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न्यूजलॉन्ड्री पर यौन उत्पीड़न के आरोप? रेपिस्ट तरुण तेजपाल के बचाव के पुराने रिकॉर्ड के बीच पूर्व कर्मचारियों ने खोली पोल

न्यूजलॉन्ड्री में काम कर चुकीं कुछ पूर्व महिला कर्मचारियों ने कंपनी के भीतर मौजूद कामकाज के माहौल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इशारों में यह बताया है कि कंपनी के अंदर खुलेआम यौन उत्पीड़न का माहौल मौजूद था। इस पूरे मामले को सबसे पहले पत्रकार साईकिरण कन्नन ने सोशल मीडिया और अन्य मंचों के जरिए खुलासा किया। इसके बाद से यह संवेदनशील मुद्दा सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया।

न्यूजलॉन्ड्री और उसके सह-संस्थापक अभिनंदन सेखरी इन दिनों चर्चा में हैं। अभिनंदन सेखरी पर ना केवल रेप के आरोपित का बचाव करने वाले रवैये के आरोप है, बल्कि उन पर महिलाओं के साथ गलत व्यवहार करने और कंपनी के अंदर यौन उत्पीड़न का माहौल बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं।

तहलका के संस्थापक तरुण तेजपाल को साल 2013 में अपनी सहकर्मी के साथ दुष्कर्म करने का दोषी पाया गया है। अदालत ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई है। यह वही तरुण तेजपाल हैं जिनका इंटरव्यू साल 2012 में अभिनंदन सेखरी ने लिया था। कुछ लोग यह कह सकते हैं कि उस साल उन पर दुष्कर्म के आरोप नहीं लगे थे। इसलिए उनका इंटरव्यू लेना शायद गलत नहीं लगा हो। लेकिन इसके सबूत बताते हैं कि बात ऐसी नहीं थी। मीडिया जगत के बड़े लोगों को तरुण तेजपाल की हरकतों के बारे में पहले से ही पूरी जानकारी थी।

आरोपित के गलत कामों को देखकर लोग सिर्फ चुपचाप तमाशा नहीं देखते रहे। उन्होंने नए-नए शब्दों और तकनीकी भाषा का इस्तेमाल करके उसके इस गंदे व्यवहार को सही ठहराने की कोशिश की। इस मामले में सबसे कुख्यात बयान जाने-माने ‘पत्रकार’ विनोद मेहता का था। उन्होंने तरुण तेजपाल द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न को ‘बिना सहमति के शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा’ (non-consensual carnal favour) जैसा अजीब नाम दिया था।

बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी। साल 2014 में न्यूजलॉन्ड्री के सह-संस्थापक अभिनंदन सेखरी की बहन निरुपमा ने भी आगे आकर तरुण तेजपाल का खुला बचाव किया था। वह इतने पर ही नहीं रुकीं। उन्होंने और आगे बढ़कर उस पीड़ित महिला के चरित्र पर ही कीचड़ उछालना शुरू कर दिया, जिसके साथ गलत हुआ था। उस समय उन्होंने अपने बयान में कहा, “सबसे पहले मैं साफ कर देना चाहती हूँ कि मैं आपको पीड़िता नहीं मानती। सिवाय इसके कि आप ‘बबलगम फेमिनिज्म’ की पीड़िता हों, जिसके बारे में मैं आगे विस्तार से बात करूँगी।”

जब कोई संस्था दुष्कर्म के आरोपित का तुरंत बचाव करने के लिए दौड़ पड़ती है, तो इससे उसकी असलियत सामने आ जाती है। इससे पता चलता है कि कंपनी के भीतर किस तरह का माहौल चल रहा है। न्यूजलॉन्ड्री ने एक ऐसा लेख छापा था जिसमें दुष्कर्म को सही ठहराने की कोशिश की गई थी। उस लेख के छपने के बाद उन्हें पीड़ित महिला के दर्द पर रत्तीभर भी पछतावा नहीं हुआ।

बाद में उन्होंने उस लेख को चुपचाप हटा दिया और एक आम सा माफीनामा या ‘आत्म-चिंतन’ नोट लिख दिया। इससे साफ पता चलता है कि इस व्यवस्था के अंदर गंदगी कितनी गहरी तक फैली हुई थी। यह सारा काला चिट्ठा तब खुला जब तरुण तेजपाल को अदालत से सजा हुई। न्यूजलॉन्ड्री में काम कर चुकीं कुछ पूर्व महिला कर्मचारियों ने इसके बाद कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि कंपनी के भीतर यौन उत्पीड़न का माहौल खुलेआम मौजूद है। इस पूरे और संवेदनशील मामले को सबसे पहले पत्रकार साईकिरण कन्नन ने दुनिया के सामने उजागर किया था।

सुमेधा मित्तल के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

न्यूजलॉन्ड्री की पूर्व वरिष्ठ पत्रकार सुमेधा मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने अपनी इस पोस्ट में लिखा है, “मुझे उम्मीद है कि वह दिन भी जरूर आएगा जिस दिन यह कंपनी अपने ही न्यूजरूम के अंदर हुई यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर भी उतनी ही गंभीरता से विचार करेगी और सोचेगी।”

