धर्म और संस्कृति

जहाँ नारी स्वरूप में पूजे जाते हैं हनुमान जी: रतनपुर का गिरिजाबंध मंदिर, 10000 साल पुराना इतिहास

रतनपुर के गिरिजाबंध हनुमान मंदिर में स्थापित हनुमान जी की नारी स्वरूप प्रतिमा के बारे में मान्यता है कि यह लगभग 10,000 साल पुरानी स्वयंभू प्रतिमा है।

श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर: पत्थर का नंदी… लेकिन लगातार बढ़ रहा आकार, जहाँ शिवलिंग नहीं, प्रतिमा की होती है पूजा

शिव मंदिरों में भगवान शिव, शिवलिंग स्वरूप में पूजे जाते हैं लेकिन यागंती उमा महेश्वर मंदिर में भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप को पूजा जाता।

माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर: युद्ध में माँ की मूर्ति होती थी त्रिपुरा के राजा के साथ, पवित्र शक्तिपीठों और 10 महाविद्याओं में से एक

त्रिपुरा के त्रिपुर सुंदरी मंदिर के गर्भगृह में दो प्रतिमाएँ स्थापित हैं। 5 फुट ऊँचाई की मुख्य प्रतिमा माता त्रिपुर सुंदरी की है जबकि...

वेनेश्वर महादेव मंदिर: महमूद गजनवी का आक्रमण, दो भागों में विभक्त शिवलिंग और हिंदू राजकुमारी की रक्षा

सोमनाथ के प्रभास पाटन क्षेत्र में स्थित है वेनेश्वर महादेव मंदिर, जहाँ महमूद गजनवी से अपनी अनन्य भक्त की रक्षा करने के लिए भगवान शिव ने...

तारा तारिणी मंदिर: प्रथम पूज्य 4 आदि शक्तिपीठों में से एक, शक्ति तंत्र का प्रमुख केंद्र, 999 सीढ़ियों की है चढ़ाई

ओडिशा का तारा तारिणी मंदिर 4 आदि शक्ति पीठों में से एक, इसे 'स्तन पीठ' के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यहाँ माता सती के दोनों स्तन गिरे थे।

उज्जैन में मिला 1000 साल पुराने मंदिर का ढाँचा, महाकाल परिसर के विस्तार के लिए हो रही खुदाई

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के आसपास खुदाई के दौरान करीब 1000 वर्ष पुराने मंदिर का ढाँचा मिला है।

भगवान नरसिंह का निवास स्थान जो सदियों तक धरती में दबा रहा: आंध्र प्रदेश का सिंहाचलम मंदिर और मान्यताएँ

श्री हरि के चौथे अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित है आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित सिंहाचलम मंदिर। इस मंदिर को उनका निवास स्थान माना जाता है।

78 दिन, 18 स्थान, 2500 लोक कलाकार: UP में 24 जुलाई से 16 जिलों में करवाए जाएँगे ‘रामराज्य’ के दर्शन

यूपी में संस्कृति एवं पर्यटन विभाग रामायण कॉन्क्लेव आयोजित कराने जा रहा है। इस दौरान योगी सरकार 18 स्थानों पर रामराज्य के दर्शन करवाएगी।

श्री चामुंडेश्वरी मंदिर: माँ दुर्गा ने जहाँ किया था महिषासुर का वध, मंदिर में प्रवेश से पहले राक्षस की भी है जहाँ विशाल मूर्ति

कर्नाटक के मैसूर स्थित श्री चामुंडेश्वरी मंदिर का निर्माण द्रविड़ वास्तुशैली में। मंदिर में प्रवेश से पहले महिषासुर की बड़ी सी प्रतिमा स्थापित।

कितना बर्बर था औरंगजेब, कैसे मंदिरों को ध्वस्त कर रही थी मुगलिया फौज: प्रतापगढ़ के अष्टभुजा मंदिर में आज भी मौजूद हैं निशान

प्रतापगढ़ के अष्टभुजा धाम मंदिर में आज भी खंडित मूर्तियों की पूजा होती है। औरंगजेब की मुगलिया फौजों ने मूर्तियों के सिर, धड़ से अलग कर दिए थे।

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