गणेश चतुर्थी पर CM योगी की ‘पाती’, लिखा- युवाओं को धार्मिक कार्यक्रमों से जुड़ता देख खुशी होती है: लोगों को ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनी आदत बनाने की अपील

गणेश चतुर्थी का त्योहार आते ही घरों से लेकर बाजारों और पूजा पंडालों तक गणपति बप्पा के जयकारे सुनाई देने लगे हैं। उत्तर प्रदेश में भी इस बार गणेशोत्सव को लेकर लोगों में खास उत्साह है। इसी माहौल के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष ‘पाती’ लिखी है। इसमें उन्होंने भगवान गणेश की पूजा और उनके स्वरूप से जुड़े संदेशों को आज के जीवन से जोड़ते हुए प्रकृति संरक्षण, सामाजिक एकता, कौशल और आत्मनिर्भरता की बात कही है।

मुख्यमंत्री ने अपनी पाती की शुरुआत भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और शुभ-मंगल के आराध्य बताते हुए की। उन्होंने कहा कि यह देखकर खुशी होती है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में, खासकर युवा अपने घरों में गणपति की स्थापना कर श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करते हैं। उनके मुताबिक गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि सामाजिक एकता और राष्ट्र के प्रति अपने संकल्प को मजबूत करने का भी अवसर है।

गणेश जी के स्वरूप में प्रकृति का संदेश

CM योगी आदित्यनाथ ने भगवान गणेश के स्वरूप को प्रकृति और पर्यावरण से जोड़कर देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि गणेश जी का स्वरूप हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने की सीख देता है। उनका गजमुख जंगलों और वन्यजीवन की याद दिलाता है, जबकि मूषक वाहन भूमि की उर्वरता और कृषि से जुड़ा प्रतीक माना गया है।

भगवान गणेश के विशाल उदर में पूरे ब्रह्मांड को समाहित करने का भाव दिखाई देता है और उनके बड़े कान यह संदेश देते हैं कि हमें अपने आसपास की हर आवाज को सुनने और समझने की कोशिश करनी चाहिए। यानी गणपति की आराधना के साथ प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को याद करना भी इस पर्व का हिस्सा बन सकता है।

‘एकदंत’ की परंपरा में भी छिपा संदेश

मुख्यमंत्री ने गणेश चतुर्थी पर पूजा जाने वाले ‘एकदंती पत्र’ और औषधीय पौधों से जुड़ी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और मानव जीवन को कभी अलग-अलग नहीं देखा गया।

उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें लोक कल्याण के साथ पर्यावरण और परंपराओं का भी ध्यान रखा जाए। उनके अनुसार आस्था से एकता, एकता से प्रगति और प्रगति से राष्ट्र निर्माण का रास्ता निकलता है।

गणेशोत्सव के बाद विश्वकर्मा पूजा का भी जिक्र

अपनी पाती में मुख्यमंत्री ने 17 सितंबर को होने वाली भगवान विश्वकर्मा की पूजा का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्वकर्मा को सृजन और कौशल का प्रतीक बताते हुए कहा कि आज का उत्तर प्रदेश भी तकनीक, उद्योग और आधुनिक आधारभूत ढाँचे के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्र और आधुनिक सुविधाओं को उन्होंने बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर का हिस्सा बताया। साथ ही यह भी कहा कि किसी प्रदेश का निर्माण केवल बड़े-बड़े ढाँचों से नहीं होता। इसके पीछे वहाँ के लोगों का हुनर, मेहनत, सोच और उद्यमिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

कारीगरों के हुनर को बाजार से जोड़ने पर जोर

योगी ने अपनी सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के हुनर को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण, उपकरण, वित्त और बाजार उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है।

उन्होंने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, एक जनपद-एक उत्पाद (ODOP), उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान जैसी योजनाओं का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री का कहना है कि स्थानीय हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने पर रोजगार के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

‘वोकल फॉर लोकल’ सिर्फ नारा नहीं, आदत बने

पाती का सबसे अहम संदेश स्थानीय उत्पादों को लेकर है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ को केवल विचार या नारे तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने व्यवहार का हिस्सा बनाएं।

उन्होंने कहा कि जब हम स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों से सामान खरीदते हैं तो उसका सीधा फायदा उन परिवारों तक पहुंचता है, जिनकी रोजी-रोटी उनके हुनर पर निर्भर है। इससे कारीगरों के हाथों को काम, युवाओं को रोजगार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।

मुख्यमंत्री ने गणेश चतुर्थी पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भगवान गणेश की बुद्धि, विवेक और कर्म भावना से प्रेरणा लेने की अपील की। साथ ही भगवान विश्वकर्मा के कौशल और सृजनशीलता को आत्मसात करते हुए आत्मनिर्भर, विकसित और गौरवशाली उत्तर प्रदेश के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।