धर्म और संस्कृति

श्री शांतादुर्गा मंदिर: पठानों ने चुराई मूर्ति, पुर्तगालियों ने तोड़ा… माँ दुर्गा के शांत स्वरूप को छत्रपति शिवाजी के पोते का फिर मिला साथ

समय के साथ गोमंतक या गोपपुरी को गोवा कहा जाने लगा लेकिन आज भी यहाँ कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो गोवा के सनातन इतिहास की गाथा कहते हैं।

शिवलिंग, छिद्र और रहस्य: महादेव का गुफा मंदिर, परशुराम को फरसा और कर्ण को विद्या मिलने की स्थली

राजसमंद और पाली जिले की सीमा पर स्थित है चमत्कारिक परशुराम महादेव मंदिर। परशुराम ने अपने फरसे से चट्टानों को काटकर की थी स्थापना।

सोलन का 122 फुट ऊँचा शिव मंदिर, जहाँ पत्थरों को थपथपाने पर आती है डमरू की आवाज

सोलन के जटोली शिव मंदिर की विशेषता है, निर्माण में लगाए गए पत्थर। इन पत्थरों को छूने या थपथपाने से डमरू की आवाज आती है।

जहाँ माँ दुर्गा को देते हैं गन सैल्यूट, जो है माता शक्ति का स्थायी निवास: मेघालय का नर्तियांग मंदिर

मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले में स्थित है नर्तियांग दुर्गा मंदिर। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।

केरल: असुर ने स्थापित किया शिवलिंग, पांडव ने की पूजा; शोभायात्रा में शामिल होते हैं साढ़े 7 स्वर्ण हाथी

केरल के कोट्टयम जिले में स्थित है एट्टूमानूर महादेव मंदिर। इस मंदिर की दीवार पर द्रविड़ शैली में मुराल पेंटिंग उकेरी गई है।

निष्कलंक महादेव मंदिर: पांडव जहाँ हुए थे अपने पापों से मुक्त, डूब जाता है जिसका 5 स्वयंभू शिवलिंग समुद्र में

गुजरात में अरब सागर तट पर स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर, जहाँ भगवान शिव ने पाँचों पांडवों को निष्कलंक बनाया। यहाँ स्थित हैं 5 स्वयंभू शिवलिंग।

हैदराबाद का करमनघाट मंदिर: मंगल नहीं… रविवार को होती है हनुमान पूजा, मंदिर तोड़ने आया औरंगजेब काँपा था डर से

प्रतिमा के भीतर से भगवान राम के जाप की आवाज सुनाई दे रही थी। इसके बाद राजा राजधानी लौट आए और हनुमान जी के इस अद्भुत मंदिर की स्थापना की।

बाबा बासुकीनाथ जो करते हैं भक्तों के फौजदारी मामलों की सुनवाई, बैजनाथ धाम की यात्रा इनके बिना है अधूरी

झारखंड स्थित बाबा बैजनाथ के बाद अधिकांश श्रद्धालु बासुकीनाथ मंदिर ही पहुँचते हैं। मान्यता भी है कि जब तक बासुकीनाथ के दर्शन न किए जाएँ तब तक बाबा बैजनाथ की यात्रा अधूरी ही मानी जाएगी।

सनातन और जनजातीय संस्कृति का अनूठा संगम: शक्तिपीठों में से एक दंतेश्वरी माता मंदिर, जिसके नाम से प्रसिद्ध हुआ एक जिला

होली से पहले दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी माता मंदिर में नौ दिवसीय फाल्गुन मड़ई नामक त्यौहार का आयोजन होता है। इस त्यौहार के दौरान हर दिन माता दंतेश्वरी की डोली लगभग 250 देवी-देवताओं के साथ नगर भ्रमण पर निकलती हैं।

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