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पुन्हाना: महंत रामदास पर हमले में की कार्रवाई की माँग तो पुलिस ने उल्टा 200 हिन्दू कार्यकर्ताओं पर ही दर्ज कर दिया FIR

हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि उन सभी लोगों ने महंत रामदास पर हुए हमले और अभद्र व्यवहार करने वालों की गिरफ्तारी की माँग के लिए इकट्ठा हुए थे, जिसके बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट की शिकायत पर उल्टा उन्हीं के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।

पुन्हाना में महंत रामदास पर किए गए जानलेवा हमले और धार्मिक टिप्पणियों पर पुलिस की उदासीनता के विरोध में इकट्ठे लोगों पर पुन्हाना सिटी पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की शिकायत पर देशव्यापी बन्द का उल्लंघन व इकट्ठा होकर उचित दूरी न बनाकर महामारी फैलाने के साथ ही धार्मिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने के खिलाफ 38 नामजद और अन्य 150-200 के खिलाफ FIR दर्ज की है।

हिन्दू संगठनों ने ऑपइंडिया से संपर्क कर बताया कि इसके विरोध में वो अब हाईकोर्ट का रुख करने पर विचार कर रहे हैं।

पुन्हाना में हुआ था महंत रामदास पर जानलेवा हमला


दरअसल, गत 30 अप्रैल को पुन्हाना में महंत रामदास पर कुछ मुस्लिम गुंडों ने धार्मिक टिप्पणियाँ करते हुए उन पर जानलेवा हमला किया था। इस घटना से आक्रोशित हिन्दू संगठनों ने पुलिस से कार्रवाई की माँग की थी लेकिन पुलिस ने उन्हें आपस में बातचीत कर मामला सुलझाने का सुझाव दिया था। हिन्दू संगठन इन सभी बातों से आक्रोशित थे कि पुलिस आरोपितों पर कार्रवाई के बजाए उन्हें बचाने के लिए समझौता करने की सलाह दे रही थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्यूटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने इस शिकायत में बताया कि हरियाणा के मेवात जिले में पुन्हाना कस्बा के लोगों ने 30 अप्रैल को महंत रामदास के खिलाफ मुस्लिम लोगों द्वारा टिप्पणी करने पर मुकदमा दर्ज कराया हुआ था। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि महंत पर हमला करने वालों की जाँच और कार्रवाई के बजाए पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 100 से 150 व्यक्तियों पर ही आपत्ति जताते हुए कहा कि उन लोगों ने लॉकडाउन के दौरान पुन्हाना की नथिया देवी धर्मशाला पर इकट्ठा होकर नारेबाजी की थी।

ड्यूटी मैजिस्ट्रेट का भी आरोप है कि हिन्दू कार्यकर्ताओं ने लॉकडाउन के दौरान इकट्ठा होकर नारेबाजी कर सरकार के आदेशों की अवहेलना की है और इन सभी लोगों ने महंत के साथ धर्मशाला में उचित दूरी न बनाकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करके महामारी फैलाने को बढ़ावा दिया है।

जबकि हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि उन सभी लोगों ने महंत रामदास पर हुए हमले और अभद्र व्यवहार करने वालों की गिरफ्तारी की माँग के लिए इकट्ठा हुए थे, जिसके बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट की शिकायत पर उल्टा उन्हीं के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।

समझौते की माँग करने वाली पुलिस खुद कर चुकी है उल्लंघन

हिन्दू कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुछ दिन पहले ही गाँव में ही हुई एक अन्य घटना में मुस्लिमों का पक्ष लेते हुए पुलिस भारी संख्या में वहाँ समर्थकों के साथ इकट्ठी हुई थी और खुद पुलिस ने सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को तोड़ा था। जबकि ताजा प्रकरण में हिन्दू संगठनों ने सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए ही पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

महंत को धमकाने वाले की गिरफ्तारी

पुलिस का कहना है कि मुक्तिधाम आश्रम के महंत रामदास पर धार्मिक टिप्पणी करने और उन्हें जान से मरने की धमकी देने के आरोप में मुख्य आरोपित धुरूरा को शुक्रवार (मई 01, 2020) को गिरफ्तार कर लिया गया है।

महंत ने बताया था कि उन पर धार्मिक टिप्पणियाँ की गईं और इसका विरोध करने पर झुंड में लोग उन्हें मारने के लिए उनके पीछे दौड़े थे, जहाँ से वो किसी तरह अपनी जान बचाकर निकल पाए थे। आरोपितों ने उन्हें धमकाते हुए कहा था कि हिन्दू साधु गुंडे होते हैं और उन्हें जलाकर मार दिया जाना चाहिए।

घटना के दिन महंत रामदास जमालगढ़ रोड स्थित एक मेडिकल स्टोर से दवाई खरीदने गए थे। वहाँ वीआईपी पान भंडार के सामने एक व्यक्ति सब्जी बेच रहा था। उसने उन्हें देख कर अभद्र टिप्पणी व बदसलूकी की। यही नहीं, कुछ देर में वहाँ और भी लोग लाठी-डंडे के साथ पहुँच गए और उन्हें जान से मारने की धमकी देने लगे।

इसके बाद महंत वहाँ से किसी तरह भाग निकले। यह मामला प्रकाश में आने के बाद पंचायत बैठी, जिसमें सभी लोगों ने कहा कि साधु संतों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएँगे। महाराष्ट्र के पालघर में हुई साधुओं की मॉब लिंचिंग की घटना के बाद हिन्दू साधुओं और भगवा झंडों को निशाना बनाया जा रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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