Wednesday, June 19, 2024
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2600 खाते, ₹300 करोड़: स्विस बैंकों में भारतीयों के खातों का ‘वारिस’ नहीं, सरकार को मिल सकता है जमा धन

हाल के बरसों में वैश्विक दबाव की वजह से स्विट्जरलैंड ने अपनी बैंकिंग प्रणाली को नियामकीय जॉंच के लिए खोला है। सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान की व्यवस्था के तहत हाल ही में भारतीयों के खातों की पहली सूची मुहैया कराई गई है। दूसरी सूची सितंबर 2020 में मिलेगी।

साल 2014 में भारत में आम चुनावों से पहले स्विस बैंक में जमा काले धन के मामले ने काफी तूल पकड़ा था। कुछ समय बाद स्विट्जरलैंड सरकार ने वैश्विक दबाव के चलते साल 2015 में निष्क्रिय खातों की जानकारी को सार्वजनिक करना शुरू कर दिया था। इस दौरान स्विस बैंक ने नीति बनाई थी कि खातों के दावेदारों को उसमें मौजूद धन हासिल करने के लिए आवश्यक प्रमाण उपलब्ध कराने होंगे। हालिया ख़बरों के मुताबिक स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों के करीब 12 निष्क्रिय खातों के लिए कोई दावेदार सामने नहीं आया है। आशंका जताई जा रही है कि इन खातों में पड़े पैसे स्विट्जरलैंड सरकार को स्थानांतरित किए जा सकते हैं।

इनमें से कुछ खाते भारतीय निवासियों और ब्रिटिश राज के दौर के नागरिकों से जुड़े हैं। स्विस बैंक के पास मौजूद आँकड़ों के अनुसार पिछले 6 साल में इनके खातों पर किसी ‘वारिस’ ने सफलतापूर्वक दावा नहीं किया है। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ खातों के लिए दावा करने की अवधि अगले माह ही समाप्त हो जाएगी। वहीं कुछ अन्य खातों पर 2020 के अंत तक दावा किया जा सकता है।

इस पूरे मामले में खास बात है कि निष्क्रिय खातों में से पाकिस्तानी निवासियों से संबंधित कुछ खातों पर भी दावा किया गया है। इसके अलावा खुद स्विट्जरलैंड ने अपने देश सहित कई और देशों के निवासियों के खातों पर भी दावा किया है।

बता दें, साल 2015 में पहली बार स्विट्जरलैंड बैंक द्वारा इस तरह के खातों को सार्वजनिक किया गया था। जिसके बाद मालूम चला था कि स्विस बैंक में इस तरह के करीब 2,600 खाते हैं, जिनमें 4.5 करोड़ स्विस फ्रैंक या करीब 300 करोड़ रुपये की राशि पड़ी है। खबरों के अनुसार 1955 से इस राशि पर दावा नहीं किया गया है।

इस सूची को सर्वप्रथम सार्वजनिक किए जाते समय करीब 80 सुरक्षा जमा बॉक्स थे। लेकिन स्विस बैंकिंग कानून के तहत इस सूची में हर साल नए खाते जुड़ रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार इन खातों की संख्या करीब 3,500 हो गई है।

गौरतलब है कि 2014 के बाद से शुरू हुई भारतीय राजनीति में स्विस बैंक में जमा बेहिसाब धन बड़ी बहस का हिस्सा रहा है। कहा जाता है कि पहले की सरकारों ने स्विट्जरलैंड के बैंक खातों में अपना अथाह धन रखा है।

ऐसे में लगातार सवालों के घेरे में आने के बाद और वैश्विक दवाब के कारण कुछ समय पहले ही स्विट्जरलैंड ने अपनी बैंकिंग प्रणाली को नियामकीय जाँच के लिए खोला है। साथ ही भारत सहित विभिन्न देशों के साथ वित्तीय मामलों पर सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान के लिए समझौता भी किया है। जिसके मद्देनजर ही भारत सरकार को हाल में विदेशी बैंकों में जमा काले धन को लेकर बड़ी कामयाबी हाथ लगी थी। स्विट्जरलैंड सरकार ने भारत को स्विस बैंक में भारतीय खातों की पहली सूची दी थी। भारत उन चुनिंदा देशों में से एक है जिसे स्विस बैंक से जुड़ी जानकारी मिली है।

स्विट्जरलैंड के टैक्स विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक भारत सरकार को दूसरी सूची सितंबर 2020 में मिलेगी। फिलहाल इस समय स्विट्जरलैंड में दुनिया के 75 देशों के करीब 31 लाख खाते हैं जो कि निशाने पर हैं। इनमें भारत के भी कई खाते शामिल हैं। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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