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जयन्ती मिश्रा

मुस्लिमों का बदला, जय फिलिस्तीन, कश्मीर में 90 वाला नरसंहार की धमकी… मुस्लिम विल बी मुस्लिम, जिस ‘मजहबी वफादारी’ से आगाह कर गए थे...

एक ओर पीएम मोदी 'सबका साथ-सबका विकास' के नारे के साथ देश को ऊँचाइयों पर लेकर जाना चाहते हैं। वहीं मुस्लिम नेता सिर्फ मजहब की राजनीति में लगे हैं।

मी लॉर्ड! माना वह फुटबॉल अच्छा खेलता था, रोज नमाज पढ़ता है… पर रेप के बाद 6 साल की बच्ची की हत्या भी तो...

10 साल पहले आसिफ अली ने एक बच्ची की रेप के बाद हत्या कर दी थी और अब उसकी सजा इस आधार पर कम की गई है कि उसका जेल में बर्ताव अच्छा है।

हे भारत के विपक्ष! माना तुम खलिहर हो पर ‘राजा का डंडा’ नहीं है सेंगोल, भारत की स्वतंत्रता का वह प्रतीक है जिसे तुष्टिकरण...

लोकतंत्र में विपक्ष का काम जनता की आवाज बनना है। पर भारत का विपक्ष जनता से इस कदर टूट चुका है उसके लिए सेंगोल मुद्दा है।

पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरपंथियों ने 3 बार तोड़ी महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति, अब करतारपुर कॉरिडोर में लगेगी: कभी बालाकोट में स्ट्राइक कर 300+...

महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति को पाकिस्तान में दो बार खंडित किया गया। अब ये मूर्ति करतारपुर साहिब गुरुद्वारे में लगने वाली है ताकि भारतीय भी इसे देखें।

हिंदुओं का गला रेता, महिलाओं को नंगा कर रेप: जो ‘मालाबर स्टेट’ माँग रहे मुस्लिम संगठन वहीं हुआ मोपला नरसंहार, हमें ‘किसान विद्रोह’ पढ़ाकर...

जैसे मोपला में हिंदुओं के नरसंहार पर गाँधी चुप थे, वैसे ही आज 'मालाबार स्टेट' पर कॉन्ग्रेसी और वामपंथी खामोश हैं।

ज्ञान से इतना खौफ खाता है इस्लाम कि 3 महीने तक जलती रहीं किताबें, नालंदा विश्व​विद्यालय से बची थी बख्तियार खिलजी की जान फिर...

नालंदा विश्वविद्यालय को एहसान फरामोश बख्तिार खिलजी ने अपनी चिढ़ में इस तरह बर्बाद किया था कि कहा जाता है उसमें तीन महीने तक किताबें जलती रही थीं।

‘हमारे बारह’ पर जो बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, वही हम भी कह रहे- मुस्लिम नहीं हैं अल्पसंख्यक… अब तो बंद हो देश के...

हाई कोर्ट ने कहा कि उन्हें फिल्म देखखर नहीं लगा कि कोई ऐसी चीज है इसमें जो हिंसा भड़काने वाली है। अगर लगता, तो पहले ही इस पर आपत्ति जता देते।

न दुख-न पश्चाताप… पवित्रा का यह मुस्कुराता चेहरा बताता है कि पर्दे के सितारों में ‘नायक’ का दर्शन न करें, हर फैन के लिए...

'फैन हत्याकांड' मामले से लोगों को सबक लेने की जरूरत है कि पर्दे पर दिखने वाले लोग जरूरी नहीं जैसा फिल्मों में दिखाए जाते हैं वैसे ही हों।