"इससे पहले कि आप जज करें कि मैंने कौन से कपड़े पहन रखे थे, मैं आपको बता दूँ कि मैंने नार्मल जीन्स-टॉप ही पहन रखा था। जैसे ही मैं उसकी टैक्सी में घुसी, ड्राइवर ने अपने पेंट की चेन खोल कर अश्लील हरकतें करनी शुरू कर दी। उसने मुझे ग़लत निगाहों से घूरना शुरू कर दिया।"
"हम दिन-रात इसलिए मेहनत नहीं कर रहे कि ऐसी हरकत की जाए। किसी का बेटा होने का ये मतलब नहीं कि मनमानी की छूट होगी। जेल से छूटने के बाद स्वागत में जो लोग गए थे, उनको बाहर किया जाए, पूरी यूनिट भंग की जाए।"
"निजी वाहन में बिना अनुमति के कोई प्रवेश नहीं किया जा सकता। इसकी अनुमति वाहन का मालिक ही दे सकता है। लेकिन, यदि वाहन सार्वजनिक स्थल पर खड़ा है तो पब्लिक के पास प्राइवेट वाहन को अप्रोच करने का अवसर होता है।"
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी के प्रतिनिधियों की बातें सुनने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जाँच का दायरा बढ़ा दिया। गृह मंत्रालय ने कहा कि 1984 सिख विरोधी दंगे के वीभत्स रूप को देखते हुए इससे जुड़े सभी ऐसे गंभीर मामलों में जाँच फिर से शुरू की जाएगी, जिसे बंद कर दिया गया था या फिर जाँच पूरी कर ली गई थी।
शाहीन की 5 साल की एक बेटी है और वह जब भी अपनी बच्ची को लेकर ससुराल जाती है तो वहाँ उसके पति के घरवाले उसके साथ मारपीट करते हैं और तीन तलाक का हवाला देकर घर से निकाल देते हैं।
इस अनुच्छेद की वजह से कश्मीर में आरटीआई भी लागू नहीं है। इसके अलावा शहरी भूमि क़ानून भी वहाँ लागू नहीं होता। जम्मू कश्मीर का अपना अलग ध्वज है और वहाँ के निवासियों के पास दोहरी नागरिकता होती है। यहाँ विधानसभा का कार्यकाल भी 6 वर्षों का होता है।
भगवा ध्वज फहराना दलित उत्पीड़न के अंतर्गत अपराध नहीं है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज किए गए एक मामले पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपित को जमानत दी।
जूता फैक्ट्री चलाने वाले ज़ाहिद ने आरोप लगाया कि उसके समाज के लोगों ने जबरन उसकी फैक्ट्री बंद कराने की कोशिश की और धमकियाँ दीं। इरफ़ान सलीम, शिराज कुरैशी, महमूद ख़ान, राहत अली, नदीम नूर, जुहैर ख़ान, हाजी बिलाल और तालिब शहजाद सहित कई लोगों पर मुक़दमे दर्ज किए गए।