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आशीष नौटियाल

पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

राम मंदिर के लिए ईंट-बजरी तोड़ने भेजे गए हैं कश्मीर से 72 से 2 कम खूँखार आतंकी: विशेष सूत्र

ऑपइंडिया तीखी-मिर्ची सेल की ख़ुफ़िया रिपोर्ट्स की मानें तो इन आतंकियों को उत्तर प्रदेश पुलिस की निगरानी में मात्र 'ठाँय-ठाँय' के ही स्वर से जन्नत-ए-फ़िरदौस की पहली यात्रा ट्रायल के तौर पर करवाई जाएगी।

पहले नान-टिमाटर के भाव ठीक कर लो, जिहाद तो हमें पता है कयामत तक करोगे

पाकिस्तान आर्मी प्रवक्ता ने कल शाम एक ट्वीट किया है, जिसमें वो कश्मीर को किसी भी तरीके से वापस लेने की बात करते हुए नजर आ रहे हैं। हालाँकि, गफूर द्वारा अभी यह स्पष्टीकरण देना बाकी है कि उन्होंने ये ट्वीट भाँग के नशे में किया था या घोड़े की लीद फूँक कर....

वो दिग्विजय सिंह है, वो कुछ भी कह सकता है

कॉन्ग्रेस को भय है कि समर्थन करने में मुस्लिम वोट बैंक से हाथ धोना पड़ सकता है और विरोध करने में हाल ही में अपनाया गया ताजातरीन हिंदुत्व खतरे में पड़ सकता है इसलिए बेहतर है कि इस सब चर्चा से ऊपर उठकर नेहरू जी के नाम का कलमा पढ़ा जाए।

आज ही के दिन की थी आइंस्टीन ने एक पत्र लिखकर ऐसी गलती, जिसका उन्हें मौत तक अफ़सोस रहा

रूजवेल्ट को लिखे गए इस पत्र के 6 साल बाद 6 और 9 अगस्त, 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया था। इतिहास और आइंस्टीन दोनों को यह अफ़सोस हमेशा रहा कि इस महान त्रासदी की नींव पर कुछ Best Brains के भी हस्ताक्षर थे।

डेरेक ‘नो ब्रेन’: न तो विधेयक पिज़्ज़ा है और न ही संसद चुंगी का अखाड़ा

जब सरकार संवैधानिक दायरे में रह कर, तय तरीके से, तय समय में, वोटिंग के जरिए बिल पास करा रही है तो एक हिस्से को इससे समस्या क्या है? डेरेक की आपत्ति का मूल बेहद खोखला है। उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या किसी तरह का कोई गलत बिल पास हुआ है?

‘Miss You-Kiss You’ से लेकर योग और गोमांस तक इरा त्रिवेदी के ‘कर्मों’ पर रिग्रेसिव हिन्दू नजर

इरा द्वारा गोमांस के प्रचार को लेकर सामने आए विवाद के बाद उन्हें दूरदर्शन ने चौबीस घंटे घर पर योग करने की आजादी दे दी है। अब वो दूरदर्शन पर योग नहीं सिखा पाएँगी। हालाँकि, इस प्रकरण के बाद वो ट्विटर पर माफ़ी माँगती नजर आईं थी।

कारगिल दिवस पर उमर-शेहला-महबूबा भूले ट्विटर पासवर्ड, ट्वीट करने वाली स्याही खत्म

उमर अब्दुल्ला हों या फिर शेहला रशीद, सोशल मीडिया पर अफवाहों और मनगढ़ंत मुद्दों पर अपने प्रलापों की वजह से अक्सर चर्चा में बने रहने वाले इन सभी का कारगिल विजय की वर्षगाँठ पर सन्नाटे में चले जाना तो यही दर्शाता है कि इनकी खुशियाँ और प्राथमिकताएँ अन्य नागरिकों से भिन्न हैं।

29 साल की आयु में जिसने किया 84 दिन का अनशन और दी शहादत, गढ़वाल के ‘भगत सिंह’ श्रीदेव सुमन को नमन!

श्रीदेव सुमन के व्यक्तित्व में कई महापुरुषों की झलक थी। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। रियासत के खिलाफ श्रीदेव सुमन के विरोध में यदि भगत सिंह का जूनून नजर आता था, तो दूसरी ओर वे महात्मा गाँधी के विचारों से भी प्रभावित थे। सुमन एक श्रेष्ठ लेखक और साहित्यकार भी थे।