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जयन्ती मिश्रा

क्रिकेट में घुस गया कोरोना के टाइम ‘थूक जिहाद’ लाने वाला तबलीगी जमात, पाकिस्तानी खिलाड़ी हो गए ‘मुसलमान’ और खेल को बना दिया ‘उम्माह...

पाकिस्तान क्रिकेटर खेल से ज्यादा तबलीगी जमात के प्रचारक बन गए हैं। कई क्रिकेटरों की तस्वीरें आई हैं जो ऐसे मजहबी कार्यक्रमों में शामिल हुए।

राहुल गाँधी जी माना आप हाथरस पर ‘राजनीति’ नहीं कर रहे, पर संदेशखाली से लेकर तमिलनाडु में जहरीली शराब से मौतों तक पर आपकी...

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी हाथरस जाकर कह रहे हैं कि इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए... जबकि हकीकत तो ये है कि वो खुद हाथरस यही करने पहुँचे हैं।

बहुसंख्यकों के अल्पसंख्यक होने का खतरा कितना बड़ा, कितनी घटी हिंदुओं की हिस्सेदारी, क्यों अदालतें कह रहीं- धर्मांतरण रोको, घुसपैठियों को भगाओ: सारे सवालों...

भारत के उन इलाकों को यदि देखेंगे जहाँ डेमोग्राफी बदलाव हुआ तो समझ आएगा कि कैसे बढ़ती मुस्लिमों की जनसंख्या हिंदुओं की आबादी को प्रभावित करती है।

मुस्लिमों का बदला, जय फिलिस्तीन, कश्मीर में 90 वाला नरसंहार की धमकी… मुस्लिम विल बी मुस्लिम, जिस ‘मजहबी वफादारी’ से आगाह कर गए थे...

एक ओर पीएम मोदी 'सबका साथ-सबका विकास' के नारे के साथ देश को ऊँचाइयों पर लेकर जाना चाहते हैं। वहीं मुस्लिम नेता सिर्फ मजहब की राजनीति में लगे हैं।

मी लॉर्ड! माना वह फुटबॉल अच्छा खेलता था, रोज नमाज पढ़ता है… पर रेप के बाद 6 साल की बच्ची की हत्या भी तो...

10 साल पहले आसिफ अली ने एक बच्ची की रेप के बाद हत्या कर दी थी और अब उसकी सजा इस आधार पर कम की गई है कि उसका जेल में बर्ताव अच्छा है।

हे भारत के विपक्ष! माना तुम खलिहर हो पर ‘राजा का डंडा’ नहीं है सेंगोल, भारत की स्वतंत्रता का वह प्रतीक है जिसे तुष्टिकरण...

लोकतंत्र में विपक्ष का काम जनता की आवाज बनना है। पर भारत का विपक्ष जनता से इस कदर टूट चुका है उसके लिए सेंगोल मुद्दा है।

पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरपंथियों ने 3 बार तोड़ी महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति, अब करतारपुर कॉरिडोर में लगेगी: कभी बालाकोट में स्ट्राइक कर 300+...

महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति को पाकिस्तान में दो बार खंडित किया गया। अब ये मूर्ति करतारपुर साहिब गुरुद्वारे में लगने वाली है ताकि भारतीय भी इसे देखें।

हिंदुओं का गला रेता, महिलाओं को नंगा कर रेप: जो ‘मालाबर स्टेट’ माँग रहे मुस्लिम संगठन वहीं हुआ मोपला नरसंहार, हमें ‘किसान विद्रोह’ पढ़ाकर...

जैसे मोपला में हिंदुओं के नरसंहार पर गाँधी चुप थे, वैसे ही आज 'मालाबार स्टेट' पर कॉन्ग्रेसी और वामपंथी खामोश हैं।