ऐसे वक्त में जब कोरोना से लोग अपनी जान गँवा रहे हैं, माबुद अली जैसे लोग अफवाह और गलत जानकारी के नाम पर धंधा कर रहे हैं। क्विंट जैसे संस्थान उनके अपराध को भी हिन्दुओं का उपहास उड़ाने के मौके के तौर पर ले रहे हैं।
"मैं 20 साल तक वकील और 20 साल जज रहा हूॅं। मैंने कई अच्छे और कई बुरे जजों को देखा है। लेकिन मैं भारतीय न्यायपालिका में किसी भी न्यायाधीश को इस यौन विकृत रंजन गोगोई जितना बेशर्म और अपमानजनक नहीं मानता। शायद ही कोई दोष है, जो इस आदमी में नहीं था।"
कोरोना के संक्रमण से निपटने के लिए मोदी सरकार की तैयारियों की पूरी दुनिया में सराहना हो रही। लेकिन, न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों को इसमें रहस्य दिख रहा है। अब वे कह रहे कि इतने कम मामले तो वे हैं जो डिटेक्ट हुए हैं, कई मामले होंगे जो टेस्टिंग सेंटर तक पहुॅंचे ही नहीं होंगे।
प्रेस काउंसिल ने लिखा कि देश के प्रथम नागरिक (राष्ट्रपति कोविंद) पर व्यंग्यात्मक टिप्पणियाँ, उपहास और उन्हें नीचा दिखाने की बात गैरजरूरी होने के साथ-साथ पत्रकारिता के उचित प्रतिमानों के विपरीत जाती हैं।
तोमर बीजेपी के मंडल अध्यक्ष थे। AIMIM के पश्चिमी यूपी के प्रभारी आरिफ की गिरफ्तारी के बाद इस हत्या में कुरैशी की भूमिका उजागर हुई थी। लेकिन वह फरार हो गया था।
उत्तर प्रदेश को पुराना गौरव वापस दिलाने के लिए हमारी सरकार कृति संकल्पित है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से शेष दो वर्ष में उत्तर प्रदेश प्रगति के नए आयाम लिखेगा।
"कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव के चलते दिहाड़ी मजदूर भाई-बहनों को परिवार के भरण-पोषण में समस्या न हो, इस हेतु एक तय धनराशि मजदूर भाई-बहनों के बैंक खाते में प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में वित्तमंत्री की अध्यक्षता में गठित समिति 3 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।"
राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात बंगाल की सरकार विकास परियोजनाओं को लेकर भी उदासीन है। राज्य में 1974 में 110 किमी लंबी एक रेल परियोजना शुरू हुई। आप जानकर हैरत में रह जाएँगे कि 46 साल में यह परियोजना महज 42 किमी ही पूरी हो पाई है।
इटली से लाई गई एक युवती के पिता ने अपनी भावना साझा करते हुए कहा है कि वो सालों से सरकार की आलोचना कर रहे थे। लेकिन, अब उन्हें एहसास हो रहा है कि मोदी सरकार पिता के साए (fatherly figure) जैसी है।
खबर के अंत में लिखे गए एक पैराग्राफ को पढ़कर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह से 'जय श्री राम' के प्रयोग से हिंदुओं को न सिर्फ दंगाई बताया गया बल्कि अपनी चापलूसी की सारी हदों को पार कर खबर में अश्लीलता भी परोसी गई कि हिंदुओं ने ही मुस्लिम महिलाओं के सामने अपने पैंट उतारे और उनको अपना लिंग दिखाया।