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बिहार के एक गेस्ट हाउस में चल रहा था फर्जी थाना, होती थी वसूली: महिला बनी थी दारोगा, ₹500 की दिहाड़ी पर काम कर रहे थे नकली पुलिसवाले

जिस अनुराग गेस्ट हाउस में फर्जी थाना चल रहा था, उसके संचालक बताया कि 5 लोग करीब ढाई साल से यहाँ रह रहे थे। इनलोगों ने खुद को ठेकेदार बता ऑफिस का काम करने के नाम पर गेस्ट हाउस में कमरा ले रखा था।

फर्जी पुलिस अधिकारी से जुड़ी कई खबरें आपने सुनी होंगी। लेकिन बिहार में एक फर्जी थाना का पर्दाफाश हुआ है। यह नकली पुलिस स्टेशन बांका जिले के एक गेस्ट हाउस से चल रहा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार थाने में चौकीदार से लेकर डीएसपी तक की तैनाती थी। दारोगा के किरदार में एक महिला थी। नकली पुलिसवाले 500 रुपए रोज पर काम कर रहे थे।

इस फर्जी थाने के पुलिसकर्मी भोले-भाले लोगों से अवैध उगाही करते थे। साथ ही पुलिस विभाग में नौकरी लगवाने के नाम पर भी लोगों से पैसे ऐंठे जाने की बात सामने आई है। असली पुलिस ने 2 महिलाओं सहित कुल 4 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने बुधवार (17 अगस्त 2022) को इस नकली थाने पर कार्रवाई की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फर्जी थाना बांका के अनुराग गेस्ट हाउस में लगभग 8 महीने से चल रहा था। इस नेटवर्क का सरगना भोला यादव बताया जा रहा है। पुलिस पूछताछ में आरोपित शुरुआत में दावा कर रहे थे कि उन्हें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बहाल किया है।

बांका के SP डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि गश्त के दौरान पुलिस बल को वर्दी पहने एक महिला संदिग्ध दिखी। उसे पूछताछ के लिए रोका गया तो वह भागने लगी। उसके पकड़े जाने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। उन्होंने बताया कि आरोपितों ने ‘स्कॉट पुलिस टीम पटना’ नाम से एक ट्रस्ट बना रखा था। इसके जरिए पुलिस में भर्ती करवाने का फर्जी और जाली काम चल रहा था।

पुलिस के मुताबिक आरोपितों के पास से बिहार पुलिस की बैज लगी 2 वर्दी, 1 चौकीदार की बैज लगी वर्दी और एक कट्टा बरामद किया गया है। गिरफ्तार महिला आरोपितों के नाम अनीता कुमारी और जूली कुमारी हैं। कट्टा अनीता कुमारी के पास से मिला है। जूली कुमारी फर्जी थाने में क्लर्क के तौर पर नियुक्त थी। गिरफ्तार 2 अन्य आरोपितों के नाम रमेश कुमार और आकाश कुमार हैं। मुख्य आरोपित भोला यादव फरार है।

जिस अनुराग गेस्ट हाउस में फर्जी थाना चल रहा था उसके संचालक रोहित कुमार मंडल ने बताया कि 5 लोग करीब ढाई साल से यहाँ रह रहे थे। वे ढाई से तीन हजार के बीच भाड़ा देते थे। अनुराग के मुताबिक उन्होंने इनका पहचान पत्र भी जमा करवाया था। इनलोगों ने खुद को ठेकेदार बता ऑफिस का काम करने के नाम पर गेस्ट हाउस में कमरा ले रखा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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