Sunday, September 20, 2020
9 कुल लेख

आशीष शुक्ला

दूल्हा-दुल्हन सब थे राज़ी, लेकिन निकाह से बिदक गए काजी!

मुस्लिम कन्याओं की शादी के लिए शहर के नामी काज़ी वसीम मीनाई को बुलावाया गया था, लेकिन उन्होंने यह कह कर विवाह स्थल पर आने से इनकार कर दिया कि पिछले 3 सामूहिक विवाह कार्यक्रमों की बकाया राशि उन्हें नहीं मिली है।

दौपद्री वस्त्रहरण का पोस्टर लगवाने वाले कॉन्ग्रेसी नेता बताएँगे कि ‘महिला सशक्तिकरण’ क्या है?

कॉन्ग्रेसी नेताओं द्वारा तेलंगाना में चुनाव आयोग पर निशाना साधने के लिए एक पोस्टर लगाया गया है, जिसमें दौपद्री का वस्त्रहरण किया जा रहा था। पोस्टर के माध्यम से तेलंगाना में लोकतंत्र को द्रौपदी और धृतराष्ट्र को चुनाव आयोग के रूप में कॉन्ग्रेस द्वारा प्रदर्शित किया गया था।

₹5 में भर पेट खिलाने वाली कॉन्ग्रेस बोल रही है कि ₹6 हजार से किसानों का क्या होगा!

किसान यह समझता है, भले ₹13 का ऋण माफ़ी देने वाले राहुल न समझें, कि ये पैसे उनकी बीड़ी के लिए नहीं है। वो जानते हैं कि इतने पैसों में बुआई के समय वो खेत में बीज रोप सकते हैं।

बजट 2019: मोदी सरकार का ‘मास्टर स्ट्रोक’, जनता ताली पीट रही है और विपक्षी छाती पीट रहे

विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में पेश बजट को खिसियाने अंदाज में भाजपा का चुनावी घोषणापत्र बता दिया। लेकिन वह भूल गए कि सरकार के इस फ़ैसले से करीब 3 करोड़ लोगों की जिंदगी आसान हो जाएगी।

‘चूल्हा जलई ले नाले से पिया, नाला मा बड़ी आग है’… चाय के बाद अब बन रहा खाना

प्लांट लगाने में करीब साढ़े 3 लाख का ख़र्च आया। हेमंत ने बताया कि यहाँ लगाए गए चूल्हे पर बने खाने को रोज़ाना शाम को 6 से 8 बजे तक ज़रूरतमंद बच्चों को बाँटा जाता है।

‘भारत माता की जय’ की गूंज, देश-विरोधी खालिस्तानी समर्थकों पर पड़ा कंटाप है!

इस पूरे प्रकरण के बाद दावा किया गया कि अमेरिका में भारतीय दूतावास के सामने भारतीय झंडा जलाया गया। लेकिन वहाँ की मीडिया ने इस दावे की मिट्टी पलीद कर दी।

‘महाठगबंधन’ की बारात में ‘तानाशाह’ दीदी से लेकर दोमुँहे साँप केजरी ‘सड़जी’ फन फैलाए बैठे हैं

ये पार्टियाँ एक तरफ संसद में जीएसटी, आर्थिक आधार पर आरक्षण देने वाले बिल पर पूरा समर्थन देती हैं, वहीं दूसरी ओर संसद के बाहर राष्ट्र हित के इन इन पैमानों की जमकर आलोचना करते हैं

कॉन्ग्रेस के 70 सालों का ‘क्रेडिट’ BJP को! केजरीवाल का मेमरी लॉस!

कोलकाता की 'ममता'मयी महफ़िल। बड़े-बड़े धुरंधर। जमावड़ा था एक गिरोह का, 'चौकीदार' को हटाना ही जिनका परम लक्ष्य। केजरीजी को आया जोश और महफ़िल को लूटने की जल्दी में...

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