Friday, April 12, 2024
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बधाई हो! जो DTC के इति​हास में कभी न हुआ, वह केजरीवाल सरकार ने कर दिखाया: 99% बसों की उम्र पूरी

वर्तमान में 3,760 बसों के मुकाबले DTC को 5,500 बसों की जरूरत है और AAP सरकार तो दिल्ली हाईकोर्ट में यह हलफनामा भी दाखिल कर चुकी है कि दिल्ली को लगभग 11,000 बसों की आवश्यकता है।

दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के द्वारा चलाई जा रही 3,760 बसों को ‘ओवरएज‘ घोषित कर दिया गया है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि ये अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 1971 में शुरू हुई राज्य परिवहन सेवा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 99% लो फ्लोर सीएनजी बसें अपनी तकनीकी परिचालन सीमा (टेक्निकल ऑपरेशनल लिमिट) को पार कर चुकी हैं। DTC, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार के अधिकार क्षेत्र में है, जहाँ पिछले कई सालों से अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसी बसों को ‘ओवरएज’ घोषित कर दिया जाता है जब उनका परिचालन 8 साल से अधिक हो चुका होता है। जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन (JNNURM) के कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक लो फ्लोर सीएनजी बसें अधिकतम 12 वर्षों तक अथवा 750,000 किमी तक परिचालन में रह सकती हैं। इन बसों की खराब हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनमें से कोई भी बस 6-8 साल पुरानी नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार मात्र 32 बसें 8-10 साल पुरानी हैं। उनके अलावा 3072 बसें 10-12 साल पुरानी और 656 ऐसी बसें हैं जो परिचालन सीमा (12 साल) को भी पार कर चुकी हैं। हालाँकि वर्तमान में 3,760 बसों के मुकाबले DTC को 5,500 बसों की जरूरत है और AAP सरकार तो दिल्ली हाईकोर्ट में यह हलफनामा भी दाखिल कर चुकी है कि दिल्ली को लगभग 11,000 बसों की आवश्यकता है। लेकिन अब इन ओवरएज बसों में ब्रेकडाउन की समस्या भी उत्पन्न हो रही है और साथ ही इनकी प्रतिदिन के फेरों की संख्या में भी कमी देखने को मिल रही है।

दिल्ली में संचालित निजी बसों को भी यदि जोड़ दिया जाए तो भी बसों की संख्या 6,750 ही रह जाती है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट की माने तो पिछली बार 2008 में DTC नई बसों की खरीद करने करने में सफल रहा था। इसके बाद 2013 से 2019 के बीच बसों की खरीद का टेंडर जारी किया तो गया, लेकिन पूरा नहीं हो सका। वर्तमान में DTC की ऐसी हालत देखते हुए नई बसों की खरीद के लिए बड़ी संख्या में टेंडर जारी करना मुश्किल प्रतीत होता है। हालाँकि ऐसे समय में जब DTC की बसों को ओवरएज घोषित कर दिया गया है तो उन्हें कायदे से संचालन से बाहर कर देना चाहिए।

एक तरह से देखा जाए तो DTC द्वारा ओवरएज बसों का संचालन लोगों की जान के साथ खिलवाड़ है। DTC के द्वारा पिछले कुछ सालों में स्क्रैप की गई बसों की संख्या भी न के बराबर रही है। 2020-21 में जहाँ मात्र 2 बसों को स्क्रैप किया गया वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष में स्क्रैप की गई बसों की संख्या शून्य रही है। DTC के ही मैनेजिंग डायरेक्टर विजय भादुड़ी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया है कि अब नई बसों की खरीद करना आवश्यक हो गया है, क्योंकि वर्तमान में संचालित बसों का मेंटेनेंस खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली के ट्रांसपोर्ट मंत्री कैलाश गहलोत ने भी DTC बसों की जर्जर हालत को स्वीकार करते हुए कहा है कि अरविन्द केजरीवाल को भी इसकी चिंता है और उनकी सरकार अगले 7 महीनों में 1,300 बसों खरीद करने जा रही है।

बीती 10 जुलाई 2021 को दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा गठित 3 सदस्यीय समिति ने DTC को एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) को खत्म करने का आदेश दिया था। यह आदेश प्रक्रियात्मक खामियों के चलते दिया गया था। उपराज्यपाल द्वारा 16 जून को बसों की खरीद और AMC में हुए कथित घोटाले की जाँच के लिए समिति का गठन किया गया था। समिति ने बसों की खरीद और वर्तमान बसों के मेंटेनेंस के लिए अलग-अलग जारी किए गए टेंडर को लेकर असंतोष प्रकट किया था। समिति ने पाया था कि ये टेंडर प्रवृत्ति में प्रतिरोधात्मक थे और साथ ही इनकी दरें भी काफी ऊँची रखी गई थीं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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