एक छात्रा ने ये भी बताया कि हर शुक्रवार (जुमा) को स्कूल में नमाज पढ़ना अनिवार्य था। हिंदी-अंग्रेजी से ज्यादा उर्दू-अरबी सिखाया जाता था। प्रार्थना में दुआ पढ़ने को कहा जाता था।
ईरान में 75,000 में से 50,000 मस्जिदें बंद हो चुकी हैं। वहाँ के एक वरिष्ठ मौलाना ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि लोगों में मजहब के प्रति रुचि कम हो रही।