वंदे मातरम को राष्ट्रगान बनाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल हुई याचिका, सुनवाई कल

दिल्ली हाई कोर्ट में दर्ज हुई इस याचिका पर अदालत के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायाधीश सी हरिशंकर की बेंच कल मंगलवार को सुनवाई करेगी।

‘वंदे मातरम’ गीत को लेकर समय-समय पर हमने सड़क से लेकर संसद तक में विवाद होते देखे हैं। लेकिन ऐसे में इसी बीच दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई है, जिसमें वंदे मातरम को राष्ट्रगान का दर्जा देने की माँग की गई है। साथ ही स्कूलों में इस गान को प्रतिदिन गाए जाने को अनिवार्य बनाने की भी माँग की गई है।

दिल्ली हाई कोर्ट में दर्ज हुई इस याचिका पर अदालत के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायाधीश सी हरिशंकर की बेंच कल मंगलवार को सुनवाई करेगी। इस याचिका को दर्ज कराने वाले शख्स का नाम अश्विनी उपध्याय है। अश्विनी भाजपा के नेता और पेश से वकील हैं।

भाजपा नेता अश्विनी उपध्याय के मुताबिक देश की आजादी में वंदे मातरम का अहम योगदान रहा है। आजादी के दौरान हर धर्म, जाति और वर्ग के लोगों ने वंदे मातरम गीत को गाते हुए आंदोलन में हिस्सा लिया था, लेकिन दुर्भाग्वश जन गण मन को देश में पूरा सम्मान मिला, लेकिन वंदे मातरम को भुला दिया गया।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

भाजपा नेता का कहना है कि देश में जन-गण-मन की तरह वंदे मातरम को लेकर कोई नियम नहीं बनाए गए। इसलिए उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका डालकर माँग की है कि इस गीत को राष्ट्रगान घोषित किया जाए। साथ ही इसे गाने के लिए नियम बनाए जाएँ। इसके अलावा देश के सभी बच्चों में देश भक्ति की भावना पैदा करने के लिए प्रतिदिन विद्यालयों में इसे गाना अनिवार्य किया जाना चाहिए।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by making a monetary contribution

बड़ी ख़बर

जेएनयू विरोध प्रदर्शन
छात्रों की संख्या लगभग 8,000 है। कुल ख़र्च 556 करोड़ है। कैलकुलेट करने पर पता चलता है कि जेएनयू हर एक छात्र पर सालाना 6.95 लाख रुपए ख़र्च करता है। क्या इसके कुछ सार्थक परिणाम निकल कर आते हैं? ये जानने के लिए रिसर्च और प्लेसमेंट के आँकड़ों पर गौर कीजिए।

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

114,921फैंसलाइक करें
23,424फॉलोवर्सफॉलो करें
122,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements
शेयर करें, मदद करें: