“मेरा बेटा, जो पेशे से इंजीनियर है, ने करीब 10 साल पहले शादी की थी। अभी उसकी सात साल की बेटी है और हम उसकी देखभाल कर रहे हैं। पिछले साल वह मेरे बेटे के साथ डेनमार्क जाने वाली थी। एक दिन, उसके व्हाट्सएप ने काम करना बंद कर दिया और मेरे बेटे ने....."
इससे पहले राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सोमवार को संसद परिसर के अंदर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था, "मैं बीजेपी को चेतावनी देना चाहता हूँ कि यह कर्नाटक नहीं है। मध्य प्रदेश का एक भी कॉन्ग्रेस विधायक बिकने के लिए नहीं है।"
संत ने जिला प्रशासन से माँग की है कि उद्धव ठाकरे को अयोध्या आने की अनुमति न दी जाए लेकिन अगर यदि वह अयोध्या आते हैं तो वो स्वयं काला झंडा लेकर उनके काफिले को रोकेंगे। उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के नाम पर लोगों को ठगा है इसलिए अब अयोध्या में इनके लिए कोई स्थान नहीं है।
अटकलों का बाजार गर्म हो गया था और सभी इस सवाल के जवाब को तलाशने में लग गए थे कि आख़िर प्रधानमंत्री सोशल मीडिया को क्यों अलविदा कहना चाहते हैं? अब उन्होंने इस बात का जवाब दे दिया है। पीएम मोदी की उस घोषणा के पीछे का राज उन्होंने ख़ुद खोला है।
"मैंने सदन में नितिन भाई से कहा कि वह अकेले नहीं है। कॉन्ग्रेस उनके साथ है। यदि वे 20 विधायकों के साथ उनकी पार्टी (कॉन्ग्रेस) में शामिल हो जाएँ, तो कॉन्ग्रेस उन्हें डिप्टी सीएम से सीएम बना देगी।"
"उस रात मैं मुख्यमंत्री आवास पर ही थीं। तभी केजरीवाल के पास एक घायल मरीज के इलाज के लिए फोन आया। उन्होंने फोन पर तड़पते मरीज की मदद करने के बजाए नसीहत दे डाली कि सरकारी अस्पताल क्यों नहीं गए?
बीजेपी नेता अर्चना विश्वास के घर पर TMC के गुंडों ने फायरिंग की। भाजपा का आरोप है कि उनके घर के ऊपर टीएमसी के गुंडों ने इसलिए फायरिंग की, क्योंकि उन्होंने 1 मार्च को अमित शाह की रैली में हिस्सा लिया था।
पीएम के इस निर्णय के बाद तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों ने अंदेशा जताया कि जिस तरह से सोशल मीडिया पर हिंदुत्व और राष्ट्रवादी विचारधारा के लोगों को बदनाम किया जाता है, कहीं इसीलिए तो पीएम मोदी सोशल मीडिया को अलविदा नहीं कहने जा रहे हैं?
सारा अब्दुल्लाह पायलट की याचिका पर आज जम्मू कश्मीर प्रशासन ने अपना पक्ष रखा। जम्मू कश्मीर प्रशासन ने पिछले 7 महीने से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह को हिरासत में रखे जाने को जरुरी बताया।
वो आइआइटी कानपुर से पढ़ा हुआ है और फ़िलहाल इंटेल की बेंगलुरु ऑफिस में कार्यरत है। उसने दीनदयाल उपाध्याय के नाम से 'पंडित' हटा दिया। उसने दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन का नाम हटा दिया। वो लगातार ऐसी एडिटिंग कर के हिन्दू-घृणा से ग्रसित लेख बना रहा है।