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9 साल के बेटे के लिए ‘इलाज या इच्छामृत्यु’ चाहती थी माँ, फरियाद पर सुनवाई से पहले गोद में तोड़ दिया दम

“हमने उसके इलाज के लिए लगभग 4 लाख रुपए खर्च कर दिए। हमने उसका इलाज तिरुपति, वेल्लोर और तमिलनाडु के कई शहरों में कराया। हम कई बड़े डॉक्टरों से भी मिले, लेकिन हर्षवर्धन की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।"

इकलौती संतान, उम्र: 9 साल और एक दुर्लभ बीमारी। फरियाद लेकर अदालत का चक्कर काटती माँ। एक दिन अचानक से बेटा माँ की गोद में दम तोड़ देता है। अब कल्पना कीजिए उस माँ के दर्द का। यह दर्द है आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले के चौडेपल्ली मंडल के बिरजेपल्ली गाँव की एक माँ का। 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जी. मणि और जी. अरुणा का 9 साल का बेटा हर्षवर्धन खून से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी से ग्रसित था। हर्षवर्धन जब चार साल का था, तब उसका एक्सीडेंट हुआ था। उसके बाद से अक्सर उसकी नाक से खून आ जाया करता था। इसके बाद दम्पति को बेटे की दुर्लभ बीमारी का पता चला।

परिवार के पास संसाधन बेहद सीमित थे। बावजूद उन्होंने इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। पेशे से किसान जी. मणि ने अपनी जमीन का कुछ हिस्सा भी बेच दिया। जी. अरुणा कहती हैं, “हमने उसके इलाज के लिए लगभग 4 लाख रुपए खर्च कर दिए। हमने उसका इलाज तिरुपति, वेल्लोर और तमिलनाडु के कई शहरों में कराया। हम कई बड़े डॉक्टरों से भी मिले, लेकिन हर्षवर्धन की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।”

अरुणा को किसी रिश्तेदार ने सलाह दिया कि उन्हें स्थानीय कोर्ट में आवेदन देना चाहिए कि या तो सरकार उनके बेटे हर्षवर्धन के इलाज में सहायता करे या फिर कोर्ट उसे इच्छामृत्यु की अनुमति दे। दो दिनों तक वह बेटे को लेकर याचिका दायर करने को लिए कोर्ट के चक्कर लगाती रहीं। मंगलवार (01 जून 2021) को भी अरुणा पुंगनूर कोर्ट में आवेदन लेकर ही आईं थी। लेकिन एक बार फिर वह आवेदन नहीं दे सकीं।

इसके बाद घर लौटने के लिए वह एक ऑटो रिक्शा में सवार हुईं। इसी दौरान अचानक फिर से हर्षवर्धन की नाक से खून आने लगा और थोड़ी ही देर में उसने माँ की गोद में ही दम तोड़ दिया। अरुणा ने कहा, “मैंने सोचा था कि कोर्ट में जाकर अपने बेटे को शायद बचा पाऊँ, लेकिन इससे पहले कि न्यायपालिका मेरी सहायता करती, मेरे बेटे ने मेरी गोद में ही दम तोड़ दिया।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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