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PARAM 8000 से परम रुद्र और अब परम प्रज्ञा: भारत ने कैसे बनाई अपनी सुपरकंप्यूटिंग ताकत, AI के दौर में क्यों अहम है यह यात्रा

'PARAM प्रज्ञा' को सिर्फ एक नया सुपरकंप्यूटर समझना सही नहीं है। इसके पीछे भारत की दशकों लंबी एक खास यात्रा जुड़ी हुई है। इसकी शुरुआत 'PARAM 8000' सुपरकंप्यूटर से हुई थी। आज देश के अलग-अलग रिसर्च संस्थानों में 'PARAM' नाम के कई सुपरकंप्यूटर शानदार काम कर रहे हैं।

आज की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI सबसे जरूरी चीज बन गया है। एआई को चलाने के लिए सिर्फ डेटा या अच्छे सॉफ्टवेयर की जरूरत नहीं होती है। इसके लिए बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग पावर की जरूरत पड़ती है। बड़े-बड़े AI मॉडल तैयार करने हों या मौसम का हाल जानना हो, इन सभी कामों के पीछे हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) की बड़ी भूमिका होती है। नई दवाइयाँ खोजने और अंतरिक्ष से जुड़े जटिल कामों में भी इसकी बहुत जरूरत पड़ती है।

भारत इस क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। शनिवार (8 अगस्त) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह के दौरान ‘PARAM प्रज्ञा’ का उद्घाटन किया है। यह एक AI-पावर्ड हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधा है। इसे IIT दिल्ली के सोनीपत कैंपस में लगाया गया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी क्षमता 250 AI PF/8 PF दर्ज की गई है।

लेकिन ‘PARAM प्रज्ञा’ को सिर्फ एक नया सुपरकंप्यूटर समझना सही नहीं है। इसके पीछे भारत की दशकों लंबी एक खास यात्रा जुड़ी हुई है। इसकी शुरुआत ‘PARAM 8000’ सुपरकंप्यूटर से हुई थी। आज देश के अलग-अलग रिसर्च संस्थानों में ‘PARAM’ नाम के कई सुपरकंप्यूटर शानदार काम कर रहे हैं।

सुपरकंप्यूटर क्या है और भारत को इसकी जरूरत क्यों पड़ी

सामान्य कंप्यूटर हमारे रोजमर्रा के कामों को आसानी से संभाल लेते हैं। लेकिन जब किसी समस्या को हल करने के लिए अरबों-खरबों गणनाओं की जरूरत हो, तो सामान्य कंप्यूटर बहुत समय लेते हैं। ऐसे बड़े और कठिन कामों को बहुत तेजी से पूरा करने के लिए सुपरकंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता है। यह हजारों प्रोसेसिंग यूनिट को एक साथ जोड़कर काम करता है।

भारत की इस स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग यात्रा में ‘C-DAC’ (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग) की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है। सी-डैक का शुरुआती उद्देश्य ऐसा सुपरकंप्यूटर बनाना था जो एक सेकंड में एक अरब गणनाएँ यानी एक गीगाफ्लॉप की क्षमता हासिल कर सके। इसी कोशिश का नतीजा था कि साल 1990 में ‘PARAM 8000’ बनकर तैयार हुआ। यहीं से ‘PARAM’ नाम की पूरी सुपरकंप्यूटर सीरिज की मजबूत नींव पड़ी थी।

इसकी तकनीक पैरेलल कंप्यूटिंग के विचार पर काम करती है। इसका मतलब होता है कि किसी बड़े और भारी काम को एक ही प्रोसेसर पर डालने के बजाय, उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट दिया जाता है। इसके बाद बहुत सारे प्रोसेसर मिलकर उस काम को एक साथ बहुत तेजी से पूरा करते हैं। इसी वजह से ‘PARAM’ को भारत की पैरेलल कंप्यूटिंग यात्रा का मुख्य आधार माना जाता है।

भारत को यह तकनीक बनाने की जरूरत सिर्फ अपनी तकनीकी ताकत दिखाने के लिए नहीं थी। उस समय देश को दूसरे देशों से अत्याधुनिक कंप्यूटिंग सिस्टम और तकनीक हासिल करने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इसलिए वैज्ञानिक शोध और देश को तकनीक के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए खुद की क्षमता विकसित करना बहुत जरूरी हो गया था।

इसी सोच के साथ देश में ‘PARAM 8000’ की शुरुआत हुई थी। इसके बाद भारत ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपनी कंप्यूटिंग क्षमता को गीगाफ्लॉप से आगे बढ़ाकर टेराफ्लॉप और फिर पेटाफ्लॉप के स्तर तक पहुँचा दिया।

PARAM 8000 से PARAM प्रज्ञा तक: कैसे बदलती गई सुपरकंप्यूटिंग?

