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3 राज्यों ने गंगा पर सीवर प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया, NGT ने ठोंका 25-25 लाख का जुर्माना

एनजीटी की खंडपीठ का कहना है कि इन तीनों राज्यों ने ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद भी अपना प्रतिनिधि पेश करना तक जरूरी नहीं समझा।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने लगातार हो रही गंगा की बेकदरी के लिए 3 राज्यों (बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल) को फटकार लगाई है, साथ ही इन राज्यों की लापरवाही के लिए इन पर 25-25 लाख का जुर्माना भी ठोंका है। एनजीटी ने जाँच में पाया है कि बिहार ने एक भी सीवेज प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया जबकि पश्चिम बंगाल ने 22 में से केवल तीन प्रोजेक्टों को पूरा किया है। वहीं पीठ ने झारखंड की प्रगति को भी अपर्याप्त बताया।

एनजीटी की खंडपीठ का कहना है कि इन तीनों राज्यों ने ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद भी अपना प्रतिनिधि पेश करना तक जरूरी नहीं समझा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले पर राज्यों का इस तरह का रवैया बिलकुल ठीक नहीं है। इतने गंभीर मामले में ऐसी असंवेदनशीलता बेहद चिंता का विषय है।

खंडपीठ ने कहा कि हम इन तीनों राज्यों पर 25-25 लाख रुपए बतौर जुर्माने का आदेश देते हैं। यह जुर्माना इन राज्यों को गंगा की लगातार हो रही दुर्गति पर ध्यान न देने के कारण देना होगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को यह रकम मिलने पर इसका इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाएगा।

एनजीटी ने इस दौरान क्रिकेट मैदान की सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले पेयजल पर चिंता जताई है। उन्होंने एक विशेषज्ञ समिति को पानी बचाने के उपाय पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल का कहना है कि पीने के पानी की कमी को देखते हुए आरओ को या तो खारिज किया जाना चाहिए या सीवर के पानी को संशोधित कर उसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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