स्थिति को गंभीर समझते हुए रिटायर्ड सीजेआइ लोढ़ा ने एक लाख रुपए तुरंत उस बैंक खाते पर भेज दिए। इसके बाद 30 मई को जब जस्टिस बीपी सिंह से उनकी बात हुई तो पता चला कि उन्होंने ऐसा कोई मेल भेजा ही नहीं था। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है।
अपने पत्र में बच्ची ने इस बात का जिक्र भी किया है कि वो भले ही अभी अपनी माँ के साथ है लेकिन फिर भी वो अपने पसंदीदा देश में बिताई अपनी पुरानी जिंदगी को बहुत याद करती है।
रहत इंदौरी ने लिखा: "आजकल बिजली जाना आम हो गया है। आज भी पिछले 3 घंटों से बिजली नहीं है। गर्मी है, रमजान भी है। 'मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत् वितरण कम्पनी लिमिटेड' के इंदौर दफ्तर में कोई फोन नहीं उठा रहा है। कुछ मदद करें।"
पूजा या यज्ञ कर के बारिश लाना एक सफल तरीका है या यह असफल है, इस बात की जाँच करना अदालत का काम नहीं है। अदालत ने कहा कि वह हजारों-लाखों लोगों की आस्था तोड़ने का काम नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि सामान्यतः उसने ख़ुद को धार्मिक क्रियाकलापों और आस्थाओं में हस्तक्षेप करने से दूर ही रखा है।
मुस्लिमों के घरों में जाकर भी देखा जा रहा है कि कहीं वे नमाज़ वगैरह तो नहीं पढ़ रहे या अपने मज़हब की चीजों को तो नहीं प्रैक्टिस कर रहे। कैम्पों में 30 लाख के लगभग उइगरों को नज़रबंद रखा गया है।
ममता बनर्जी अब जहाँ से भी गुज़रेंगी हो सकता है कि उस स्थान को अब पूरी तरह से खाली करा लिया जाए। आमतौर पर उस स्थान को पहले से ही खाली करा लिया जाता है जहाँ नेताओं के विरोध में नारेबाज़ी होने की गुंजाइश हो या फिर उन्हें काले झंडे दिखाए जाने की संभावना हो।
पढ़ाई पूरी करने के पहले ही आतंकी समूहों के संपर्क में आने के बाद आदिल MBA खत्म कर जॉर्डन से होता हुआ 2013 में तुर्की जा पहुँचा। वहाँ NGO में काम करने के बहाने पहुँचने के बाद उसने एक डच (हॉलैंड निवासी) महिला से निकाह भी कर लिया, और उसे भी जिहाद में शामिल कर लिया।
शहनाज के परिवार वाले दूसरे धर्म के लड़के गौरव से शादी करवाने के लिए तैयार नहीं थे और शहनाज की मर्जी के बगैर 10 फरवरी को उसकी शादी कहीं और करवा रहे थे। इसलिए उसने 6 फरवरी को घर छोड़ दिया और दिल्ली के जंगपुरा के शेल्टर हेम में शरण लिया।