PARAM को किसी एक मशीन का नाम समझना सही नहीं है। यह भारत में अलग-अलग समय पर विकसित और तैनात किए गए हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम की एक लंबी श्रृंखला है। हर नई पीढ़ी में कंप्यूटिंग पावर, प्रोसेसर आर्किटेक्चर, नेटवर्किंग, स्टोरेज और एप्लिकेशन की क्षमता बढ़ती गई।

PARAM 8000 इस यात्रा का शुरुआती बड़ा पड़ाव था। इसके बाद PARAM 10000 आया, जिसकी पीक परफॉरमेंस 100 गीगाफ्लॉप्स थी। 2002 में PARAM पद्मा ने 1 टेराफ्लॉप की सीमा पार की।

C-DAC के अनुसार PARAM पद्मा दुनिया के टॉप 500 सुपरकंप्यूटरों की सूची में शामिल होने वाला पहला भारतीय सिस्टम था। इसके बाद 2008 में PARAM युवा आया, जिसने नवंबर 2008 की TOP500 सूची में 69वीं रैंक हासिल की।

इसके बाद PARAM युवा-II सहित कई और सिस्टम विकसित हुए और भारत की कम्प्यूटिंग क्षमता लगातार बढ़ती गई। आगे चलकर PARAM सिद्धि, PARAM प्रवेगा, PARAM ब्रह्मा, PARAM शक्ति, PARAM संगनक, PARAM गंगा और PARAM रुद्र जैसे सिस्टम सामने आए।

PARAM Yuva-II के बाद PARAM Siddhi-AI और PARAM Pravega जैसे सिस्टम भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा में अगला चरण बने। PARAM Siddhi-AI ने खास तौर पर AI और मशीन लर्निंग वर्कलोड्स के लिए भारत की कम्प्यूटिंग क्षमता को मजबूत किया, जबकि PARAM Pravega जैसे सिस्टम ने अकादमिक और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग उपलब्ध कराई।

आज उपलब्ध सरकारी आंकड़े इस विकास को और साफ करते हैं। DST के अनुसार NSM के तहत तैनात प्रमुख सिस्टम में PARAM सिद्धि 6.5 PF/210 PF AI, PARAM प्रवेगा 3.3 PF, PARAM रुद्र के कई 3 PF सिस्टम और PARAM ब्रह्म, PARAM युक्ति, PARAM शक्ति, PARAM संगनक तथा PARAM गंगा जैसे सिस्टम शामिल हैं।

यहां PF यानी पेटा फ्लॉप को समझना भी जरूरी है। फ्लॉप का मतलब फ्लोटिंग पॉइंट ऑपरेशन पर सेकंड है, यानी कंप्यूटर एक सेकंड में कितनी गणितीय गणनाएँ कर सकता है। 1 पेटाफ्लॉप का अर्थ लगभग एक क्वाड्रिलियन यानी 10^15 फ्लोटिंग-पॉइंट ऑपरेशन प्रति सेकंड है।

इसलिए जब किसी मशीन की क्षमता 3 पेटाफ्लॉप कही जाती है तो इसका मतलब है कि उसकी गणना क्षमता एक सेकंड में खरबों-खरबों फ्लोटिंग-पॉइंट ऑपरेशन के स्तर की है।

लेकिन AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ सिर्फ सामान्य HPC परफॉर्मेंस पर्याप्त नहीं रह गई। AI वर्कलोड में GPU और AI एक्सेलरेटर की भूमिका बढ़ी और इसी वजह से AI- स्पेसिफिक कंप्यूटिंग कैपेसिटी को अलग तरीके से मापना और डिजाइन करना भी महत्वपूर्ण हो गया। इसी बदलते दौर में PARAM प्रज्ञा जैसी सुविधा सामने आती है।

PARAM प्रज्ञा और PARAM रुद्र में अंतर

‘PARAM प्रज्ञा’ एक आधुनिक सुपरकंप्यूटिंग सुविधा है, जिसे खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए तैयार किया गया है। इसे IIT दिल्ली के सोनीपत कैंपस में स्थापित किया गया है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार इसकी क्षमता 250 AI PF/8 PF बताई गई है। यहाँ 250 एआई पेटाफ्लॉप्स का आँकड़ा देखकर इसे सामान्य क्षमता न समझें, क्योंकि AI के कार्यों में गणना का तरीका अलग होता है। आज के दौर में बड़े एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने और मुश्किल रिसर्च कार्यों के लिए ऐसी ही भारी-भरकम कंप्यूटिंग शक्ति की जरूरत होती है।

