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मैंने भी नेपोटिज्म झेला, बॉलीवुड की पॉलिटिक्स के कारण फिल्मों से निकाला गया: सैफ अली खान

"मैं अपने करियर में एक-दो बार ऐसी स्थिति में रहा हूॅं, जहॉं मुझे कुछ ऑफर किया गया। मुझसे पेपर भी साइन करा लिए गए और अगले दिन मुझे फोन आया है कि यह हाथ से निकल गया है। मेरा रिएक्शन ऐसा होता था कि आपका मतलब क्या है?"

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर बहस छिड़ी हुई है। अब सैफ अली खान ने दावा किया है कि उन्हें भी नेपोटिज्म झेलना पड़ा। बॉलीवुड पॉलिटिक्स की वजह से उन्हें भी फिल्मों से निकाला गया।

आईएनएएस को दिए साक्षात्कार में सैफ अली खान ने नेपोटिज्म के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। सैफ ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह मेरे लिए भी कभी आसान रहा है। कुछ लोगों को बेशक लग सकता है कि यह मेरे लिए आसान था। लेकिन सच यह है कि मैंने खुद कई तरह की परेशानियों का सामना किया है। मैंने ‘सुरक्षा’ और ‘एक था राजा’ जैसी फिल्मों में थर्ड लीड का किरदार निभाया है। इन फिल्मों के बारे में किसी ने सुना तक नहीं है। इसलिए यह सब कुछ मेरे लिए भी बेहद मुश्किल था।” 

सैफ ने कहा, “इतना कुछ होने के दौरान ऐसा कभी नहीं सोचा कि मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ। मुझे बहुत अच्छे से पता था कि मैं क्या कर रहा हूँ। मैं अपने लिए पैसे कमाने की कोशिश कर रहा था।” इसके बाद सैफ अली खान ने बॉलीवुड की राजनीति पर भी अपने विचार रखे। सैफ ने कहा यहाँ कुछ कहानियाँ ऐसी हैं जो आती हैं और जाती हैं। आमतौर पर ऐसा होता है, “ओह! मुझे नहीं पता था, जो फिल्म आपको ऑफर की गई थी असल में यह आपके लिए थी ही नहीं। फिर हमें समझ आता है कि इसमें कुछ न कुछ पॉलिटिक्स थी।”

फिर हम ऐसा बर्ताव करते हैं “अच्छा! तो यह सब कुछ ऐसे होता है।” इसके बाद सैफ अली खान ने कहा, “इसके पहले मैंने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं भी नेपोटिज्म का पीड़ित रह चुका हूँ। इस बात से मेरा मतलब यह था कि इस तरह की कई चीज़ें होती हैं। बॉलीवुड में भी राजनीति, जोड़-तोड़ और नियंत्रण होता है।”

सैफ ने कहा, “मैं अपने करियर में एक-दो बार ऐसी स्थिति में रहा हूॅं, जहॉं मुझे कुछ ऑफर किया गया। मुझसे पेपर भी साइन करा लिए गए और अगले दिन मुझे फोन आया है कि यह हाथ से निकल गया है। मेरा रिएक्शन ऐसा होता था कि आपका मतलब क्या है? वे कहते थे कि हम इसमें आपकी मदद नहीं कर सकते, क्योंकि यह हमारे हाथ से बाहर है। इसके लिए किसी और ने बात की और उसका हो गया है। हमें माफ करें।” 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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