Monday, June 21, 2021
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भारत की वैश्विक छवि के बदलाव में ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ की भूमिका

PM मोदी ने सॉफ्ट पावर के तौर पर संस्कृति का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। यह उस दौर के लौटने की शुरुआत हो सकती है, जिस दौर में भारत विश्व गुरु हुआ करता था। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विद्वान जोसेफ नाइ के अनुसार सॉफ्ट पॉवर...

भारत की वैश्विक छवि ‘विविधता में एकता’ की धारणा पर आधारित है। यही संस्कृतियों एवं सभ्यताओं की व्यापकता को भी दर्शाती है, जिसका प्रभाव दुनिया भर के लोगों पर है। मूलतः संस्कृति को ‘सॉफ्ट पॉवर’ कूटनीति के विस्तार के रूप में मान्यता दी गई है। इसे पूरी दुनिया में लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में भारत की विदेश नीति के महत्वपूर्ण साधन के रूप में माना गया है। सभ्यताओं के बीच एक संवाद विकसित करने के लिए संस्कृति के महत्व को पहचानते हुए भारत ने स्वतंत्रता के बाद से ही ’सांस्कृतिक कूटनीति’ के महत्व को दुनिया से जुड़ने के लिए एक उपकरण के रूप में स्थापित किया है।

सदियों से भारतीय कला, शिल्प, संस्कृति, परंपरा, योग, आयुर्वेद, संस्कृत, भारतीय संगीत, नृत्य और धर्म दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करता रहा है। साथ ही साथ वर्तमान भारतीय संगीत, व्यंजन, सिनेमा और बॉलीवुड ने भी लोगों को आकर्षित किया है। भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश नीति के पाँच स्तंभों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने एवं भारत की वैश्विक छवि को बदलने के लिए एक सफल प्रयास किया है। ये पाँच स्तंभ – सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा एवं संस्कृति और सभ्यता हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विद्वान जोसेफ नाइ के सॉफ्ट पॉवर की परिभाषानुसार प्रधानमंत्री मोदी भारत की वैश्विक पहुँच में बदलाव के वाहक बने हैं। जोसेफ नाइ के अनुसार सॉफ्ट पॉवर, इच्छित चीजों को आकर्षण के माध्यम से पाने की क्षमता रखना है ना कि दबाव या भुगतान के माध्यम से।

भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को आगे बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि पीएम मोदी के आह्वान के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 11 दिसंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित करना रहा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर हर साल मिलने वाली शानदार प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि योग को भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में काफी लोकप्रियता हासिल हुई है। लगभग सभी देशों के लोगों के बीच में योग काफी लोकप्रिय हुआ है। भारत के सॉफ्ट पॉवर प्रोजेक्शन में योग का एक राजनयिक उपकरण के रूप में प्रभावी उपयोग विदेशों में लोगों के मन में भारत की वैश्विक छवि को पुनर्जीवित कर रहा है।

भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने में मोदी सरकार ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने और बढ़ावा देने के लिए अपने संस्थागत तंत्र को पुनर्जीवित किया है। 2014 से मोदी सरकार के अंतर्गत सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आई सी सी आर) का काम यहाँ उल्लेखनीय है। 37 देशों में फैले अपने सांस्कृतिक केंद्रों के माध्यम से आई सी सी आर भारत और विदेशों में सांस्कृतिक समारोहों के आयोजन में लगा हुआ है। साथ ही साथ विदेशों में इंडियन स्टडीज चेयर्स की स्थापना, विदेशी छात्रों/अध्येताओं को भारत में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति/ फेलोशिप प्रदान करना और ऐसी अन्य कई सारी गतिविधियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार जारी है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने और बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए आई सी सी आर योग शिक्षकों को योग सिखाने के लिए विदेशों में भेजता है ताकि योग का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार हो सके। इसी का परिणाम है कि आई सी सी आर के सांस्कृतिक केंद्रों में योग कक्षाओं की माँग लगातार बढ़ रही है। 2015 में औपचारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने के बाद से, योग को एक नया वैश्विक आयाम मिला है। देखा जाए तो, मानवता की समग्र भलाई के लिए दुनिया को भारत की तरफ से यह एक उपहार ही है।

