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ईद पर मिथिला की जिस धरोहर को मुस्लिमों ने किया था अपवित्र, रामनवमी पर हिंदुओं ने किया उसका शुद्धिकरण: दरभंगा राजपरिवार के कपिलेश्वर सिंह ने की अगुवाई

उन्होंने जूते-चप्पल पहन कर रामेश्वर सिंह की प्रतिमा पर चढ़े जाने का विरोध करते हुए ऐलान किया कि वो अब अपने पितृ-पुरुषों की मूर्तियों की सुरक्षा के लिए उनके इर्दगिर्द ग्रील का घेरा लगाएँगे।

बिहार में एक जिला है – दरभंगा। बिहार के जिस इलाके को मिथिला कहते हैं, दरभंगा उसका एक अहम हिस्सा है। मैथिलि भाषी दरभंगा क्षेत्र की स्थिति अब ये है कि वहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या 23% के पार हो गई है। इसका एक दुष्प्रभाव ईद के दिन देखने को मिला, जब दरभंगा के दिवंगत महाराज रामेश्वर सिंह की प्रतिमा का मुस्लिम भीड़ ने अपमान किया। कुछ मुस्लिम उनकी प्रतिमा पर पाँव रख कर बैठ गए। दरभंगा राज परिसर में ईद पर भारी भीड़ जुटी हुई थी, उसी वक्त ये घटना हुई।

चौरंगी चौक पर रामेश्वर सिंह की प्रतिमा के साथ इस तरह के दुर्व्यवहार के कारण दरभंगा के लाखों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँची, जो आज भी उनका सम्मान करते हैं। श्यामा माई मंदिर में मुस्लिम समाज के लोगों को बोटिंग का आनंद लेते हुए भी देखा गया। इस दौरान भी अभद्रता का आरोप लगा, जिस कारण बोटिंग रोकनी पड़ी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मौके पर पहुँचना पड़ा। पुलिस ने कहा कि नाबालिग बच्चों ने कुछ हरकत की थी, जिन्हें समझा-बुझा कर हटा दिया गया।

दरभंगा पुलिस का कहना है कि विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र अंतर्गत हुई इस घटना में बच्चे शामिल थे। वहीं पुलिस ने तालाब में अभद्रता की बात से इनकार करते हुए कहा कि पुजारी और गार्ड्स के अलावा अन्य लोगों से भी थानाध्यक्ष ने पूछताछ की तो उन्होंने इस घटना से अनभिज्ञता जाहिर की। पुलिस के अनुसार, कोई साक्ष्य नहीं मिला। जबकि लोगों का कहना था कि दरभंगा महाराज की प्रतिमा के साथ उद्दंडता पूरे मैथिल समाज का अपमान है, मिथिला का अपमान है।

अब रामनवमी के दिन बड़ी संख्या में लोगों ने जुटान कर प्रतिमा का और आसपास के इलाके का शुद्धिकरण किया है। इसका नेतृत्व दरभंगा रियासत के उत्तराधिकारी कपिलेश्वर सिंह ने किया। युवा कपिलेश्वर सिंह ने रामनवमी को महान पर्व करार देते हुए राम को स्नेह-सौहार्द का प्रतीक पुरुष और अपना आदर्श करार दिया। उन्होंने कहा कि राम की शालीनता दुर्बलता नहीं बल्कि सबलता का परिचायक है, उन्होंने अन्याय का विरोध कर अन्यायियों का अंत किया था।

कपिलेश्वर सिंह ने कहा, “सन् 1577 में इसी दिन मेरे पूर्वजों को मिथिला की रियासत प्राप्त हुई थी। मेरे दादा कामेश्वर सिंह तक इस वंश के राजा हुए। मेरे परदादा रामेश्वर सिंह राजर्षि, विशुद्ध सनातनी, ‘हिन्दू धर्म महामण्डल’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, और आध्यात्मिक पुरुष थे। उनकी चिता पर ही माधवेश्वर श्मसान परिसर में माँ श्यामा माई विराजती हैं। ये मिथिला और नेपाल तक के धर्मावलम्बियों के लिए आस्था का केंद्र है। यहाँ का तालाब पवित्र नदियों के जल से अभिसंचित है। तालाब में वोटिंग पर रोक लगा कर इसकी शुचिता बनाए रखने में लोग सहयोग करें। “

उन्होंने जूते-चप्पल पहन कर रामेश्वर सिंह की प्रतिमा पर चढ़े जाने का विरोध करते हुए कहा कि वो अब अपने पितृ-पुरुषों की मूर्तियों की सुरक्षा के लिए उनके इर्दगिर्द ग्रील का घेरा लगाएँगे। दरभंगा महाराज की प्रतिमा के सामने नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई और मिथिला की कला का प्रदर्शन किया गया। माँ श्यामा माई मंदिर में पूजन-अर्चन किया गया। गंगा-यमुना समेत 5 पवित्र नदियों के जल से शुद्धिकरण हुआ। साथ ही चेताया गया है कि आगे से दरभंगा की विरासत का सम्मान किया जाए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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