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जिस मुस्लिम शौहर के चक्कर में छोड़ना पड़ा करियर-धर्म, वो पूजा बेदी को अब भी लगता है सेकुलर: लव जिहाद को बता रही ओवररेटेड, समझें इनकी ब्रेनवॉशिंग

पूजा बेदी ने बताया कि मुस्लिम ससुराल वालों की सोच के कारण उन्होंने बॉलीवुड छोड़ा, लेकिन फिर भी पुराने दौर को बताया ज्यादा सेक्युलर।

बॉलीवुड और उसकी कई अभिनेत्रियाँ अक्सर जमीन की हकीकत से कटी हुई नजर आती हैं और कई बार उनके बयान ऐसे होते हैं जो आम लोगों को वास्तविकता से बिल्कुल अलग लगते हैं।

ऐसा ही एक उदाहरण अभिनेत्री पूजा बेदी के उस इंटरव्यू में देखने को मिला, जो उन्होंने सुहासिनी मणिरत्नम के साथ जोस अलुक्कास के यूट्यूब चैनल पर दिया। इस इंटरव्यू में पूजा बेदी ने बताया कि उन्होंने एक्टिंग इसलिए छोड़ दी थी क्योंकि उनके रूढ़िवादी मुस्लिम ससुराल वालों को उनका फिल्मी करियर पसंद नहीं था।

लेकिन इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने अपने मुस्लिम शौहर से निकाह की थी तब देश में सच्चा सेक्युलरिज्म और डेमोक्रेसी थी, जो अब दिखाई नहीं देती।

पूजा बेदी ने कहा कि आज जिस तरह लव जिहाद, हिंदू-मुस्लिम जैसी बातें होती हैं, वह उन्हें बेहद दुखद लगती हैं। उनके मुताबिक जब वह बड़ी हो रही थीं तब समाज ज्यादा सेक्युलर और लोकतांत्रिक था।

हालाँकि उनके अपने ही बयान में एक बड़ा विरोधाभास नजर आता है। एक तरफ वह कहती हैं कि उनके मुस्लिम ससुराल वाले इतने रूढ़िवादी थे कि उन्होंने उनके करियर को स्वीकार नहीं किया, दूसरी तरफ वह उसी दौर को सच्चा सेक्युलर बताती हैं।

इंटरव्यू में पूजा बेदी ने यह भी कहा कि अगर वह अपने ससुराल वालों की इच्छा के खिलाफ जाकर फिल्मों में काम जारी रखतीं तो यह उनके साथ गलत होता। उन्होंने खुद को 100 प्रतिशत अच्छी बहू और बेगम बताते हुए कहा कि उनके ससुराल वालों को उनके काम करने से असहजता होती, इसलिए उन्होंने अपना करियर छोड़ना सही समझा।

यहाँ सवाल यह उठता है कि अगर किसी महिला को अपने पति और ससुराल वालों की धार्मिक सोच के कारण अपना करियर छोड़ना पड़े, तो क्या उसे ही सेक्युलरिज्म और डेमोक्रेसी का उदाहरण माना जाए?

इंडियन एक्सप्रेस ने अपने लेख से हटाया लव जिहाद वाला हिस्सा

दिलचस्प बात यह रही कि इंडियन एक्सप्रेस ने पूजा बेदी के इसी इंटरव्यू पर जो लेख प्रकाशित किया, उसमें उनके लव जिहाद वाले बयान का कोई जिक्र नहीं किया गया।

लेख में यह बताया गया कि पूजा बेदी ने निकाह के बाद अपने ससुराल वालों को खुश रखने के लिए अपना करियर छोड़ दिया, यहाँ तक कि उन्होंने फिल्मों के लिए मिली साइनिंग अमाउंट भी वापस कर दी थी। लेकिन उसी इंटरव्यू में उन्होंने जो आज लव जिहाद की बातें होती हैं वाला बयान दिया था, उसे लेख से गायब रखा गया।

इंडियन एक्सप्रेस ने पूजा बेदी के बयान से लव जिहाद का ज़िक्र हटाया

यह पहली बार नहीं है जब तथाकथित सेक्युलर और लिबरल नैरेटिव को बनाए रखने के लिए लव जिहाद जैसे मुद्दों को नजरअंदाज किया गया हो। आलोचकों का मानना है कि प्रभावशाली लोग, मीडिया संस्थान और राजनीतिक वर्ग लंबे समय से ऐसे मामलों को या तो कम करके दिखाते रहे हैं या पूरी तरह नकारते रहे हैं।

यही वजह है कि यह मुद्दा लगातार विवाद और बहस का विषय बना हुआ है। पूजा बेदी जैसी सफल और प्रसिद्ध अभिनेत्री के लिए लव जिहाद जैसी घटनाओं को केवल राजनीतिक प्रचार बताना कई लोगों को वास्तविक घटनाओं की अनदेखी लगता है।

भारत में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ महिलाओं के साथ झूठी पहचान, शादी, धर्म परिवर्तन या शोषण के आरोप लगे। आलोचकों का कहना है कि जब प्रभावशाली लोग इन मामलों को पूरी तरह खारिज कर देते हैं, तो इससे पीड़ितों की आवाज कमजोर पड़ती है।

सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि राजनीतिक और मीडिया वर्ग ने संवेदनशील मामलों को दबाने की कोशिश की। उदाहरण के तौर पर ब्रिटेन में पाकिस्तानी मूल के कुछ गैंग्स पर नाबालिग लड़कियों के शोषण के आरोप वर्षों तक चर्चा से दूर रहे।

इसी तरह केरल में भी चर्च संगठनों ने ईसाई लड़कियों को निशाना बनाकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप उठाए थे, जिन पर लंबे समय तक राजनीतिक बहस चलती रही। भारत में लव जिहाद शब्द तब ज्यादा चर्चा में आया जब केरल से जुड़े कुछ मामलों में लड़कियों के धर्म परिवर्तन और कट्टरपंथी संगठनों से जुड़ने के आरोप सामने आए।

इसके बाद देशभर में ऐसे कई मामले सामने आए जिनमें महिलाओं ने मुस्लिम युवकों पर झूठी पहचान, शादी और धर्म परिवर्तन के आरोप लगाए। हाल के वर्षों में सामने आए कई चर्चित मामलों को भी इसी बहस से जोड़कर देखा गया। TCS नासिक स्कैंडल ऐसे ही अपराधों की लंबी लिस्ट में नया नाम है, जिसका पूजा बेदी मजाक उड़ाने की कोशिश कर रही हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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