यूट्यूबर ध्रुव राठी ने 21 मार्च 2026 को 21 मिनट का एक वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया था, जिसमें उसने दावा किया था कि हिंदू देवी-देवता मांस और शराब का सेवन करते थे। अब राठी के इस वीडियो को भारत में यूट्यूब से हटा दिया गया है। गूगल की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट को मंगलवार (11 अगस्त 2026) को यह जानकारी दी गई।
हालाँकि वीडियो को वैश्विक स्तर पर अब तक नहीं हटाया गया है और विदेशों में इसे देखा जा सकता है। गूगल की ओर से पेश वकील ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को बताया कि केंद्र सरकार की शिकायत अपीलीय समिति (GAC) के आदेश के बाद वीडियो को भारत में विदहेल्ड किया गया है।
हालाँकि वैश्विक स्तर पर वीडियो हटाने का मामला अभी हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने लंबित है। मामला अधिवक्ता अमिता सचदेवा की याचिका से जुड़ा है।
उन्होंने ध्रुव राठी के 21 मार्च 2026 को अपलोड किए गए वीडियो ‘Can Hindus Eat BEEF? | Kerala Story 2 EXPOSED’ पर आपत्ति जताई थी। सचदेवा का आरोप है कि वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक दावे किए गए और इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं।

मंगलवार को सचदेवा ने कोर्ट को बताया कि यूट्यूब ने 30 जुलाई को वीडियो को केवल भारत में ही रोका है। उनके मुताबिक, वीडियो को विदेशों में अब भी देखा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में VPN के जरिए वीडियो तक पहुँचा जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने वीडियो को दुनियाभर में हटाने की माँग की।
इस पर गूगल के वकील ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कंटेंट हटाने का सवाल पहले से ही हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने विचाराधीन है। कोर्ट ने भी कहा कि गूगल ने फिलहाल वह कदम उठा लिया है, जो उसके स्तर पर संभव था। बाकी फैसला डिवीजन बेंच के निर्णय के बाद होगा।
दूसरे चैनलों पर अपलोड वीडियो को भी हटाने की माँग
सुनवाई के दौरान अमिता सचदेवा ने यह भी बताया कि कुछ अन्य यूट्यूबर्स ने ध्रुव राठी का वही वीडियो अपने चैनलों पर अपलोड कर दिया है। उन्होंने कोर्ट से ऐसे वीडियो को भी हटाने के लिए गूगल से संपर्क करने की अनुमति माँगी।
गूगल ने इस माँग का विरोध किया। कंपनी की ओर से कहा गया कि दूसरे चैनलों पर मौजूद वीडियो एक अलग मामला है और उसके लिए अलग कारण-ए-दावा यानी अलग कानूनी कार्रवाई होगी। इसलिए उन वीडियो के लिए अलग याचिका दाखिल करनी होगी।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने इस पर महत्वपूर्ण दलील दी। उन्होंने कहा कि जब किसी वीडियो पर आपत्ति दर्ज हो चुकी है और यह माना जा रहा है कि वह आपत्तिजनक है, तो आदेश का असर व्यापक होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो एक वीडियो के बाद दूसरा चैनल, फिर तीसरा और चौथा चैनल सामने आता रहेगा। इससे मामलों की अंतहीन श्रृंखला शुरू हो जाएगी। कोर्ट ने फिलहाल मामले की सुनवाई सितंबर तक टाल दी है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 3 सितंबर 2026 को होगी।
क्या है पूरा मामला?
ध्रुव राठी ने 21 मार्च 2026 को ‘Can Hindus Eat BEEF? | Kerala Story 2 EXPOSED’ शीर्षक से करीब 21 मिनट का वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया था। वीडियो में राठी ने दावा किया कि रामायण और महाभारत के पात्र अपने वनवास के दौरान हिरण के माँस सहित माँस और शराब का सेवन करते थे।
इस दौरान उसने भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण और पांडवों का नाम लिया। अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने इस वीडियो के खिलाफ 22 मार्च को साइबर क्राइम सेल में शिकायत की थी। इसके बाद 23 मार्च को यूट्यूब के रेजिडेंट ग्रीवेंस ऑफिसर के सामने भी शिकायत दर्ज कराई गई। यूट्यूब ने समीक्षा के बाद 25 मार्च को शिकायत खारिज कर दी थी।
इसके बाद सचदेवा ने 27 मार्च को शिकायत अपीलीय समिति यानी GAC का रुख किया। मामला लंबे समय तक लंबित रहने के बाद सचदेवा ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 3 जुलाई को हाई कोर्ट ने GAC को मामले पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया।
इसके बाद 15 जुलाई को GAC ने यूट्यूब को वीडियो हटाने का आदेश दिया और इसके लिए 24 घंटे की समयसीमा तय की। समिति ने माना कि वीडियो से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएँ आहत हो सकती हैं। सचदेवा ने इसके अलावा ध्रुव राठी के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट में आपराधिक शिकायत भी दाखिल की है।
इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो के जरिए हिंदू धर्मग्रंथों को गलत तरीके से पेश किया गया और सनातन धर्म की मान्यताओं का मजाक बनाया गया। उन्होंने शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 196, 299 और 302 के तहत अपराध का आरोप लगाया है। पुलिस से इस मामले में कार्रवाई रिपोर्ट भी माँगी जा चुकी है।

