दूल्हा-दुल्हन सब थे राज़ी, लेकिन निकाह से बिदक गए काजी!

शादी न करवाने के पीछे काजी साहब का तर्क भी जायज है भाई! शादी-ब्याह अपनी जगह है, लेकिन अगर पैसा ही नहीं मिलेगा तो फिर बेगम के लिए समान और बच्चों के लिए चॉकलेट कहाँ से लेकर आएँगें काजी साहब?

पैसा-पैसा करती है तू पैसे पे क्यों मरती है…

यह गाना तो आपने सुना ही होगा? लेकिन जब असिलयत में इस गाने की तर्ज़ पर कुछ ऐसा देखने को मिल जाए, जिससे प्रशासन के भी हाथ-पाँव फूल जाएँ तो बात गंभीर हो जाती है। उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में एक काजी साहब ने उस वक़्त ‘माहौल’ बना दिया जब, उन्होंने कहा कि पैसा नहीं तो शादी नहीं, मतलब पहले दाम फिर काम। मतलब ‘माहौल’ इस कदर बन गया कि मियाँ-बीबी के राज़ी होने के बाद बिन काजी के शादी अटक गई। और विवाह संपन्न नहीं हो सका।

दरअसल, शाहजहाँपुर में एक सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें मिनिस्टर से लेकर अन्य तमाम दिग्गज पहुँकर सामूहिक विवाह की शोभा बढ़ा रहे थे। यहाँ न सिर्फ़ मुस्लिम कन्याओं का बल्कि हिंदू कन्याओं की शादी का प्रोग्राम भी बना था, जिसमें हिंदू कन्याओं की शादी तो हो गई, लेकिन जब बारी मुस्लिम कन्याओं की आई तो अंत समय पर काजी साहब ने धोखा दे दिया।

पहले दिखाया था ठेंगा, काजी ने लिया बदला

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वैसे नेताओं के बारे में क्या कहा जाए? उनकी पूरी राजनीति ही ठेंगा दिखाने पर टिकी हुई है। खै़र यहाँ हम काजी साहब के बारे में बात कर रहे हैं। दरअसल, मुस्लिम कन्याओं की शादी के लिए शहर के नामी काजी वसीम मीनाई को बुलावाया गया था, लेकिन उन्होंने यह कहकर विवाह स्थल पर आने से इनकार कर दिया कि पिछले 3 सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में निकाह करवाने के बाद भी उन्हें तय की गई रकम ₹500/निकाह नहीं दी गई थी।

शादी न करवाने के पीछे उनका दिया गया तर्क जायज है भाई! शादी-ब्याह अपनी जगह है, लेकिन अगर पैसा ही नहीं मिलेगा तो फिर बेगम के लिए समान और बच्चों के लिए चॉकलेट कहाँ से लेकर आएँगें काजी साहब? शादी के बाद जोड़े तो हनीमून पर रहेंगे और घर में बेगम उनका क्या हस्र करेंगी, इसके बारे में सोचा किसी ने? खै़र काजी साहब की मानें तो उन्हें प्रशासन ने मान मुनौवल करके तीन बार धोखा दिया है।

काजी शाहब ने दर्द बयाँ करते हुए तर्क दिया कि पिछले 3 सामूहिक विवाहों का लगभग ₹20,000 उधार है। काजी साहब की मानें तो प्रशासन के अधिकारी न सिर्फ़ उनसे मुफ़्त में निकाह पढ़वाते हैं, बल्कि फोन पर पैसे माँगने पर धमकी भी देते हैं।

मतलब भाई भलाई का जमाना ही नहीं रहा! जहाँ लोग मेहनत-मजदूरी करके एक दिन में ₹300-₹500 कमाते हैं, वहीं काजी साहब से 3 बार समारोह में निकाह भी पढ़वा लिया और उनका ₹20,000 भी लेके बैठ गए। फिलहाल काजी साहब की मानें तो नेकी करने पर बदी मिलने वाली कहावत उन पर लागू हो रही है।

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