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अनुपम कुमार सिंह

भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

3000+ Km चले, पर बुद्धि वही बाइस पसेरी: ‘सर्दी से डरते हो’ से लेकर ‘देश पुजारियों का नहीं’, राहुल गाँधी का कहा भारत की...

राहुल गाँधी कभी आटे को लीटर में तो कभी जनसंख्या को रुपए में गिनने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कह दिया कि भारत की आबादी 140 करोड़ 'रुपए' है।

सुनील शेट्टी साहब, एक सेब नहीं, पूरा बागान ही सड़ा हुआ है… मोदी-योगी के सामने रोने से नहीं, खुद को बदलने से होगा काम:...

भारत में किसी अपराध के होने पर इन्हें भारतीय होने में शर्म आती है तो बॉलीवुड के कारनामों पर कभी बॉलीवुड से होने में शर्म क्यों नहीं आती?

‘जगह तो अच्छी है लेकिन नंगी मूर्तियाँ कर रहीं खराब’: जब ‘गाजी’ बाबर ने मुगलिया फ़ौज से कहा – जैन प्रतिमाओं को तोड़ डालो:...

बाबर ने लिखा था, "पूर्णरूपेण नंगी मूर्तियों की प्रदर्शनी लगी हुई है। उनके जननांग भी नहीं ढँके हुए हैं। मैंने उन्हें तबाह करने का आदेश दिया।"

खून, भगवान नरसिंह और जटिल समीकरण… वेदज्ञ गणितज्ञ, जिन्हें स्वयं महालक्ष्मी पढ़ाती थीं गणित: 100 साल में भी बन न पाए जो सवाल, मंदिर...

महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का कहना था कि उनके सारे गणितीय खोज नमक्कल स्थित थेयर नामगिरी महालक्ष्मी की देन हैं। इससे उनकी प्रतिभा और लगन का महत्व कम नहीं होता।

मुरब्बा-पटाखा के बाद ‘चिकनकारी’ भी हुआ मुगलों का, 2500 साल पुराने अजंता-चन्द्रकेतुगढ़ को भूले: राजा हर्ष भी कढ़ाई की इस कला के थे शौकीन

480 ईसापूर्व के अजंता की गुफाओं में 'चिकनकारी' जैसी कलाकृति है। 2500 साल पुरानी चन्द्रकेतुगढ़ की एक मूर्ति में ये है। राजा हर्षवर्धन इसके शौक़ीन थे। मुगलों को श्रेय क्यों?

दिल्ली में आए 50 हजार किसान, अपनी बात कह लौट गए खेत-खलिहान: न कोई टेंट गड़ा-न किसी पर ट्रैक्टर चढ़ा, फिर ‘बक्कल उतार दूँगा’...

'किसान आंदोलन' से रेप-हत्या की खबरें आती थीं, 'किसान गर्जना रैली' में अलग-अलग संस्कृतियों का प्रदर्शन दिखा। आक्रोश तो था, लेकिन दुर्भावना नहीं। टिकैत जैसों को ये फर्क देखना चाहिए। यहाँ टुकड़े-टुकड़े की बातें करने वाले खालिस्तान नहीं थे, 'भारत माता' थीं।

योगी के ‘राम राज्य’ में किसानों को चाहिए ‘आयुष्मान’: कहा- हर तरफ अमन-चैन, गोवंश आधारित प्राकृतिक खेती से भी फायदा

किसानों ने कहा कि जैसे सरकारी कर्मचारियों को 'आयुष्मान कार्ड' मिला हुआ है, ऐसे में सभी लघु एवं सीमांत किसानों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।

दिल्ली में ‘जय बलराम’ करते जुटे 50000 किसान, कहा – राकेश टिकैत हमारा नेता नहीं, उनके आंदोलन को थी राजनीतिक फंडिंग

किसानों ने कहा कि कृषि कानूनों के वो समर्थन में हैं, बस कुछ त्रुटियों को सुधार दिया जाए। साथ ही उन्होंने कहा - राकेश टिकैत हमारा नेता नहीं है।"