सुमेधा मित्तल के X प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट

सुमेधा मित्तल की यह प्रतिक्रिया तब आई जब कंपनी ने साल 2014 में छपे उस लेख को चुपचाप हटा दिया, जिसे अभिनंदन सेखरी की बहन ने लिखा था और जिसमें दुष्कर्म के आरोपित का बचाव किया गया था। एक पूर्व कर्मचारी का खुलकर सामने आना और यह कहना कि कंपनी के अंदर यौन उत्पीड़न (POSH) की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, बेहद गंभीर चिंता का विषय है।

इससे कई बड़े और कड़े सवाल खड़े होते हैं। कंपनी के भीतर ऐसी कितनी यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज की गई थीं? उन शिकायतों पर प्रबंधन ने क्या कदम उठाए और क्या कार्रवाई की गई? क्या न्यूजलॉन्ड्री के मैनेजमेंट ने उन मामलों पर पर्दा डालकर अपने ही लोगों और तरुण तेजपाल जैसे लोगों को बचाने की कोशिश की थी?

प्रियंका ईश्वरी की एक्स प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट

प्रियंका ईश्वरी के ट्वीट का स्क्रीनग्रैब

न्यूजलॉन्ड्री की एक और पूर्व कर्मचारी प्रियंका ईश्वरी ने भी इस मामले पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने लिखा, “उम्मीद है कि वे सीनियर पत्रकारों को यह सिखाएँगे कि काम के सिलसिले में होने वाली कॉल पर महिला एडिटर्स पर चिल्लाएँ नहीं और उन्हें ‘कब से देख रहा हूँ मैं तेरेको’ जैसी बातें कहकर धमकाएँ नहीं। क्या पुरुष रिपोर्टरों को महिला सहयोगियों के साथ पेशेवर तरीके से पेश आने और ऑफिस को ‘लड़कों का लॉकर रूम’ न बनाने की ट्रेनिंग देने की उम्मीद करना बहुत बड़ी बात है?”

इन महिलाओं के बयानों से यह साफ पता चलता है कि न्यूजलॉन्ड्री के भीतर महिलाओं से नफरत करने वाला और जहरीला पुरुषवादी माहौल मौजूद है। इसमें एक और गौर करने वाली बात यह है कि कई जाने-माने अपराधी और दुष्कर्म का बचाव करने वाले लोग इस संस्था में आसानी से नौकरी पा लेते हैं। इसका उदाहरण #MeToo के आरोपित विक्रम किलपडी हैं, जिन्होंने तरुण तेजपाल की तरह तहलका में काम किया था।

लेख का स्क्रीनशॉट

लमत आर हसन नाम की एक महिला पत्रकार ने बताया था कि साल 2005 में विक्रम ने उनके साथ दुष्कर्म करने की लगभग कोशिश की थी। उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह काफी हिंसक हो गए थे। उन्होंने उनके बाल खींचे, कलाई पकड़ी, दीवार से सटाया और फिर बिस्तर पर धकेल दिया। खुद को छुड़ाने की उनकी सारी कोशिशें नाकाम हो गईं। वह रोने लगीं, तब जाकर उसने उन्हें छोड़ा और यह किसी रेप होने के सबसे करीब का अनुभव था।

खुद न्यूजलॉन्ड्री के अपने खुलासे के मुताबिक, यही आदमी न्यूजलॉन्ड्री में भी काम कर चुका था।

अगर मेरी याददाश्त सही है, तो मैं न्यूजलॉन्ड्री के प्रधान संपादक रमन कृपाल से जुड़ी एक घटना को याद कर सकता हूँ। उन्होंने नैनीताल में 65 साल के मोहम्मद उस्मान द्वारा एक नाबालिग लड़की के साथ हुए रेप को ‘प्रेम संबंध’ और ‘छोटी घटना’ कहकर कम करके आंका था।

न्यूजलॉन्ड्री के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

रमन कृपाल, जिन्हें पहले आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है, उन्होंने झिझकते हुए एक दिखावे के लिए माफी माँगी। यहाँ तक कि न्यूजलॉन्ड्री को भी एक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा था। जब बातचीत बिना स्क्रिप्ट के होती है, तो लोग अक्सर वही बोल देते हैं जो उनके दिल और दिमाग में चल रहा होता है।

न्यूजलॉन्ड्री के प्रधान संपादक के पद पर रहते हुए रमन कृपाल का एक नाबालिग बच्चे के बलात्कार के बारे में इस तरह की बात कहना हमें साफ तस्वीर दिखाता है। इससे हमें यह स्पष्ट अंदाजा हो जाता है कि उस खास संस्था के अंदर क्या चीज ‘सामान्य’ मानी जाती है।

महिलाओं के अधिकारों और नारीवाद का चुनिंदा समर्थन करने वाले लोग इन तमाम सालों में अपने खुद के घर को ठीक नहीं कर पाए। लेकिन वे दुनिया भर की हर बात पर दूसरों को बड़ी-बड़ी बातें सिखाने और खुद को नैतिक रूप से बेहतर दिखाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

शायद अभिनंदन सेखरी और उनकी टीम जिम्मेदारी लेना शुरू कर सकती है। मैं जानता हूँ कि यह वामपंथी-उदारवादी इकोसिस्टम के लिए सबसे मुश्किल काम है, लेकिन (बदलाव के लिए) वह इस बात की कोशिश कर सकते हैं।

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Dibakar Dutta
Dibakar Duttahttps://dibakardutta.in/
Centre-Right. Political analyst. Assistant Editor @Opindia. Reach me at [email protected]

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