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47 देशों की 140 फिल्में… दिल्ली का सिनेमाई महोत्सव राजधानी को बनाएगा ‘ग्लोबल फिल्म हब’, IFFD से पर्यटन-कारोबार-अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार

दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल 2026 का आयोजन किया गया है। 25 मार्च से 31 मार्च तक इसका आयोजन शहर के कई थियेटरों और दूसरे अहम केन्द्रों पर किया गया है। IFFD 2026 में 47 देशों की 140 से अधिक फिल्में दिखाई जा रही हैं। इनमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्में, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्में, एनिमेशन और हाइब्रिड फॉर्मेट शामिल हैं।

दिल्ली हमेशा से ही सिनेमा का गवाह रही है। लुटियंस दिल्ली की चौड़ी सड़कें, चांदनी चौक की चहल-पहल और पुरानी दिल्ली की संकरी गलियाँ-हर जगह कहानियाँ बसी हैं। अब राजधानी इस रिश्ते को और गहरा बनाने जा रही है। 25 से 31 मार्च 2026 तक दिल्ली सरकार मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कला-संस्कृति विभाग की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत International Film Festival Delhi (IFFD) 2026 का आयोजन कर रही है। भारत मंडपम सहित शहर के कई स्थानों पर यह उत्सव चल रहा है।

यह महोत्सव सिर्फ फिल्में दिखाने तक सीमित नहीं है। यह दिल्ली को वैश्विक सिनेमा का केंद्र बनाने का प्रयास है। देश-विदेश के अभिनेता, निर्देशक, निर्माता और फिल्म प्रेमी एक मंच पर आ रहे हैं। इससे न सिर्फ फिल्म निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दिल्ली का पर्यटन भी नई ऊँचाइयों को छू सकेगा।

उद्घाटन समारोह: क्या रहा अनुभव?

25 मार्च को भारत मंडपम में लाल कालीन बिछाई गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उत्सव का उद्घाटन किया। हेमामालिनी, शर्मिला टैगोर, कंगना रानौत, अर्जुन कपूर, निमरत कौर, विक्की कौशल, भूमि पेडनेकर जैसी कई हस्तियाँ मौजूद रहीं। उद्घाटन समारोह की पहली फिल्म ‘सिरात’ (Sirât) थी।

मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति ने भारतीय सिनेमा की यात्रा दिखाई। लेकिन उद्घाटन सत्र पूरी तरह जादू नहीं बिखेर पाया। एंकर के टेलीप्रॉम्प्टर में गड़बड़ी हुई, माइक अचानक बंद हो गया। दर्शकों की संख्या भी कम थी। बड़े मंच पर कलाकारों का प्रदर्शन प्रभावित हुआ। तालियाँ और दर्शकों की प्रतिक्रिया किसी भी कलाकार के उत्साह को दोगुना कर देती है, लेकिन वहाँ यह कमी महसूस हुई।

ये गलतियाँ पहला प्रयास होने के कारण स्वाभाविक हो सकती हैं। लेकिन इतने बड़े आयोजन में ऐसी कमियाँ नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं। जो एजेंसी इस उत्सव को संभाल रही है, अगर उसमें कोई कमी रही हो तो दिल्ली सरकार को अगले दिनों में उसके साथ बेहतर समन्वय करना चाहिए। गलतियों को सुधारने का पूरा मौका मिलना चाहिए।

उत्सव की खासियत और कार्यक्रम

IFFD 2026 में 47 देशों की 140 से अधिक फिल्में दिखाई जा रही हैं। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्में, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्में, एनिमेशन और हाइब्रिड फॉर्मेट शामिल हैं। भारत मंडपम, पीवीआर-आईनॉक्स थिएटर, पब्लिक स्पेस, आउटडोर लोकेशन और मोबाइल एलईडी यूनिट्स पर स्क्रीनिंग हो रही हैं।

सभी कार्यक्रम मुफ्त हैं, लेकिन जगह की सीमा के कारण पहले से रजिस्ट्रेशन जरूरी है। वेबसाइट https://www.iffdelhi.com/ पर रजिस्ट्रेशन चल रहा है।

