकी उच्च सटीकता, आधुनिक नेविगेशन प्रणाली और तेज गति इसे भारतीय सामरिक बलों के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार बनाती है।
ताजा सफल परीक्षण यह भी दिखाता है कि भारत लगातार अपनी स्वदेशी रक्षा तकनीक को आधुनिक बना रहा है और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत कर रहा है।

