दिल्ली के शराब नीति को लेकर केजरीवाल सरकार ने दावा किया था कि इससे राजस्व में 3500 करोड़ रुपए का फायदा होगा। हालाँकि इस शराब घोटाले से राजस्व में 2873 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
खारिज की गई इन याचिकाओं में से 5 में अग्निपथ योजना को चुनौती दी गई थी। वहीं 18 याचिकाओं में पिछली भर्ती योजना के अनुसार नियुक्ति करने की माँग की गई थी।