पीएम मोदी के विजन को ध्यान मे रखते हुए आई सी सी आर के मौजूदा अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने कई उल्लेखनीय काम किए हैं। उन्होंने सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने एवं देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए विभिन्न नए कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया है। वैश्विक पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से इनके कई सारे ऐसे काम हैं जिनका जिक्र यहाँ किया जा सकता है। उदाहरण के लिए योग, संस्कृत एवं अन्य भाषाओं को बढ़ावा देना। इतना ही नहीं, बल्कि इनके निर्देशन में आई सी सी आर एक महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस का आयोजन इसी महीने पुणे में कर रहा है जिसका नाम ‘डेस्टिनेशन इंडिया’ है। इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य, देश विदेश से आ रहे विदेशी छात्रों के प्रवाह को बेहतर करना और भारत को शिक्षा का पसंदीदा केंद्र बनाना है।

भारतीय संस्कृति को वैश्विक पटल पर ले जाने के लिए आई सी सी आर ने विश्व भर में भारतीय संस्कृति के प्रचार हेतु 2015 में अंतरराष्ट्रीय रामायण महोत्सव भी शुरू किया। पिछले साल आयोजित इस महोत्सव पर साझा सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से दुनिया से जुड़ने के महत्व को समझते हुए, डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने बल देकर कहा कि ‘रामायण एक वैश्विक सांस्कृतिक पूंजी है’ और ‘यह महोत्सव अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ वैश्विक सांस्कृतिक बहुलता को बढ़ावा देने के लिए आई सी सी आर की एक महत्वपूर्ण पहल का हिस्सा है। यह भारतीय संस्कृति के जीवंत अनुभव का एक आदर्श प्रवेश-द्वार है।’

पीएम मोदी ने भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ाने हेतु एक और महत्वपूर्ण कदम 2014 में उठाया। इसके अंतर्गत आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी विभाग को मंत्रालय बना दिया गया जिसको ‘आयुष’ के नाम से जाना जाता था। तब से आयुष मंत्रालय, आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए नीति निर्माण, विकास और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का कार्य कर रहा है।

संगीत, कला, सिनेमा के साथ-साथ अन्य देशों में अनुकूल जनमत बनाने के लिए सांस्कृतिक कूटनीति के अन्य उपकरणों के रूप में लोकप्रिय संस्कृति के उत्पादों को पहुंचा राष्ट्रीय हित को बढ़ाना मोदी सरकार की प्राथमिकता में रहा है। समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के लिए वैश्विक समर्थन और बढ़ती रुचि को देखते हुए, इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि पीएम मोदी भारतीय संस्कृति के प्रचार के माध्यम से भारत के हित को आगे बढ़ाने में सफल रहे हैं। यह राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर पीएम मोदी के राजनीतिक कौशल को दर्शाता करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह दिखा दिया कि सॉफ्ट पॉवर के बेहतर इस्तेमाल से हार्ड पॉवर के मुकाबले दीर्घकालिक ठोस परिणाम निकल सकते हैं।

अब तक के अपने कार्यकाल में मोदी सरकार ने सॉफ्ट पावर के तौर पर संस्कृति का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। यह उस दौर के लौटने की शुरुआत हो सकती है जिस दौर में भारत विश्व गुरु हुआ करता था। भारत की प्राचीन और महान सांस्कृतिक विरासत को पीएम मोदी जिस रफ्तार में लेकर दुनिया के सामने बढ़ रहे हैं, वो अद्भुत है। अब तक पश्चिमी संस्कृति के सामने हमारे सॉफ्ट पॉवर का बेहतर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। मोदी सरकार ने इस मिथक को तोड़ा की पश्चिमी संस्कृति के सापेक्ष हम अपनी महान संस्कृति को आगे नहीं बढ़ा सकते। अब आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय संस्कृति की ताकत को सॉफ्ट पॉवर के रूप में कितनी सफलता से इस्तेमाल किया जाएगा। कल्चरल डिप्लोमेसी को जो धार मोदी सरकार में मिली है, उससे भारत की वैश्विक छवि को कितनी मजबूती मिलेगी, इसे देखना भी एक सुखद अनुभव रहेगा।

Note: यह लेख पहले OpIndia के इंग्लिश वेबसाइट पर पब्लिश हो चुकी है, जिसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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Dr. Mukesh Kumar Srivastava
Dr. Mukesh Kumar Srivastava is Consultant at Indian Council for Cultural Relations (ICCR) (Ministry of External Affairs), New Delhi. Prior to this, he has worked at Indian Council of Social Science Research (ICSSR), New Delhi and Rambhau Mhalgi Prabodhini (RMP). He has done his PhD and M.Phil from the School of International Studies, Jawaharlal Nehru University, New Delhi.

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