भले ही ‘PARAM प्रज्ञा’ और ‘PARAM रुद्र’ दोनों भारत के नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन का हिस्सा हैं, लेकिन दोनों अलग मशीनें हैं। ‘PARAM रुद्र‘ भारत की स्वदेशी हार्डवेयर क्षमता का एक बड़ा उदाहरण है। इसके सर्वर को पूरी तरह देश में ही डिजाइन और निर्मित किया गया है। इसके साथ ही इसमें सी-डैक का स्वदेशी सॉफ्टवेयर और त्रिनेत्र तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले ही ऐसे तीन सिस्टम देश को समर्पित किए थे।

दूसरी तरफ ‘PARAM प्रज्ञा’ मुख्य रूप से एआई और आधुनिक कंप्यूटिंग की जरूरतों को पूरा करती है। आसान शब्दों में समझें तो ‘PARAM रुद्र’ भारत के स्वदेशी हार्डवेयर और निर्माण कौशल को दर्शाता है, जबकि ‘PARAM प्रज्ञा’ एआई आधारित आधुनिक शोध और तकनीक की नई माँगों को पूरा करने का काम करती है।

नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन ने भारत की पूरी तस्वीर कैसे बदली?

भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा में सबसे बड़ा बदलाव नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन यानी NSM के साथ आया। 25 मार्च 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशनको मंजूरी दी थी।

इसके लिए सात साल में 4500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। मिशन का उद्देश्य देश के एकेडमिक और रिसर्च इन्स्टिच्यूशन को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधाओं से जोड़ना और भारत को वर्ल्ड क्लास कम्प्यूटिंग पावर वाले देशों की श्रेणी में ले जाना था।

इस मिशन को DST और तत्कालीन डिपार्ट्मन्ट ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एण्ड इनफार्मेशन टेक्नॉलजी, यानी बाद में MeitY, ने मिलकर आगे बढ़ाया। इसका इम्प्लिमेंटेशन C-DAC, पुणे और IISc, बेंगलुरु के जरिए किया गया। शुरुआत में 70 से ज्यादा HPC  फैसिलिटीज का नेटवर्क बनाने की योजना थी, जिन्हें नेशनल नॉलेज नेटवर्क के जरिए जोड़ा जाना था।

मोदी सरकार के दौर में इसका एक महत्वपूर्ण बदलाव यह रहा कि लक्ष्य केवल विदेशी सिस्टम खरीदकर उन्हें देश में लगाने तक सीमित नहीं रहा। सरकार ने डिजाइन, असेंबली, मैन्युफैक्चरिंग, सॉफ्टवेयर स्टैक और महत्वपूर्ण घटक को देश में विकसित करने पर भी जोर दिया।

इसका उदाहरण 2019 में IIT-BHU में स्थापित PARAM शिवाय है। यह देश का पहला इंडिजिनस असेंबलड सुपर कंप्यूटर था और इसकी अधिकतम कंप्यूटिंग क्षमता 837 टेराफ्लॉप्स थी। बाद में PARAM शक्ति, PARAM ब्रह्म और अन्य सिस्टम भी अलग-अलग संस्थानों में लगाए गए।

अगले चरण में रुद्र  सर्वर, स्वदेशी सॉफ्टवेयर स्टैक और HPC इंटरकनेक्ट जैसे कॉम्पोनेंट्स पर काम आगे बढ़ा। DST के मुताबिक नवंबर 2025 तक NSM के तहत 37 सुपरकंप्यूटर और लगभग 39 पेटाफ्लॉप्स की क्यूम्यलेटिव क्षमता तैयार की जा चुकी थी। इनका इस्तेमाल 260 से ज्यादा संस्थानों के 14000 से ज्यादा  यूजर कर रहे थे और 27500 लोगों को HPC में ट्रैनिंग दी गई थी।

सरकार के अगस्त 2025 के आंकड़ों के अनुसार इन सिस्टमों ने 10000 से ज्यादा रिसर्चर्स को सपोर्ट  किया था, जिनमें 1700 से अधिक PhD स्टूडेंट्स शामिल थे। इनका इस्तेमाल दवा की खोज, आपदा प्रबंधन, जलवायु मॉडलिंग, खगोल विज्ञान, कम्प्यूटेशनल केमिस्ट्री, फ्लूइड डाइनैमिक्स और मटेरियल्स रिसर्च जैसे क्षेत्रों में किया गया।

इस तरह NSM का महत्व सिर्फ मशीनों की संख्या में नहीं है। इसका बड़ा उद्देश्य भारत में सुपरकंप्यूटिंग का पूरा इकोसिस्टमतैयार करना है मशीन, सॉफ्टवेयर, स्किल्ड मैनपावर, रिसर्च यूजर और स्वदेशी टेक्नोलॉजी सभी को साथ लेकर।

भारत के लिए PARAM प्रज्ञा और पूरी PARAM यात्रा का असली मतलब क्या है?