मुख्य आकर्षण

  • CineXchange: फिल्म मार्केट जहां फिल्मकार अपनी परियोजनाएँ पिच कर सकते हैं, डील हो सकती है।
  • मास्टरक्लास और पैनल चर्चाएँ: मनोज बाजपेयी, अनुपम खेर, बोमन ईरानी, इम्तियाज अली, शेखर कपूर, राकेश ओमप्रकाश मेहरा, भूमि पेडनेकर जैसी हस्तियाँ शामिल हैं।
  • क्लासिक फिल्में: गुरु दत्त की जन्म शताब्दी पर ‘प्यासा’ की 4K रिस्टोर्ड वर्जन सहित कई पुरानी फिल्में दिखाई जा रही हैं। शोले की रिस्टोर्ड प्रिंट भी स्क्रीन पर लौट रही है।
  • महिला फिल्मकारों पर फोकस: ‘Her Lens’ जैसी पहल से महिलाओं की फिल्मों को जगह मिल रही है।
  • सांस्कृतिक संध्या: सोनम कालरा, अशीष विद्यार्थी, रिकी केज जैसी कलाकारों के कार्यक्रम।

असम की कई फिल्में भी चयनित हुई हैं, जैसे ‘मोरोमोर देउता’, ‘गनाराग’ आदि। इससे क्षेत्रीय सिनेमा को बढ़ावा मिल रहा है।

दिल्ली के लिए क्यों जरूरी है यह उत्सव?

दिल्ली लंबे समय से राजनीति और प्रशासन का केंद्र रही है। अब वह कला और संस्कृति का भी केंद्र बनना चाहती है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “सिनेमा भाषा और सीमाओं से परे लोगों को जोड़ता है। इस उत्सव के माध्यम से दिल्ली मुंबई, पुणे और गोवा के साथ कदम मिलाकर चलना चाहती है।”

कला, संस्कृति और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने इसे ‘ऐतिहासिक पहल’ बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली अब सिर्फ प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि रचनात्मकता का केंद्र बन रही है। यह उत्सव दिल्ली फिल्म पॉलिसी का प्रमुख हिस्सा है। इससे स्थानीय व्यवसायों, होटलों, परिवहन और पर्यटन को फायदा होगा। फिल्मकारों, आलोचकों और दर्शकों की आमद से दिल्ली की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। साथ ही, नए फिल्मकारों और युवा प्रतिभाओं को मंच मिलेगा।

चुनौतियाँ और भविष्य की राह

पहले दिन की कुछ कमियाँ सामने आईं। लेकिन अब अगले पाँच दिन तय करेंगे कि यह उत्सव भारत के बेहतरीन फिल्म महोत्सवों में शुमार होगा या नहीं। आंतरिक तैयारी को मजबूत करने की जरूरत है। दर्शकों की संख्या बढ़ानी होगी, तकनीकी गड़बड़ियों पर नियंत्रण रखना होगा और कार्यक्रमों को और आकर्षक बनाना होगा।

यह आयोजन अब हर साल होना है। पहली बार की गलतियों से सबक लेकर अगली बार इन्हें दोहराया नहीं जाना चाहिए। दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों को बेहतर समन्वय से काम करना होगा।

अगर यह उत्सव सफल रहा तो दिल्ली ग्लोबल फिल्म हब बन सकती है। दुनिया भर के फिल्मकार यहाँ आना पसंद करेंगे। कहानियाँ बनेगी, सहयोग बढ़ेगा और दिल्ली एनसीआर की सिनेमाई पहचान मजबूत होगी।

एक सुनहरा अवसर

IFFD 2026 दिल्ली के लिए सिर्फ एक फिल्म उत्सव नहीं, बल्कि एक सपने की शुरुआत है। फिल्मी चमक, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटकों की भीड़ से राजधानी सिनेमाई धमाके का गवाह बनेगी।

गलतियाँ होंगी, लेकिन उनकी चर्चा इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में सुधार हो और यह उत्सव हर साल और भव्य रूप ले। दिल्ली को विश्व स्तर का फिल्म केंद्र बनाने का यह सुनहरा मौका है। इसे सही दिशा में ले जाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

आयोजन 31 मार्च तक जारी रहेगा। आइए, दिल्ली वाले मिलकर इसे सफल बनाने में अपना योगदान दें। दिल्ली अब सिनेमा की नई राजधानी बनने की ओर बढ़ रही है।

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आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं।

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