मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल की सामाजिक विज्ञान की परीक्षा में सही जोड़ी मिलाने वाले सवाल (प्रश्न संख्या- 4) में एक विकल्प 'आज़ाद कश्मीर' का दिया गया है। प्रश्न नंबर 26 में ये दिखाने को कहा गया है कि नक़्शे में 'आज़ाद कश्मीर' कहाँ है?
अंग्रेजों की औपनिवेशिक, विभाजनकारी तथा जनजातीय नीतियों और ईसाई शिक्षा ने यह गढ़ा कि इस क्षेत्र की सभी जनजातियाँ मंगोल हैं, क्रूर, जंगली तथा हिंसक हैं। परन्तु उनमें प्रचलित अनेक रीतियाँ, लोक-मान्यताएँ, जीवन-मूल्य तथा परम्पराएँ शेष भारत की परम्पराओं से लेशमात्र भी अलग नहीं हैं। इसका उल्लेख वेदों से लेकर महाभारत और रामायण तक में...
दिल्ली और यूपी पुलिस की संयुक्त बैठक के बाद राजधानी से सटे इलाकों से भी दंगाइयों के आने की बात सामने आई है। कॉन्स्टेबल रतनलाल के हत्यारों की पहचान भी हो चुकी है। पुलिस पर हमला सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था।
राह चलते किसी को पकड़ लो। उससे कुछ बुलवा दो। फिर उसे TV पर दिखाओ... और किसी को बदनाम कर दो। जब हंगामा हो तो सोशल मीडिया पर चुपके से एक ट्वीट डाल दो। - यह NDTV का फॉर्मूला है। दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में कपिल मिश्रा को बदनाम करने के लिए भी यही तरीका अपनाया NDTV ने, लेकिन दाँव उल्टा पड़ गया - बहुत गाली पड़ रही है।
कॉन्ग्रेस महासचिव निकली थीं योगी सरकार को घेरने। लेकिन, सोशल मीडिया में खुद ही घिर गईं। यूजर्स ने झट से उनके झूठ को पकड़ लिया। वैसे कॉन्ग्रेस नेताओं के लिए ऐसी हरकतें नई नहीं है। वे वो पहले भी इस तरह से झूठ फैलाते पकड़े जा चुके हैं।
करीब 40 पुलिसकर्मियों ने गुरुवार सुबह 9 बजे से ही कोर्ट में घेराबंदी कर रखी थी। कोई छोले-कुलचे वाले के पास ग्राहक बनकर खड़ा था तो कोई पार्किंग अटेंडेंट बनकर। कोई चायवाला बना था तो कोई मुंशी। कई पुलिसवाले वकील बने भी घूम रहे थे।
NDTV का रिपोर्टर, कैमरा और माइक - सामने खड़ा संजय गुप्ता नाम का एक आदमी। इस आदमी के अनुसार कपिल मिश्रा के 'भड़काऊ' भाषण के बाद हिंसा भड़की। लेकिन असली खबर इसके बाद है। NDTV इस आदमी को कपिल मिश्रा का मकान मालिक बताता है, जबकि सच्चाई यह है कि संजय नाम को कोई भी शख्स कपिल मिश्रा का कभी भी मकान मालिक नहीं रहा।
अशफाक ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर कहा है कि यूपी में उसकी जान को खतरा है, इसलिए हत्या के केस को दिल्ली या किसी अन्य राज्य में शिफ्ट किया जाए। इस मामले पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने...
दंगाइयों ने दिलबर सिंह नेगी के हाथ और पैर काटने के बाद उनके शरीर के बाकी हिस्से को जलती आग में फेंक दिया था। दिलबर सिंह नेगी उत्तराखंड के पौड़ी जिले स्थित थलीसैण ब्लॉक से सम्बन्ध रखते थे।