Homeरिपोर्टमीडियाJNU मामले में चार्जशीट आने से पहले ही जज बन बैठा 'आज तक'

JNU मामले में चार्जशीट आने से पहले ही जज बन बैठा ‘आज तक’

चार्जशीट दाख़िल होने के बाद कोर्ट कल इसका संज्ञान लेगी, फिर मुक़दमे की बात होगी, मुक़दमा चलेगा, सबूत माँगे जाएँगे, गवाहियाँ होंगी, और तब जाकर कहा जा सकेगा कि 'कन्हैया के ख़िलाफ़ सबूत नहीं मिले' या 'सबूत मिले'।

जेएनयू (JNU) कैम्पस दिल्ली में 2016 में देशद्रोह के नारे लगाने के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दिया है। चार्जशीट में माकपा नेता डी राजा की बेटी अपराजिता, JNU के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, और उमर ख़ालिद समेत 10 को आरोपी बनाया गया है। अब इस मामले में कोर्ट कल (जनवरी 15, 2019) विचार करेगी।

चार्जशीट दाख़िल होने से पहले ही कन्हैया कुमार पर फ़ैसला

‘आज तक’ न्यूज चैनल तेज़ तो है लेकिन इस बार कुछ ज़्यादा ही तेज़ी दिखाई गई। JNU मामले में चार्जशीट दाख़िल होने से पहले ही इन्होंने JNUSU के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के ख़िलाफ़ सबूत नहीं होने का दावा करते हुए हेडलाइन लिखा – JNU केस में चार्जशीट आज, कन्हैया के ख़िलाफ़ सबूत नहीं, शहला राशिद और डी राजा की बेटी का नाम

जब चार्जशीट आने से काफ़ी पहले ‘आज तक’ ने चलाई ये ख़बर
ब्रेकिंग न्यूज़ में भी ये ख़बर चली
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हालाँकि, जब FIR की कॉपी रिलीज़ की गई तो ‘आज तक’ ने फिर से तेज़ी दिखाते हुए ख़बर में संशोधन करते हुए हेडलाइन में बदलाव कर दिया और पुरानी हेडलाइन को वेबसाइट से हटा दिया।

आरोपपत्र में आरोप हैं, लेकिन ‘आज तक’ ने हेडलाइन ऐसे चलाई थी जैसे कन्हैया चार्जशीट में निर्दोष हैं
बाद में ‘आज तक’ ने उसी आर्टिकल में कन्हैया पर लगे आरोपों के बारे में लिखा, लेकिन पहले ‘सबूत नहीं’ की बात की

पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने उठाए थे मीडिया पर सवाल

बता दें कि बीते दिनों मीडिया-सोशल मीडिया पर स्वयं ही जज बनने वालों पर काटजू ने तंज कसा था। उन्होंने मीडिया की नैतिकता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा था, “ऐसा लगता है कि हमारे अधिकांश पत्रकार केवल सनसनी पैदा करना चाहते हैं। तथ्यों की परवाह किए बिना मसाला घोंटने में विश्वास रखते हैं। इसीलिए मैं ज्यादातर भारतीय मीडिया को फ़र्ज़ी ख़बर कहता हूँ।”

ख़बरों को सबसे पहले चलाने की मारा-मारी में अक्सर सत्य और तथ्य पहला शिकार बनते हैं। चार्जशीट दाख़िल होने के बाद कोर्ट कल इसका संज्ञान लेगी, फिर मुक़दमे की बात होगी, मुक़दमा चलेगा, सबूत माँगे जाएँगे, गवाहियाँ होंगी, और तब जाकर कहा जा सकेगा कि ‘कन्हैया के ख़िलाफ़ सबूत नहीं मिले’ या ‘सबूत मिले’। लेकिन चार्जशीट फ़ाइल होने से पहले हेडलाइन में क्लीनचिट और भीतर आरोप तथा धाराओं की बात लिखना बताता है ख़बर पढ़वाने के लिए वेब मीडियम भ्रामक हेडलाइन चलाने से बाज़ नहीं आते।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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