सुपरकंप्यूटर का फायदा केवल वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं होता। मौसम की बेहतर भविष्यवाणी से लेकर चक्रवात और बाढ़ के मॉडल, नई दवाओं की खोज, एयरोस्पेस डिजाइन, क्लाइमेट रिसर्च, मैटेरियल साइंस, एग्रीकल्चर मॉडलिंग और AI तक, इनका इस्तेमाल कई क्षेत्रों में हो सकता है।

उदाहरण के लिए किसी नए मॉलिक्यूल को दवा के रूप में इस्तेमाल करने से पहले उसके व्यवहार को कम्प्यूटेशनल सिम्युलेशन के जरिए समझने में HPC मदद कर सकता है। इसी तरह मौसम मॉडल में बड़ी मात्रा में एटमॉस्फेरिक डेटा को प्रोसेस करके फोर्कैस्ट को बेहतर बनाने की कोशिश की जाती है।

AI के आने के बाद इसकी जरूरत और बढ़ गई है। बड़े AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए हजारों GPU और बहुत ज्यादा कम्प्यूटिंग पावर की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए जिस देश के पास मजबूत HPC इंफ्रास्ट्रक्चर होगा, उसके लिए AI रिसर्च,साइंस कम्प्यूटिंग और एडवांस्ड टेक्नॉलॉजी में अपनी क्षमता बढ़ाना आसान होगा।

भारत ने इस दिशा में केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की कोशिश नहीं की है, बल्कि स्किल्ड मैनपावर तैयार करने पर भी जोर दिया है। NSM के तहत हजारों रिसर्चस्टूडेंट्स को HPC ट्रैनिंग दी गई है।

इससे यह इकोसिस्टम केवल कुछ सरकारी प्रयोगशालाओं  तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विश्वविद्यालय, IIT, अनुसंधान संस्थान, स्टार्टअप और अन्य शोधकर्ता तक पहुँचता है।

अब अगर भारत की स्थिति को दुनिया के संदर्भ में देखें तो तस्वीर अभी भी चुनौतीपूर्ण है। नवंबर 2025 की TOP500 सूची में दुनिया के सबसे तेज सुपरकंप्यूटरों में अमेरिका, चीन, जापान और यूरोप की कई मशीनें शीर्ष स्थानों पर थीं। भारत का शक्ति क्लाउड सिस्टम उस सूची में 28वें स्थान पर था, जिसकी Rmax परफॉरमेंस 84.31 पेटाफ्लॉप्स दर्ज की गई थी।

इसका मतलब साफ है भारत ने लंबी दूरी तय की है, लेकिन सबसे शक्तिशाली वैश्विक सुपरकंप्यूटिंग प्रणालियों की दौड़ में अभी आगे जाना बाकी है। यही वजह है कि PARAM प्रज्ञा को केवल एक नए सुपरकंप्यूटर के उद्घाटन के तौर पर देखना अधूरा होगा। यह उस यात्रा का नया पड़ाव है जो PARAM 8000 से शुरू हुई थी।

शुरुआती दौर में भारत का लक्ष्य था कि उसे सुपरकंप्यूटिंग के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े। इसके बाद लक्ष्य बनाया कि देश के वैज्ञानिकों और शैक्षणिक संस्थानों तक यह कंप्यूटिंग शक्ति पहुँचे। अब AI के दौर में चुनौती यह है कि भारत अपनी AI-रेडी HPC क्षमता, स्वदेशी हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, स्किल्ड मैनपावर और रिसर्च इकोसिस्टम को अगले स्तर तक ले जाए।

PARAM 8000 ने भारत को यह भरोसा दिया कि देश अपनी सुपरकंप्यूटिंग मशीन बना सकता है। PARAM युवा और उसके बाद के सिस्टम ने कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाई। नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन ने इस क्षमता को देश के अलग-अलग संस्थानों तक पहुँचाया।

PARAM रुद्र ने स्वदेशी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की दिशा में बड़ा कदम दिखाया। और PARAM प्रज्ञा जैसी AI-फोकस्ड फैसिलिटी यह संकेत देती है कि भारत अब अगली पीढ़ी की कम्प्यूटिंग जरूरतों के हिसाब से अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को ढाल रहा है।

इसलिए PARAM की कहानी सिर्फ सुपरकंप्यूटरों की कहानी नहीं है। यह भारत की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता के सफर की कहानी है। जहाँ एक समय देश को अत्याधुनिक कंप्यूटिंग शक्ति हासिल करने में मुश्किल आती थी, वहीं आज भारत अपने सुपरकंप्यूटर डिजाइन, असेंबल, मैन्युफैक्चर और डिप्लॉय करने की क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।

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विवेकानंद मिश्र
विवेकानंद मिश्र
एक पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर। राजनीति, संस्कृति, समाज से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध।

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