दिल्ली के जामिया नगर इलाके में एक कॉलोनी है- अबुल फजल। ये कॉलोनी रविवार को जनता कर्फ्यू के दौरान चर्चा में रही। कारण यहाँ की गलियों में गूँजे ‘आजादी’ के नारे! ये वैसे ही आजादी के नारे थे, जिन्हें कभी कश्मीर में अलगाववादियों द्वारा गला फाड़ चिल्लाया जाता था और जिनका समर्थन पाकिस्तान के आतंकी...
"वाह कैफ जी वाह, बहुत खूब आप में और गैर इमान वालों में क्या फर्क है बता सकते हैं? अरे आपको चाहिए अपने परिवार को बोलते अल्लाह के सामने सजदा करो, दुआ माँगो, रो-रोकर दुआ माँगो और सुन्नत पे चलो। अल्लाह की बात छोड़ बजाय फेकू साहब की मान रहे हो, वाह।"
कुछ दिन पहले ही शेहला ने ट्वीट के जरिए नरेन्द्र मोदी के समर्थन में चंद शब्द लिखे थे, लेकिन अब ऐसे ट्वीट्स की मात्रा बढ़ती जा रही है, जिसने लिबरल्स की परेशानियाँ बढ़ा दी हैं।
22 मार्च की सुबह से ही जनता कर्फ्यू के सन्नाटे के बावजूद भी कुछ लोगों ने आरती और शंख ध्वनियाँ शुरू कर दी थीं लेकिन शाम पाँच बजते ही मानो पूरा भारत एक मंदिर में तब्दील हो गया। यह पल इतना भावुक कर देने वाला था कि जिन लोगों ने यह पल महसूस किया है वो शायद ही कभी इसे भूल पाएँगे।
"मैं जनता कर्फ्यू के समर्थन में दिल्ली स्थित अपने आवास पर हूँ। इस बहाने आधे घंटे तक ट्रेडमिल पर पसीना बहाने का अवसर मिला। खुद को स्वस्थ रखकर और कभी न थकने वाले हमारे स्वास्थ्यकर्मियों का बोझ न बढ़ाकर हम उन्हें धन्यवाद दे सकते हैं!"
"हाथ मिलाने से मोहब्बत बढ़ती है यार, इससे बीमारी नहीं फैलती।" - Video में इस सीन के बाद सभी हाथ मिलाकर गले से भी लिपटते हैं। मकसद साफ है - मजहब के नाम पर बीमारी से बचाव के उपायों का मखौल उड़ाया जा रहा है।
कुछ स्वोघोषित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने दोषियों को मिली मौत की सजा को बदले की कार्रवाई बताया। ऐसे ही एक मानवाधिकार कार्यकर्ता जयंत भट्टाचार्य ने निर्भया की माँ आशा देवी पर अपनी बेटी के लिए न्याय माँगने के लिए ‘गंदी मानसिकता’ और ‘खून की लालसा’ रखने का आरोप लगाया।
मोदी के समर्थन में लिबरल-सेक्युलर मीडिया गैंग के अलावा कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम का भी उतर आना वाकई सुखद आश्चर्य देता है, जिसने मोदी के जनता कर्फ्यू का दिल खोल कर स्वागत किया।
"कोरोना वायरस का इलाज अल्लाह ताला ने दिमाग में डाल दिया है। ये इलाज एकदम परफेक्ट है। बस कबूतर के विष्ठा को पानी में मिलाकर तीन बार पीना है। चूँकि कबूतर अल्लाह-अल्लाह करता है इसलिए ये इलाज सही है।"
शशि थरूर ने कोरोना महामारी के बीच भी नेहरू भक्ति में कोई ढील नहीं दी और फ़ौरन ट्विटर के माध्यम से नेहरू की भक्ति में एक फोटो ट्वीट करते हुए लिखा- "बिना किसी कमेन्ट के, रीसीव किया और साझा किया।"